पुराना संसद भवन (संविधान सदन), दिल्ली

स्वतंत्र भारत की ऐतिहासिक नियति और लोकतंत्र का मंदिर

पुराना संसद भवन (संविधान सदन), दिल्ली :- स्वतंत्र भारत की ऐतिहासिक नियति और लोकतंत्र का मंदिर

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

नई दिल्ली के लुटियंस जोन के केंद्र में स्थित ‘पुराना संसद भवन’ (जिसे अब आधिकारिक रूप से ‘संविधान सदन’ नाम दिया गया है) केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के जन्म, उसके संघर्ष, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक यात्रा का सबसे बड़ा जीवंत गवाह है। इस ऐतिहासिक भवन की नींव 12 फरवरी 1921 को ‘ड्यूक ऑफ कनॉट‘ द्वारा रखी गई थी और इसके निर्माण में लगभग 6 वर्ष का समय लगा। इस भव्य इमारत का उद्घाटन 18 जनवरी 1927 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इर्विन द्वारा किया गया था। ब्रिटिश काल में इसे ‘काउंसिल हाउस‘ (Council House) के नाम से जाना जाता था। इसे ब्रिटिश काल के दो महान वास्तुकारों—सर एडविन लुटियंस और सर हरबर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया था।

15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, तो इसी इमारत के ऐतिहासिक ‘सेंट्रल हॉल‘ (Central Hall) में सत्ता का हस्तांतरण हुआ और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण “ट्रिस्ट विद डेस्टिनी” (Tryst with Destiny) दिया था। इसी इमारत के भीतर भारत के महान सपूतों और विचारकों ने बैठकर लगभग 2 साल, 11 महीने और 18 दिन की कड़ी मेहनत के बाद हमारे पवित्र भारतीय संविधान का निर्माण किया था। साल 1950 से लेकर 2023 तक, इस इमारत ने भारत की संसद के रूप में काम किया, जहाँ देश के भविष्य को बदलने वाले अनगिनत ऐतिहासिक कानून और नीतियां बनाई गईं। सितंबर 2023 में, संसद की सभी कार्यवाही नए संसद भवन में स्थानांतरित कर दी गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुरानी इमारत को सम्मान देते हुए इसका नाम ‘संविधान सदन’ रखने का प्रस्ताव दिया।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture) :-

​पुराने संसद भवन की वास्तुकला दुनिया के सबसे अनूठे और भव्य डिजाइनों में से एक है। इसकी बनावट में यूरोपीय औपनिवेशिक शैली और पारंपरिक भारतीय शिल्प कौशल का एक अद्भुत मिश्रण दिखाई देता है। ऐसा माना जाता है कि इसकी अनूठी गोलाकार बनावट मध्य प्रदेश के मुरैना में स्थित ‘चौंसठ योगिनी मंदिर’ से प्रेरित है।

  • बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :– यह पूरी इमारत पूरी तरह से गोलाकार (Circular) है, जिसका व्यास (Diameter) 560 फीट है और यह लगभग छह एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैली हुई है। इस इमारत की सबसे बड़ी विशेषता इसके चारों ओर बने 144 भव्य ग्रेनाइट के खंभे (Pillars) हैं, जो इसकी बाहरी गैलरी को सहारा देते हैं। ये खंभे इसकी वास्तुकला को एक राजसी और क्लासिक लुक देते हैं। इमारत का बाहरी हिस्सा मुख्य रूप से धौलपुर के उत्तम लाल और हल्के पीले बलुआ पत्थरों (Sandstone) से बनाया गया है। इसके चारों तरफ बने खूबसूरत फव्वारे और हरे-भरे बगीचे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।
  • आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :– इस गोलाकार भवन के ठीक केंद्र में स्थित है इसका विश्व प्रसिद्ध ‘सेंट्रल हॉल’ (Central Hall), जिसके ऊपर एक बहुत बड़ा और भव्य गुंबद (Dome) बना है। यह हॉल भारतीय इतिहास का केंद्र बिंदु है। सेंट्रल हॉल के चारों तरफ तीन बड़े अर्ध-वृत्ताकार (Semi-circular) कक्ष बने हुए हैं, जिन्हें पहले लोकसभा, राज्यसभा और पुस्तकालय (Library) के रूप में उपयोग किया जाता था। आंतरिक दीवारों और छतों पर की गई सूक्ष्म नक्काशी, मुगलों और हिंदुओं की पारंपरिक स्थापत्य कला से प्रेरित जालियां और खंभे इसके कलात्मक मूल्य को दर्शाते हैं। दीवारों पर देश के महान राष्ट्रीय नेताओं के आदमकद चित्र (Portraits) सजे हुए हैं।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-

पुराना संसद भवन नई दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण, वीआईपी और कड़ी सुरक्षा वाले क्षेत्र ‘संसद मार्ग’ (Parliament Street) पर स्थित है। यहाँ आने के लिए आवश्यक गाइड नीचे दी गई है।

  • प्रवेश टिकट और अनुमति (Entry Ticket & Admission) :– सुरक्षा कारणों से, पुराने संसद भवन (संविधान सदन) के भीतर आम जनता का सीधे प्रवेश प्रतिबंधित है। हालांकि, आप इसके बाहरी परिसर, संसद संग्रहालय (Parliament Museum) को देखने के लिए टिकट ले सकते हैं। संसद की कार्यवाही देखने के लिए विशेष पास (Visitor Pass) की आवश्यकता होती है, जो किसी सांसद की सिफारिश या विशेष अनुमति द्वारा ही बनता है। इसके बाहरी दृश्यों को आप बाहर की मुख्य सड़क से मुफ्त में देख और महसूस कर सकते हैं।
  • समय (Visiting Timings) :– इस वीआईपी क्षेत्र और इसके बाहरी रास्तों को देखने का सबसे अच्छा समय सुबह 09:00 बजे से शाम 05:00 बजे के बीच का है। संसद संग्रहालय सोमवार और सरकारी छुट्टियों को छोड़कर बाकी दिनों में पर्यटकों के लिए खुला रहता है।
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :
    • मेट्रो द्वारा :– यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी और सुविधाजनक मेट्रो स्टेशन ‘केंद्रीय सचिवालय’ (Central Secretariat) है, जो येलो लाइन और वायलेट लाइन का एक प्रमुख इंटरचेंज स्टेशन है। इसके अलावा ‘उद्योग भवन’ (Udyog Bhawan) और ‘पटेल चौक’ (Patel Chowk) मेट्रो स्टेशन भी बेहद पास हैं। इन स्टेशनों से संसद भवन मात्र 5 से 10 मिनट की पैदल दूरी पर स्थित है।
    • बस द्वारा :– केंद्रीय दिल्ली और राष्ट्रपति भवन की ओर जाने वाली दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसें आपको ‘संसद भवन’ या ‘कृषि भवन’ बस स्टॉप पर उतारेंगी, जो इस परिसर के बिल्कुल समीप हैं।
    • ऑटो/कैब :– कनॉट प्लेस, इंडिया गेट या नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से आप सीधे ऑटो या कैब करके मात्र 5 से 10 मिनट में इस ऐतिहासिक मार्ग तक पहुँच सकते हैं।

आसपास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions) :-

  • नया संसद भवन (New Parliament House) :– पुराने भवन के ठीक बगल में स्थित भारत का नया, अत्याधुनिक और भव्य त्रिकोणीय संसद भवन, जो नए भारत की आधुनिक तकनीक और वास्तुकला का प्रतीक है।
  • राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) :– भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास स्थान, जो अपनी विशालता और राजसी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और यहाँ से मात्र 1 किलोमीटर दूर है।
  • इंडिया गेट और कर्तव्य पथ (India Gate & Kartavya Path) :– दिल्ली का मुख्य राष्ट्रीय स्मारक और खूबसूरत टहलने का मार्ग, जहाँ शाम के समय लाखों लोग आते हैं।
  • राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) :– भारत के प्राचीन इतिहास, मूर्तियों और कलाकृतियों का सबसे बड़ा संग्रह केंद्र, जो जनपथ रोड पर पास ही स्थित है।
  • जंतर मंतर (Jantar Mantar) :– महाराजा जयसिंह द्वारा निर्मित ब्रिटिश काल से भी पुरानी एक ऐतिहासिक खगोलीय वेधशाला, जो संसद मार्ग पर ही थोड़ी दूरी पर स्थित है।

फोटोग्राफी, स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार (Lifestyle Guide) :-

  • फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :– पुराने संसद भवन के 144 खंभों वाली बाहरी गोलाकार संरचना को विजय चौक (Vijay Chowk) से या संसद मार्ग के मुख्य द्वार से फ्रेम करना एक बेहतरीन और गर्व से भर देने वाली तस्वीर देता है। (ध्यान दें: यह एक अत्यधिक संवेदनशील वीआईपी क्षेत्र है, इसलिए यहाँ सुरक्षा बलों के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। कुछ विशेष कोणों और संवेदनशील द्वारों पर फोटोग्राफी पर सख्त प्रतिबंध है)।
  • स्थानीय स्वाद (Local Taste) :– संसद के आसपास के सरकारी कार्यालयों के क्षेत्रों में मिलने वाली कड़क चाय, समोसे और सैंडविच बहुत लोकप्रिय हैं। इसके अलावा भोजन के शौकीन पास के ‘कनॉट प्लेस’ के प्रसिद्ध रेस्तरां या बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित विभिन्न राज्यों के भवनों की कैंटीन (जैसे आंध्र भवन) में जाकर बेहतरीन क्षेत्रीय व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Markets) :– खरीदारी के लिए पास ही स्थित ‘कनॉट प्लेस’, ‘जनपथ मार्केट’ और ‘पालिका बाजार’ सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय विकल्प हैं, जहाँ से आप हस्तशिल्प, कपड़े और किताबें खरीद सकते हैं।

रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-

  • ​पुराने संसद भवन के गोलाकार डिजाइन को लेकर हमेशा से यह चर्चा रही है कि यह मध्य प्रदेश के मितावली (मुरैना) में स्थित 11वीं शताब्दी के प्राचीन ‘चौंसठ योगिनी मंदिर’ की वास्तुकला से हूबहू मिलता है, हालांकि ब्रिटिश वास्तुकारों ने इसे कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया था।
  • ​इस इमारत के ‘सेंट्रल हॉल’ का उपयोग लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्रों (Joint Sessions) के लिए किया जाता था। इसी हॉल की छतों पर लगे पंखे जमीन से ऊंचे खंभों पर उल्टे (नीचे से ऊपर की ओर हवा देने के लिए) लगाए गए थे, जो इसकी आंतरिक बनावट का एक बेहद अनोखा और दिलचस्प हिस्सा हैं।
  • ​13 दिसंबर 2001 को इसी ऐतिहासिक इमारत पर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने एक कायरतापूर्ण हमला किया था, जिसे हमारे वीर सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान पर खेलकर नाकाम कर दिया था। उन शहीदों की यादें आज भी इस परिसर से जुड़ी हैं।
  • ​इस भवन की विशाल संसद लाइब्रेरी (Parliament Library) भारत की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी मानी जाती है, जिसमें संविधान की मूल हस्तलिखित प्रतियों (Original Handwritten Copies) को हीलियम गैस से भरे विशेष बक्सों में बेहद सुरक्षित रखा गया है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: पुराने संसद भवन को अब किस नए नाम से जाना जाता है?

उत्तर:- पुराने संसद भवन को अब आधिकारिक रूप से ‘संविधान सदन’ (Samvidhan Sadan) के नाम से जाना जाता है। यह नाम इसे सितंबर 2023 में संसद की कार्यवाही नए भवन में जाने के बाद दिया गया।

प्रश्न 2: पुराने संसद भवन की इमारत का डिजाइन किसने तैयार किया था?

उत्तर:- इस भव्य गोलाकार इमारत का डिजाइन प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकारों सर एडविन लुटियंस और सर हरबर्ट बेकर द्वारा 1920 के दशक में तैयार किया गया था।

प्रश्न 3:- क्या आम पर्यटक पुराने संसद भवन के अंदर जा सकते हैं?

उत्तर:- सुरक्षा कारणों से आम पर्यटकों को मुख्य संसद कक्षों के भीतर जाने की अनुमति नहीं है। हालांकि, पर्यटक परिसर में स्थित संसद संग्रहालय (Parliament Museum) को देखने के लिए जा सकते हैं या बाहर से इसकी भव्यता की तस्वीरें ले सकते हैं।

​लेखक के विचार (Author’s Thoughts)

​पुराने संसद भवन (संविधान सदन) के सामने खड़े होना इतिहास के किसी विशाल महाकाव्य के पन्नों को पलटने जैसा है। इसके 144 खंभों के बीच से गुजरने वाली ठंडी हवाओं में आज भी गांधी, नेहरू, पटेल, और आंबेडकर के विचारों की गूंज महसूस की जा सकती है। यह वह स्थान है जहाँ एक गुलाम देश ने अपनी संप्रभुता की पहली सांस ली थी और अपने स्वतंत्र भविष्य की इबारत लिखी थी। भले ही आज देश को एक नया और आधुनिक संसद भवन मिल गया हो, लेकिन इस पुरानी गोलाकार इमारत की भव्यता और इसका ऐतिहासिक महत्व हमेशा हमारे दिलों में सर्वोच्च रहेगा। यह इमारत हमारे लोकतंत्र की जड़ है, और इसकी दीवारें आने वाली पीढ़ियों को हमेशा भारतीय लोकतंत्र की महानता की कहानी सुनाती रहेंगी।

“संविधान सदन (पुराना संसद भवन) भारत के अतीत का वह गौरवशाली अध्याय है, जिसने एक नवजात राष्ट्र की उंगली थामकर उसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया।”

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