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त्सो कर झील

त्सो कर झील :- लद्दाख के चांगथांग पठार पर बिछा ‘सफेद नमक का जादुई कालीन ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) त्सो कर झील, जिसे ‘सफेद झील’ (White Lake) भी कहा जाता है, लद्दाख के दक्षिणी भाग में चांगथांग क्षेत्र के भीतर स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 4,530 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक उच्च-ऊंचाई […]

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त्सो मोरीरी झील

त्सो मोरीरी झील :- लद्दाख के ऊँचे पहाड़ों में छिपा एक विशाल नीला रत्न ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) त्सो मोरीरी, जिसे ‘माउंटेन लेक‘ भी कहा जाता है, लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में स्थित एक उच्च-ऊंचाई वाली झील है। यह समुद्र तल से लगभग 4,522 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। ऐतिहासिक रूप से, यह झील

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पेंगोंग त्सो झील

पेंगोंग त्सो झील :- हिमालय की गोद में बसा रंगों का जादुई संसार ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) पेंगोंग त्सो, जिसे ‘पेंगोंग झील‘ भी कहा जाता है, लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश) में लगभग 4,350 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। ‘पेंगोंग‘ शब्द तिब्बती भाषा के ‘पेंगोंग‘ से आया है जिसका अर्थ है ‘ऊँची घास के मैदान‘

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भारत का संपूर्ण इतिहास

भारत का संपूर्ण इतिहास :- आदि काल से आधुनिक उदय तक की महागाथा ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) ​भारत का इतिहास केवल एक देश की सीमा का इतिहास नहीं है, बल्कि यह एक जीवित सभ्यता की कहानी है जो हजारों वर्षों से निरंतर प्रवाहित हो रही है। 1. प्रागैतिहासिक और सिंधु घाटी सभ्यता (3300 ईसा पूर्व

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दिल्ली

दिल्ली :- भारत का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हृदय ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) दिल्ली केवल भारत की राजधानी ही नहीं, बल्कि इतिहास की कई परतों को समेटे हुए एक जीवंत शहर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसे महाभारत काल में ‘इंद्रप्रस्थ‘ के नाम से जाना जाता था। मध्यकाल में, दिल्ली पर तोमर, चौहान, गुलाम वंश, खिलजी,

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काकनवाड़ी किला ( अलवर )

काकनवाड़ी किला :- सरिस्का के घने जंगलों में छिपा इतिहास ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित यह किला एक पठार पर बना हुआ है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में आमेर के राजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। इतिहास में यह किला एक विशेष घटना के लिए

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शेरगढ़ किला ( धौलपुर )

शेरगढ़ किला, धौलपुर :- चंबल के बीहड़ों का अजेय रक्षक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) धौलपुर जिले में चंबल नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन किला मूल रूप से ‘दौलतगढ़‘ के नाम से जाना जाता था, जिसका निर्माण 15वीं शताब्दी में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने करवाया था। बाद में, 1540 ई. में अफगान शासक

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कनवास किला ( कोटा )

कनवास किला :- उजयार और चंबल की धाराओं का रक्षक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) कोटा जिले की कनवास तहसील में स्थित यह किला हाड़ौती क्षेत्र के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक रहा है। इसका इतिहास मुख्य रूप से हाड़ा चौहान शासकों के शौर्य से जुड़ा है। कनवास का किला सामरिक दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण

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प्रतापगढ़ किला

प्रतापगढ़ किला :- देवलिया की विरासत और अरावली का प्रहरी ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) राजस्थान के सबसे नए जिलों में से एक प्रतापगढ़ का ऐतिहासिक आधार इसका विशाल किला है। इस किले और शहर की स्थापना 1699 ई. में महाराणा प्रताप सिंह ने की थी। इससे पहले इस रियासत की राजधानी ‘देवलिया‘ हुआ करती थी।

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मनोहर थाना किला ( झालावाड़ )

मनोहर थाना किला :- परवन और कालीखाड़ नदियों का संगम रक्षक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) झालावाड़ जिले के सुदूर दक्षिण में स्थित मनोहर थाना किला ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। यह किला परवन और कालीखाड़ नदियों के पवित्र संगम पर बना हुआ है। प्राचीन काल में इसे ‘मनोहरगढ़‘ के नाम से

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