भारत मंडपम नई दिल्ली

आधुनिक भारत की भव्यता

भारत मंडपम नई दिल्ली :- आधुनिक भारत की भव्यता, इतिहास और संपूर्ण विज़िटर गाइड

विस्तृत जानकारी (Detailed History) :-

भारत मंडपम (Bharat Mandapam) आधुनिक भारत की प्रगति, वास्तुकला और वैश्विक प्रभाव का सबसे भव्य प्रतीक है। नई दिल्ली के मध्य में स्थित ऐतिहासिक ‘प्रगति मैदान’ परिसर के भीतर निर्मित यह एक अत्याधुनिक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-सम्मेलन केंद्र (IECC) है। इस भव्य परिसर का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 26 जुलाई 2023 को किया गया था। भारत मंडपम का नामकरण भगवान बसवेश्वर के ‘अनुभव मंडपम‘ के विचार से प्रेरित है, जो 12वीं शताब्दी में लोकतांत्रिक और सामाजिक चर्चाओं का एक ऐतिहासिक सार्वजनिक मंच हुआ करता था।

इस वैश्विक परिसर का सबसे बड़ा ऐतिहासिक गौरव सन् 2023 में आयोजित ‘जी-20 शिखर सम्मेलन’ (G20 Summit) की मेजबानी करना है। इसी स्थान पर दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्रध्यक्षों (जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति, ब्रिटिश प्रधानमंत्री आदि) ने वैश्विक नीतियों पर मंथन किया था। शिखर सम्मेलन के दौरान यहाँ भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ डिजिटल इंडिया की आधुनिक ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया गया था। लगभग 123 एकड़ में फैले प्रगति मैदान के पुनर्विकास प्रोजेक्ट के मुख्य हिस्से के रूप में इसे तैयार किया गया है, जिसने दिल्ली को वैश्विक बिजनेस और डिप्लोमेसी के मानचित्र पर शीर्ष स्थान पर ला खड़ा किया है।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture) :-

भारत मंडपम की वास्तुकला आधुनिक इंजीनियरिंग और पारंपरिक भारतीय संस्कृति का एक ऐसा बेजोड़ मिश्रण है जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है। इसकी बनावट की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं।

  • शंख जैसी बनावट (Shankha-shaped Design) :– इस बहुमंजिला भव्य इमारत का मुख्य आकार (Shape) भारत के पवित्र और पारंपरिक ‘शंख’ से प्रेरित है। वास्तुकला की यह शैली भारत के प्राचीन ज्ञान और आधुनिकता के प्रवाह को दर्शाती है।
  • ग्लास और स्टील की भव्यता :– इमारत के बाहरी हिस्से (Facade) में विशाल ग्लास पैनल्स और अत्याधुनिक स्टील स्ट्रक्चर्स का उपयोग किया गया है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का लुक देते हैं। इसकी दीवारों पर देश की विभिन्न पारंपरिक कलाओं, जैसे पंचतत्व (आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी) और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नक्काशी और भित्तिचित्रों (Murals) के माध्यम से उकेरा गया है।
  • आंतरिक बनावट (Interior) :– भारत मंडपम के अंदरूनी हिस्से में देश की विविधता की झलक मिलती है। यहाँ की कालीनों को कश्मीर और भदोही के कारीगरों ने बुना है, तो दीवारों पर अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक कलाकृतियाँ लगाई गई हैं। इस परिसर में एक भव्य बहुउद्देशीय हॉल (Plenary Hall) और एक विशाल एम्फीथिएटर (Open-air Amphitheatre) है, जिसमें 3,000 से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता है। इसकी कुल बैठक क्षमता ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध ‘सिडनी ओपेरा हाउस’ से भी अधिक है।
  • नटराज की विशाल प्रतिमा :– भारत मंडपम के ठीक सामने दुनिया की सबसे ऊंची (लगभग 27 फीट) अष्टधातु से बनी नटराज की प्रतिमा स्थापित है। चोल साम्राज्य की पारंपरिक शैली में बनी यह भव्य प्रतिमा भगवान शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य (तांडव) और भारत की अमर कलात्मक विरासत का प्रतीक है।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-

यदि आप नई दिल्ली के इस आधुनिक अजूबे और जी-20 की ऐतिहासिक स्थली को करीब से देखना चाहते हैं, तो यहाँ संपूर्ण गाइड दी जा रही है।

  • टिकट (Entry Fee) :– भारत मंडपम के अंदरूनी सम्मेलन कक्षों में प्रवेश आमतौर पर केवल विशिष्ट व्यापारिक प्रदर्शनियों, सरकारी कार्यक्रमों या वैश्विक सम्मेलनों के दौरान ही टिकट या आमंत्रण पत्र के माध्यम से होता है। हालांकि, प्रगति मैदान में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध आयोजनों (जैसे ‘अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला‘ या ‘भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला – IITF‘) के दौरान आम जनता टिकट खरीदकर इस परिसर के बाहरी हिस्से, सेल्फी पॉइंट्स और भव्य नटराज प्रतिमा को करीब से देख सकती है।
  • समय (Visiting Time) :– यहाँ का समय परिसर में चल रहे विशिष्ट कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों पर निर्भर करता है। सामान्यतः प्रदर्शनियों के दौरान यह सुबह 10:00 बजे से शाम 07:30 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। शाम के समय रंग-बिरंगी लाइटों से नहाया हुआ भारत मंडपम देखने लायक होता है।
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :– लुटियंस दिल्ली के नजदीक मथुरा रोड पर स्थित होने के कारण यहाँ पहुँचना बेहद आसान है:
    • मेट्रो द्वारा (By Metro) :– यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘सुप्रीम कोर्ट’ (Supreme Court Metro Station) है, जो दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन (Blue Line) पर स्थित है। इस स्टेशन का नाम पहले प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन हुआ करता था। स्टेशन से बाहर निकलते ही प्रगति मैदान का गेट नंबर 10 स्थित है, जहाँ से आप सीधे भारत मंडपम परिसर की ओर जा सकते हैं।
    • बस और ऑटो द्वारा :– मथुरा रोड पर स्थित होने के कारण दिल्ली के सभी कोनों से प्रगति मैदान के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं। आप आनंद विहार, नई दिल्ली या पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से सीधे ऑटो, ई-रिक्शा (e-rickshaw) या कैब करके भी आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :– विशाल अष्टधातु नटराज प्रतिमा के ठीक सामने का हिस्सा, रात के समय रंग-बिरंगी रोशनी में चमकता हुआ भारत मंडपम का शंख जैसा मुख्य मुखौटा, और परिसर के अंदर बने सुंदर फव्वारे फोटोग्राफी के लिए सबसे लोकप्रिय और बेहतरीन स्पॉट्स हैं।
  • स्थानीय स्वाद (Local Food) :– भारत मंडपम परिसर के भीतर प्रदर्शनियों के दौरान विशाल फूड कोर्ट्स चालू रहते हैं, जहाँ देश-विदेश के लजीज व्यंजन मिलते हैं। इसके अलावा, इसके बिल्कुल पास स्थित ‘सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन’ के आस-पास कई प्रसिद्ध भोजनालय हैं। आप पास ही स्थित बंगाली मार्केट जाकर बंगाली मिठाइयों और चाट का स्वाद भी ले सकते हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Markets) :– यहाँ से कुछ ही दूरी पर दिल्ली का प्रसिद्ध ‘कनॉट प्लेस’ (Connaught Place) और ‘खान मार्केट’ स्थित हैं, जहाँ से आप विश्वस्तरीय ब्रांड्स, किताबों और हस्तशिल्प की बेहतरीन खरीदारी कर सकते हैं। इसके अलावा प्रगति मैदान के ठीक बगल में स्थित पुराना किला के सामने का क्षेत्र भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

आसपास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions) :-

भारत मंडपम की यात्रा के दौरान आप इसके आस-पास स्थित इन ऐतिहासिक और प्रसिद्ध स्थलों को भी देख सकते हैं।

  1. पुराना किला (Purana Qila) :– भारत मंडपम के बिल्कुल नजदीक स्थित यह दिल्ली के सबसे प्राचीन किलों में से एक है, जो शेरशाह सूरी और हुमायूं के इतिहास को दर्शाता है।
  2. राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र (National Science Centre) :– बच्चों और विज्ञान प्रेमियों के लिए प्रगति मैदान के गेट के पास ही स्थित यह एक अद्भुत और ज्ञानवर्धक म्यूजियम है।
  3. राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय (National Crafts Museum) :– भारतीय हस्तशिल्प, पारंपरिक कला और ग्रामीण भारत की वास्तुकला को प्रदर्शित करने वाला यह एक बेहद सुंदर और शांत संग्रहालय है।
  4. सुप्रीम कोर्ट म्यूजियम (Supreme Court Museum) :– भारत के कानूनी इतिहास और न्याय प्रणाली को समझने के लिए यह एक अनोखा स्थान है, जो पास ही स्थित है।

रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-

  • ​भारत मंडपम के निर्माण में भारत की पारंपरिक और वैश्विक पहचान दोनों का ध्यान रखा गया है। इसके एम्फीथिएटर के सामने बना शानदार ओपन-व्यू लॉन इतना विशाल है कि वहाँ एक साथ हजारों लोग बैठ सकते हैं।
  • यहाँ स्थापित 27 फीट ऊंची नटराज की प्रतिमा को तमिलनाडु के स्वामीमलाई के प्रसिद्ध मूर्तिकार राधाकृष्णन स्थापति और उनकी टीम ने प्राचीन ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग‘ (Lost Wax Casting) विधि से तैयार किया है, जिसका वजन लगभग 18 टन है।
  • जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान इसी मंडपम के भीतर ‘डिजिटल इंडिया एक्सपीरियंस ज़ोन‘ बनाया गया था, जहाँ विदेशी मेहमानों ने भारत के UPI पेमेंट सिस्टम और एआई (AI) तकनीक का लाइव अनुभव लिया था।
  • ​बैठक और बैठने की कुल क्षमता के मामले में यह भव्य परिसर दुनिया के सबसे बड़े कन्वेंशन सेंटरों जैसे जर्मनी के हनोवर प्रदर्शनी केंद्र और शंघाई के कन्वेंशन सेंटर को टक्कर देता है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1: भारत मंडपम का नाम किस ऐतिहासिक विचार से प्रेरित है?

उत्तर:- भारत मंडपम का नाम 12वीं शताब्दी में कर्नाटक में भगवान बसवेश्वर द्वारा स्थापित ‘अनुभव मंडपम‘ से प्रेरित है, जो लोकतांत्रिक चर्चाओं और सामाजिक सुधारों का एक ऐतिहासिक मंच था।

प्रश्न 2: भारत मंडपम की मुख्य इमारत की बनावट कैसी है?

उत्तर:- इस इमारत की मुख्य बनावट भारत के पारंपरिक और पवित्र ‘शंख’ के आकार से प्रेरित है। इसका स्थापत्य आधुनिक ग्लास, स्टील और प्राचीन भारतीय कला का मिश्रण है।

प्रश्न 3:- भारत मंडपम पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन कौन सा है?

उत्तर:- यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन’ (ब्लू लाइन) है, जो प्रगति मैदान परिसर के बिल्कुल पास स्थित है।

प्रश्न 4: भारत मंडपम के सामने स्थापित नटराज की मूर्ति क्यों खास है?

उत्तर:- यह दुनिया की सबसे ऊंची अष्टधातु की नटराज प्रतिमा है, जिसकी ऊंचाई लगभग 27 फीट और वजन 18 टन है। इसे चोल स्थापत्य शैली के आधार पर पूरी तरह पारंपरिक तरीके से बनाया गया है।

लेखक के विचार (Author’s Thoughts) :-

दिल्ली को हमेशा से उसके मुगलकालीन या ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक स्मारकों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन भारत मंडपम 21वीं सदी के आत्मनिर्भर और आधुनिक भारत की एक नई पहचान है। जब आप इस भव्य परिसर के सामने खड़े होकर विशाल नटराज प्रतिमा और रोशनी से जगमगाती शंखनुमा इमारत को देखते हैं, तो एक भारतीय के रूप में आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। यह केवल एक कंक्रीट की इमारत नहीं है, बल्कि यह उस वैश्विक मंच का गवाह है जहाँ भारत ने ‘वसुधैव कुटुंबकम‘ (विश्व एक परिवार है) के नारे के साथ पूरी दुनिया को एकता का संदेश दिया था। यदि आप दिल्ली में इतिहास के साथ-साथ आधुनिक भारत की भव्यता और वैश्विक कूटनीति के केंद्र को महसूस करना चाहते हैं, तो प्रगति मैदान के इस आधुनिक अजूबे को देखना आपके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।

“प्राचीन संस्कृति के शंखनाद और आधुनिकता के आकाश को छूता भारत मंडपम, आज वैश्विक मंच पर नए और सामर्थ्यवान भारत की एक अटूट पहचान बन चुका है।”

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