
वंदे मातरम् (संस्कृत / बंगला)
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्य श्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!
शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!
वंदे मातरम् ( हिंदी में अनुवाद )
मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ, हे माँ!
तुम जल से परिपूर्ण हो, फल से समृद्ध हो,
मलयगिरि की सुगंधित शीतल हवा से युक्त हो,
शस्य श्यामला (हरी-भरी) हो, हे माँ!
मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ, हे माँ!
चाँदनी से प्रकाशित रातों वाली,
खिले फूलों और वृक्षों से सुशोभित,
सुंदर मुस्कान और मधुर वाणी वाली,
सुख देने वाली, वरदान देने वाली हो, हे माँ!
मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ, हे माँ!.
भारत का राष्ट्रीय गीत ‘ वंदे मातरम् ‘ है, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी ने 1870 के दशक में लिखा था और यह उनके उपन्यास ‘आनंद मठ’ (1882) में शामिल किया गया था; यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा शक्ति बना और इसे 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया गया, जबकि राष्ट्रीय गान “जन गण मन” को रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था, जिसे 1911 में रचा गया और 1950 में राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया.
राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम् ” –
- रचयिता: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय (बंकिम चंद्र चटर्जी).
- रचना काल: 1870 के दशक में.
- भाषा: संस्कृत-बांग्ला मिश्रित भाषा में.
- प्रकाशित: 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंद मठ’ में शामिल किया गया.
- महत्व: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना.
