तीन मूर्ति भवन, दिल्ली

स्वतंत्रता संग्राम की यादें, आधुनिक भारत की नींव और नेहरू का आशियाना

तीन मूर्ति भवन, दिल्ली :- स्वतंत्रता संग्राम की यादें, आधुनिक भारत की नींव और नेहरू का आशियाना

​विस्तृत जानकारी (Detailed History)

नई दिल्ली के मध्य में स्थित ‘तीनमूर्ति भवन’ (Teen Murti Bhavan) भारत के सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। यह केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण, इसकी विदेश नीति और लोकतांत्रिक इतिहास की जीवंत गवाह है। इस भव्य इमारत का निर्माण ब्रिटिश काल के दौरान साल 1930 में करवाया गया था। उस समय इसे ‘फ्लैगस्टाफ हाउस’ (Flagstaff House) कहा जाता था और यह ब्रिटिश भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ (प्रधान सेनापति) का आधिकारिक निवास स्थान हुआ करता था। इसे नई दिल्ली के मुख्य वास्तुकार रॉबर्ट टोर रसेल (Robert Tor Russell) द्वारा डिजाइन किया गया था।

साल 1947 में जब भारत को आजादी मिली, तो इस इमारत को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के आधिकारिक निवास के रूप में चुना गया। नेहरू जी अगस्त 1948 से लेकर अपनी मृत्यु (27 मई 1964) तक, लगभग 16 वर्षों तक इसी घर में रहे। उनकी मृत्यु के बाद, इस पूरे परिसर को उनकी स्मृति में राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया और इसे ‘नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी’ (NMML) में बदल दिया गया। हाल ही में, भारत के लोकतांत्रिक इतिहास को और अधिक व्यापक रूप से प्रदर्शित करने के लिए इस परिसर का विस्तार किया गया है और यहाँ देश के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों को समर्पित एक अत्याधुनिक ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय‘ का निर्माण भी किया गया है।

​बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

​तीनमूर्ति भवन की वास्तुकला लुटियंस दिल्ली के अन्य शानदार ब्रिटिश-औपनिवेशिक भवनों जैसी ही भव्य है, जिसमें शास्त्रीय यूरोपीय शैली (Classical European Style) और भारतीय तत्वों का एक सुंदर मिश्रण दिखाई देता है।

  • बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :– यह भव्य दो मंजिला इमारत मुख्य रूप से गहरे लाल और हल्के पीले बलुआ पत्थरों (Sandstone) से बनाई गई है। इसके सामने एक बहुत बड़ा और खूबसूरत लॉन (बगीचा) है। इमारत के ठीक सामने मुख्य चौराहे पर ‘तीन मूर्ति’ नामक एक प्रसिद्ध स्मारक स्थित है। यह तीन कांस्य (Bronze) मूर्तियों का एक समूह है, जिसे प्रसिद्ध मूर्तिकार लियोनार्ड जेनिंग्स द्वारा 1922 में बनाया गया था। ये मूर्तियाँ प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा, गाजा और फिलिस्तीन में शहीद हुए जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद लांसर्स के वीर भारतीय सैनिकों की याद में बनाई गई हैं। इसी चौराहे और मूर्तियों के कारण इस पूरे परिसर का नाम ‘तीनमूर्ति भवन‘ पड़ा।
  • आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :– भवन के भीतर प्रवेश करते ही आपको एक विशाल केंद्रीय सीढ़ी और ऊंचे गलियारे दिखाई देते हैं। इसके अंदर नेहरू जी के शयनकक्ष (Bedroom), उनके अध्ययन कक्ष (Drawing Room) और उनके शानदार व्यक्तिगत पुस्तकालय को ठीक उसी स्थिति में सहेज कर रखा गया है, जैसा वह उनके जीवनकाल में था। कमरे की दीवारों पर सागौन की लकड़ी (Teak Wood) की फिनिशिंग है और फर्श पर लगा शानदार संगमरमर इसके शाही अतीत को दर्शाता है। परिसर के भीतर ही एक अत्याधुनिक नेहरू तारामंडल (Nehru Planetarium) और देश के सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान को दर्शाने वाला डिजिटल ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ भी वास्तुकला और तकनीक का नया उदाहरण प्रस्तुत करता है।

​यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

तीनमूर्ति भवन नई दिल्ली के बेहद सुरक्षित, हरे-भरे और वीआईपी लुटियंस क्षेत्र (तीनमूर्ति मार्ग) में स्थित है। यहाँ आने के लिए आवश्यक गाइड नीचे दी गई है।

  • प्रवेश टिकट (Entry Ticket) :– मुख्य नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और इसके बगीचों में घूमने के लिए प्रवेश पूरी तरह से मुफ्त है। हालांकि, यदि आप परिसर के भीतर स्थित ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ और ‘नेहरू तारामंडल’ (Nehru Planetarium) देखना चाहते हैं, तो उसके लिए अलग से टिकट काउंटर या ऑनलाइन माध्यम से शुल्क (करीब ₹50 से ₹100 के बीच) देना होता है।
  • समय (Visiting Timings) :– यह परिसर मंगलवार से रविवार तक सुबह 09:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक खुला रहता है। ध्यान दें कि प्रत्येक सोमवार को यह परिसर पूरी तरह से बंद रहता है
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :
    • मेट्रो द्वारा :– यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘लोक कल्याण मार्ग’ (Lok Kalyan Marg) है, जो येलो लाइन पर स्थित है। इसके अलावा वायलेट लाइन पर स्थित ‘खान मार्केट’ (Khan Market) मेट्रो स्टेशन भी पास है। इन दोनों स्टेशनों से आप आसानी से ऑटो-रिक्शा या ई-रिक्शा लेकर 5 से 10 मिनट में यहाँ पहुँच सकते हैं।
    • बस द्वारा :– मध्य दिल्ली और राष्ट्रपति भवन की ओर जाने वाली दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसें आपको ‘तीनमूर्ति’ बस स्टॉप पर उतारेंगी, जो इस परिसर के बिल्कुल बाहर स्थित है।
    • ऑटो/कैब :– कनॉट प्लेस, इंडिया गेट या नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से आप सीधे कैब या ऑटो करके यहाँ बेहद आसानी से पहुँच सकते हैं।

आसपास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions) :-

  • राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) :– भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास स्थान और देश की सबसे भव्य इमारतों में से एक, जो यहाँ से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है।
  • इंडिया गेट (India Gate) :– भारत का राष्ट्रीय स्मारक और अमर जवान ज्योति, जो दिल्ली आने वाले हर पर्यटक का पसंदीदा स्थान है और यहाँ से बहुत नजदीक है।
  • राष्ट्रीय रेल संग्रहालय (National Rail Museum) :– चाणक्यपुरी में स्थित एक बेहद खूबसूरत संग्रहालय, जहाँ भारत के रेल इतिहास की पुरानी और शाही ट्रेनों को देखा जा सकता है।
  • खान मार्केट (Khan Market) :– दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध और प्रीमियम बाजार, जो अपने बेहतरीन कैफे, बुटीक और किताबों की दुकानों के लिए जाना जाता है।
  • लोधी गार्डन (Lodhi Garden) :– सैर करने और शांति से वक्त बिताने के लिए दिल्ली का एक बेहद खूबसूरत ऐतिहासिक पार्क, जहाँ सैय्यद और लोधी काल के मकबरे स्थित हैं।

फोटोग्राफी, स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार (Lifestyle Guide) :-

  • फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :– तीनमूर्ति भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगी तीन सैनिकों की कांस्य मूर्तियाँ, भवन का भव्य बलुआ पत्थर का फ्रंट व्यू और इसके अंदर स्थित खूबसूरत गुलाब के बगीचे (Rose Gardens) फोटोग्राफी के लिए सबसे शानदार स्पॉट्स हैं। (ध्यान दें :- संग्रहालय के भीतर कुछ जगहों पर कैमरे के उपयोग के कड़े नियम हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय निर्देशों का पालन करें)।
  • स्थानीय स्वाद (Local Taste) :– परिसर के भीतर पर्यटकों के लिए एक साफ-सुथरा कैफे उपलब्ध है। इसके अलावा, लजीज खाने के शौकीन पास के चाणक्यपुरी के यशवंत प्लेस (Yashwant Place) के मोमोज या खान मार्केट के प्रसिद्ध रेस्तरां में जाकर बेहतरीन भोजन का स्वाद ले सकते हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Markets) :– हस्तशिल्प और कपड़ों की खरीदारी के लिए पास में स्थित ‘जनपथ बाजार’ और ‘दिल्ली हाट (आईएनए)’ सबसे बेहतरीन और लोकप्रिय विकल्प हैं।

रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-

  • तीनमूर्ति चौक पर स्थित तीन मूर्तियाँ वास्तव में उन भारतीय घुड़सवार सैनिकों (Cavalry Lancers) की वीरता का प्रतीक हैं, जिन्होंने 1918 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इजरायल के ‘हाइफा शहर‘ को ओटोमन साम्राज्य के कब्जे से आजाद कराया था। इस ऐतिहासिक युद्ध की याद में इस चौक को अब आधिकारिक रूप से ‘तीनमूर्ति हाइफा चौक’ भी कहा जाता है।
  • ​पंडित जवाहरलाल नेहरू को गुलाब के फूल बेहद पसंद थे। उनके इसी शौक के कारण तीनमूर्ति भवन के विशाल बगीचों में दुनिया भर के खूबसूरत और दुर्लभ गुलाबों की किस्में उगाई गई थीं, जो आज भी इस परिसर की शोभा बढ़ाती हैं।
  • ​इसी भवन के एक हिस्से में नेहरू जी को दुनिया भर के राष्ट्रध्यक्षों द्वारा दिए गए अनूठे उपहार और भारत के संविधान की एक मूल प्रति (Original Copy) को भी बेहद सुरक्षित तरीके से प्रदर्शित किया गया है।
  • ​इस परिसर का पुस्तकालय (Library) आधुनिक भारत के इतिहास पर शोध करने वाले विद्वानों और इतिहासकारों के लिए दुनिया के सबसे बड़े और समृद्ध केंद्रों में से एक माना जाता है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1: तीनमूर्ति भवन को ‘तीनमूर्ति’ नाम क्यों दिया गया?

उत्तर:- इस भवन के ठीक सामने मुख्य चौराहे पर तीन भारतीय लांसर्स (सैनिकों) की कांस्य मूर्तियाँ लगी हैं, जो प्रथम विश्व युद्ध के वीरों की याद में बनी हैं। इन्हीं तीन मूर्तियों के कारण इस जगह को तीनमूर्ति भवन कहा जाता है।

प्रश्न 2: क्या तीनमूर्ति भवन सोमवार को खुला रहता है?

उत्तर:- नहीं, तीनमूर्ति भवन (संग्रहालय, तारामंडल और लाइब्रेरी सहित) सोमवार को साप्ताहिक रूप से बंद रहता है। आप मंगलवार से रविवार के बीच यहाँ जा सकते हैं।

प्रश्न 3:- इस परिसर को देखने के लिए कितना समय पर्याप्त है?

उत्तर:- यदि आप मुख्य नेहरू संग्रहालय, प्रधानमंत्री संग्रहालय और बगीचों को अच्छी तरह देखना चाहते हैं, तो आपको कम से कम 2 से 3 घंटे का समय लेकर यहाँ आना चाहिए।

लेखक के विचार (Author’s Thoughts) :-

​तीनमूर्ति भवन दिल्ली की उन चुनिंदा जगहों में से है जहाँ कदम रखते ही आपको एक अलग तरह की गंभीरता और शांति का अहसास होता है। लुटियंस दिल्ली की चौड़ी सड़कों और घने पेड़ों के बीच बसा यह भवन हमें उस दौर में ले जाता है जब स्वतंत्र भारत के भविष्य की नीतियां इसी छत के नीचे तय की जा रही थीं। नेहरू जी के अध्ययन कक्ष की खिड़की से बाहर देखना या प्रधानमंत्री संग्रहालय में देश की विकास यात्रा को महसूस करना, इतिहास के साथ एक गहरा जुड़ाव पैदा करता है। यह जगह सिर्फ पुरानी यादों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय को यह याद दिलाती है कि एक मजबूत लोकतंत्र को बनाने के लिए कितने महान संघर्ष और दूरदर्शी सोच की आवश्यकता होती है।

“तीनमूर्ति भवन दिल्ली का वह ऐतिहासिक गलियारा है, जहाँ भारत के संघर्षमय अतीत की यादें और आधुनिक राष्ट्र के सुनहरे सपने एक साथ सांस लेते हैं।”

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