पटना पक्षी विहार , जलेसर ( एटा )

पटना पक्षी विहार जलेसर

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित पटना पक्षी विहार प्रकृति प्रेमियों और शांति की तलाश करने वालों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। जलेसर के पास स्थित यह छोटा सा अभयारण्य अपनी जैव-विविधता और प्रवासी पक्षियों के लिए पूरी दुनिया में एक विशेष पहचान रखता है।

1. परिचय :-

भले ही पटना पक्षी विहार उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी अभयारण्य हो (क्षेत्रफल लगभग 109 हेक्टेयर), लेकिन इसकी खूबसूरती बेमिसाल है। साल 1991 में स्थापित यह विहार हर साल हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले विदेशी पक्षियों का स्वागत करता है।

2. ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व (महाभारत काल से जुड़ाव) :-

इस जगह का इतिहास केवल पक्षियों तक सीमित नहीं है। अभयारण्य के भीतर स्थित ‘इच्छेश्वर महादेव मंदिर’ इसे आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से है। सदियों से यहाँ के निवासियों की धार्मिक आस्था ने पक्षियों के शिकार को रोकने और उनके संरक्षण में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। यह अभ्यारण्य बहुत सुंदर एवं इसका नजारा देखने योग्य है यहां पर भगवान शिव जी की एक शिवलिंग है मान्यता है कि आप शिवलिंग को अपनी बाहों में नहीं भर सकते, अगर भर लिया तो आप बहुत भाग्यशाली है । उस पर महादेव जी का आशीर्वाद है।

3. सर्दियों का जादुई नजारा :- प्रवासी पक्षी

सर्दियों के दस्तक देते ही यह जगह जीवंत हो उठती है। यहाँ की झील कमल के फूलों से भर जाती है और आसमान रंग-बिरंगे पक्षियों की चहचहाहट से गूँज उठता है।

  • मुख्य मेहमान :– साइबेरिया और मध्य एशिया से आने वाले रोज़ी पेलिकन, पिंटेल, गूज़ और लेसर व्हिसलिंग टील।
  • ​यहाँ पक्षियों की लगभग 300 से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं।

4. यहाँ के खास खजूर के वन :-

यहाँ की एक और अनोखी बात यहाँ पाए जाने वाले खजूर के घने पेड़ हैं। यह दृश्य उत्तर प्रदेश के अन्य मैदानी इलाकों से थोड़ा अलग और बेहद सुंदर लगता है, जो फोटोग्राफी के लिए एक बेहतरीन बैकग्राउंड तैयार करता है। खजूर के बन में खेलते हुए बंदर पाए जाते है । जो यहां की सुंदरता में चार चांद लगा देते है ।

5. यात्रा के लिए जरूरी जानकारी (Travel Tips) :-

  • सबसे अच्छा समय :– अक्टूबर के अंत से मार्च की शुरुआत तक। इस समय का नजारा देखने लायक होता है। इसके पीछे एक तालाब भी है जिसने सारस पक्षी रहते है। जो यहां की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं।
  • कैसे पहुँचें :– यह एटा शहर से मात्र 10-12 किमी दूर है। NH-34 के रास्ते निजी वाहन या ऑटो से आसानी से पहुँचा जा सकता है। इसके अलावा आप एटा से अवागढ़  , अवागढ़ से जलेसर , जलेसर से पटना पक्षी विहार आसानी से पहुंचा जा सकता है
  • समय :– सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक।

विगत वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न (PYQs)

1. उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी विहार कौन सा है?

  • उत्तर: पटना पक्षी विहार (क्षेत्रफल लगभग 1.09 वर्ग किमी)।

2. पटना पक्षी विहार उत्तर प्रदेश के किस जनपद में स्थित है?

  • उत्तर: एटा (जलेसर तहसील)।
  • नोट: अक्सर विकल्प में ‘पटना’ देखकर लोग बिहार समझ लेते हैं, लेकिन यह एटा में है।

3. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए (Match the following):

  • ​नवाबगंज पक्षी विहार – उन्नाव
  • ​ओखला पक्षी विहार – गाजियाबाद/गौतमबुद्ध नगर
  • ​समसपुर पक्षी विहार – रायबरेली
  • पटना पक्षी विहार – एटा
  • उत्तर: यह एक छिछली झील (Wetland) है जहाँ सर्दियों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी (Migratory Birds) जैसे ‘नॉर्दर्न पिनटेल’ और ‘ग्रे लैग गूज़’ आते हैं।

4. पटना पक्षी विहार को किस वर्ष अधिसूचित/स्थापित किया गया था?

  • उत्तर: 1991 में।

5. पटना पक्षी विहार की मुख्य विशेषता क्या है?

याद रखने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision) :-

निष्कर्ष :-

पटना पक्षी विहार न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनमोल हिस्सा है। यहाँ की शांति और पक्षियों का कलरव आपको मानसिक सुकून से भर देगा। अगली बार जब आप एटा के आसपास हों, तो इस ‘मिनी हेवन’ को देखना न भूलें।

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