नवाबगंज (शहीद चंद्रशेखर आज़ाद) पक्षी अभयारण्य

नवाबगंज पक्षी अभयारण्य

नवाबगंज (शहीद चंद्रशेखर आज़ाद) पक्षी अभयारण्य :- इतिहास, बनावट और पर्यटन की संपूर्ण जानकारी

​उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में स्थित नवाबगंज पक्षी अभयारण्य प्रकृति और रोमांच का एक अद्भुत केंद्र है। यह न केवल उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख रामसर साइट (2019) है, बल्कि हज़ारों मील दूर से आने वाले विदेशी पक्षियों का सुरक्षित बसेरा भी है।

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

1. नामकरण की कहानी :

इस स्थान का नाम ‘नवाबगंज‘ इसलिए पड़ा क्योंकि पुराने समय में अवध के नवाब यहाँ अपनी गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने और शिकार करने आते थे। 2015 में, उत्तर प्रदेश सरकार ने इसका आधिकारिक नाम बदलकर ‘शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी अभयारण्य’ कर दिया। यह क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद के प्रति एक श्रद्धांजलि है, जिनका पैतृक गाँव उन्नाव जिले में ही स्थित है।

2. रामसर साइट में शामिल होने का कारण :

इसे रामसर साइट का दर्जा इसलिए दिया गया क्योंकि यह ‘मध्य एशियाई फ्लाईवे’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ की आर्द्रभूमि (Wetland) न केवल पक्षियों को भोजन देती है, बल्कि यह आसपास के क्षेत्र के जल स्तर को बनाए रखने में भी मदद करती है।

3. स्थापना :

इस अभयारण्य की स्थापना 1984 में हुई थी। यह लगभग 225 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

1. झील और टापू (Interior Structure) :

अभयारण्य के बीचों-बीच एक विशाल प्राकृतिक झील है। झील के अंदर कई छोटे-छोटे टापू (Islands) बनाए गए हैं, जहाँ ऊँचे पेड़ लगाए गए हैं। ये टापू पक्षियों को शिकारी जानवरों से बचाते हैं और उन्हें सुरक्षित घोंसला बनाने की जगह देते हैं।

2. वॉच टावर और नेचर ट्रेल्स :

पूरे अभयारण्य में ऊँचे वॉच टावर बनाए गए हैं ताकि पर्यटक दूरबीन की मदद से पक्षियों को देख सकें। यहाँ पैदल चलने के लिए सुंदर रास्ते (Nature Trails) हैं, जो घने जंगलों के बीच से होकर गुज़रते हैं।

3. हिरण उद्यान और व्याख्या केंद्र :

यहाँ एक सुंदर हिरण उद्यान (Deer Park) है जहाँ चित्तीदार हिरण और बरसिंघा को देखा जा सकता है। साथ ही, बच्चों के लिए एक डिजिटल व्याख्या केंद्र (Interpretation Centre) बनाया गया है, जहाँ वे पक्षियों की आवाज़ें और उनके जीवन चक्र के बारे में ‘टच-स्क्रीन‘ के ज़रिए जान सकते हैं।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

टिकट और समय (Block Sequence) :

  • प्रवेश शुल्क :– ₹30 (भारतीय), ₹350 (विदेशी)।
  • कैमरा शुल्क :– ₹100 से ₹500 (उपकरण के अनुसार)।
  • पार्किंग :– ₹20 से ₹50।
  • समय :– सुबह 6:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक।
  • सबसे अच्छा समय :– नवंबर से मार्च (जब प्रवासी पक्षी यहाँ होते हैं)।

पहुँचने का मार्ग (Routes) :

  • सड़क मार्ग :– यह लखनऊ-कानपुर हाईवे (NH-27) पर स्थित है। लखनऊ से 45 किमी और कानपुर से 35 किमी की दूरी पर है।
  • रेल मार्ग :– उन्नाव जंक्शन (18 किमी) सबसे पास है, जहाँ से टैक्सी या ऑटो मिल जाते हैं।
  • हवाई मार्ग :– चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (अमौसी), लखनऊ यहाँ से मात्र 35-40 किमी दूर है।

पर्यटन के विशेष बिंदु :

  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– मुख्य झील का किनारा, वॉच टावर और हिरण उद्यान।
  • स्थानीय स्वाद :– हाईवे पर मिलने वाले मशहूर ‘मक्खन मलाई’ (सर्दियों में) और उन्नाव के कबाब।
  • प्रसिद्ध बाज़ार :– नवाबगंज का स्थानीय बाज़ार और पास ही स्थित ‘कुशहरी देवी मंदिर‘ के बाहर की दुकानें।

रोचक तथ्य (Interesting Facts)

  1. लंबी उड़ान :– यहाँ आने वाले ‘पिंटेल‘ पक्षी साइबेरिया से करीब 5000 किमी की उड़ान भरकर आते हैं।
  2. राजकीय पक्षी :– उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी ‘सारस क्रेन’ यहाँ साल भर देखा जा सकता है।
  3. डॉल्फिन की तरह सुरक्षा :– जैसे गंगा में डॉल्फिन सुरक्षित हैं, वैसे ही इस दलदली क्षेत्र में कछुओं की दुर्लभ प्रजातियाँ फल-फूल रही हैं।
  4. हवाई अड्डा पक्षियों का :– पक्षी विज्ञानियों के अनुसार, यह झील प्रवासी पक्षियों के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल जैसा काम करती है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

  • प्रश्न 1:- क्या अभयारण्य के अंदर भोजन ले जाना मना है?
    • उत्तर:– आप भोजन ले जा सकते हैं, लेकिन प्लास्टिक फैलाना सख्त मना है और पक्षियों को कुछ भी खिलाना दंडनीय अपराध है।
  • प्रश्न 2:- क्या यहाँ रुकने के लिए कोई होटल है?
    • उत्तर:– परिसर के अंदर ‘राही गेस्ट हाउस’ है, जिसे उत्तर प्रदेश पर्यटन द्वारा चलाया जाता है।
  • प्रश्न 3:- बच्चों के लिए यहाँ क्या खास है?
    • उत्तर:– बच्चों के लिए हिरण उद्यान, झूलों वाला पार्क और डिजिटल इंटरप्रिटेशन सेंटर सबसे रोमांचक हैं।
  • प्रश्न 4:- क्या झील में बोटिंग की अनुमति है?
    • उत्तर:– नहीं, पक्षियों की शांति भंग न हो, इसलिए झील में बोटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है।

“नवाबगंज की यह झील महज़ एक पानी का स्रोत नहीं, बल्कि हज़ारों विदेशी परिंदों का वो भरोसा है जो उन्हें हर साल हज़ारों मील की दूरी तय कर इस पावन मिट्टी पर खींच लाता है।”

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