काशी विश्वनाथ मंदिर

मोक्ष की नगरी का स्वर्ण शिखर

काशी विश्वनाथ मंदिर :- मोक्ष की नगरी का स्वर्ण शिखर

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है और इसका उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। इतिहास में कई बार इस मंदिर को तोड़ा गया और पुनः निर्मित किया गया। वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा करवाया गया था। हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘काशी विश्वनाथ कॉरिडोर‘ का निर्माण किया गया है, जिसने मंदिर को सीधे गंगा घाटों से जोड़ दिया है, जिससे भक्तों का अनुभव दिव्य हो गया है।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

  • स्वर्ण शिखर :– मंदिर के मुख्य शिखर पर लगभग 800 किलोग्राम शुद्ध सोने की परत चढ़ी हुई है, जिसे पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने दान किया था। इसीलिए इसे ‘गोल्डन टेम्पल ऑफ वाराणसी‘ भी कहा जाता है।
  • गर्भगृह :– मंदिर के अंदर मुख्य शिवलिंग (विश्वनाथ) स्थापित है, जो एक चांदी के घेरे के अंदर स्थित है। भक्त यहाँ ‘स्पर्श दर्शन’ भी कर सकते हैं (नियमों के अनुसार)।
  • कॉरिडोर की भव्यता :– नया बना कॉरिडोर लगभग 5 लाख वर्ग फुट में फैला है, जिसमें चूनार के बलुआ पत्थरों का उपयोग किया गया है। यहाँ छोटे-बड़े कई अन्य मंदिर, पुस्तकालय और संग्रहालय भी स्थित हैं।
  • नक्काशी :– मंदिर की दीवारों पर हिंदू देवताओं की सुंदर मूर्तियां और पारंपरिक भारतीय कला का बारीक काम देखने को मिलता है।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

  • टिकट (Ticket) :– सामान्य प्रवेश निःशुल्क है। सुगम दर्शन के लिए ₹300 और मंगला आरती के लिए अलग शुल्क (ऑनलाइन बुकिंग) निर्धारित है।
  • समय (Timing) :– मंदिर भक्तों के लिए सुबह 4:00 बजे से रात 11:00 बजे तक खुला रहता है।
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :–  हवाई मार्ग :– लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) मंदिर से लगभग 25 किमी दूर है।
    • रेल मार्ग :– वाराणसी जंक्शन (BSB) और बनारस (BSBS) मुख्य रेलवे स्टेशन हैं।
    • सड़क मार्ग :– वाराणसी दिल्ली, कोलकाता और लखनऊ जैसे शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है। शहर के अंदर आप ई-रिक्शा का उपयोग कर सकते हैं।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– गंगा घाट से कॉरिडोर का प्रवेश द्वार, मंदिर का स्वर्ण शिखर और शाम को होने वाली गंगा आरती (दशाश्वमेध घाट)। (मंदिर परिसर के अंदर फोन प्रतिबंधित है)।
  • स्थानीय स्वाद :– वाराणसी की प्रसिद्ध ‘कचौड़ी-सब्जी’, ‘बनारसी पान’ और ‘मल्इयो’ (सर्दियों में) का स्वाद ज़रूर लें।
  • प्रसिद्ध बाज़ार :– ‘विश्वनाथ गली‘ और ‘ठठेरी बाज़ार‘ जहाँ से आप मशहूर बनारसी रेशमी साड़ियाँ और हस्तशिल्प खरीद सकते हैं।

Interesting Facts (रोचक तथ्य)

  1. ​माना जाता है कि वाराणसी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई है और यह दुनिया का सबसे पुराना निरंतर बसा हुआ शहर है।
  2. ​काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने से और गंगा में स्नान करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) मिल जाती है।
  3. मंदिर के बगल में स्थित ‘ज्ञानवापी कुआं‘ के बारे में कहा जाता है कि आक्रमणों के दौरान मुख्य शिवलिंग को बचाने के लिए उसे इसी कुएं में छिपाया गया था।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार किसने करवाया था?

उत्तर:- वर्तमान मुख्य मंदिर का निर्माण 1780 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था।

प्रश्न 2: क्या मंदिर गंगा नदी के किनारे है?

उत्तर:- हाँ, नए कॉरिडोर के माध्यम से अब यह मंदिर सीधे गंगा के ललिता और मणिकर्णिका घाटों से जुड़ गया है।

प्रश्न 3:- मंदिर पर सोना किसने चढ़ाया था?

उत्तर:- 1839 में महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखरों को सोने से मढ़ने के लिए सोना दान किया था।

लेखक के विचार (Writer’s Thoughts) :-

​काशी केवल एक शहर नहीं, एक अहसास है। जब आप संकरी गलियों से गुजरते हुए और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच मंदिर पहुँचते हैं, तो शरीर में एक अलग ही ऊर्जा का संचार होता है। कॉरिडोर बनने के बाद अब यह मंदिर और भी भव्य और सुलभ हो गया है। यहाँ की शाम की गंगा आरती और मंदिर की शांति आपको जीवन की नश्वरता और ईश्वर की सर्वोच्चता का अनुभव कराती है।

“गंगा की लहरें और महादेव का वास, काशी में मिलता है मोक्ष का आभास।”

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