GLA यूनिवर्सिटी, मथुरा (GLA University, Mathura)

GLA यूनिवर्सिटी, मथुरा

GLA यूनिवर्सिटी, मथुरा (GLA University, Mathura) : शिक्षा का आधुनिक केंद्र, ब्रज का गौरव और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश की पावन धरा मथुरा में दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) पर चौमुहाँ के समीप स्थित जीएलए यूनिवर्सिटी (GLA University, Mathura) उत्तर भारत के प्रमुख और प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालयों में से एक है। वर्ष 1998 में एक छोटे से इंजीनियरिंग कॉलेज (GLA Institute of Technology & Management) के रूप में स्थापित यह संस्थान आज एक विशाल और अग्रणी विश्वविद्यालय का रूप ले चुका है।

भगवान श्री कृष्ण की पावन क्रीड़ास्थली ब्रज में स्थित यह विश्वविद्यालय न केवल उच्च गुणवत्ता वाली आधुनिक शिक्षा, शोध और तकनीकी ज्ञान का केंद्र है, बल्कि यह इस ऐतिहासिक क्षेत्र के शैक्षणिक और सामाजिक परिवर्तन का भी एक प्रमुख स्तंभ है।

​विस्तृत जानकारी (Detailed History)

​जीएलए यूनिवर्सिटी की नींव वर्ष 1998 में समाज सेवी और उद्योगपति श्री नारायण दास अग्रवाल द्वारा अपने स्वर्गीय पिता श्री गणेशी लाल अग्रवाल (Ganeshi Lal Agrawal) की स्मृति में रखी गई थी। प्रारंभ में यह उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय (UPTU/AKTU) से संबद्ध एक इंस्टीट्यूट (GLAITM) था, जहाँ केवल बी.टेक और एमबीए जैसी शाखाएँ शुरू की गई थीं।

​शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन और तीव्र विकास के कारण वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश सरकार के अधिनियम के तहत इसे पूर्ण ‘विश्वविद्यालय’ (University) का दर्जा प्रदान किया गया। आज इस विश्वविद्यालय को NAAC द्वारा उच्च ग्रेडिंग (‘A+’ Grade) प्राप्त है और यूजीसी (UGC) से मान्यता प्राप्त है। यहाँ देश भर से हज़ारों छात्र इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, कंप्यूटर एप्लीकेशन, बायोटेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर और लॉ जैसे विषयों में उच्च शिक्षा ग्रहण करने आते हैं।

​बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

जीएलए यूनिवर्सिटी का कैंपस लगभग 110 एकड़ से अधिक के विशाल और हरे-भरे क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका स्थापत्य आधुनिक वास्तुकला और ब्रज की शांतिप्रिय संस्कृति का एक बेजोड़ उदाहरण है।

  • बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :– मुख्य राजमार्ग (NH-19) से विश्वविद्यालय का भव्य प्रवेश द्वार और विशाल इमारतें दूर से ही दिखाई देती हैं। कैंपस की इमारतें आधुनिक नागर/औद्योगिक स्थापत्य शैली में निर्मित हैं, जिनमें कांच, स्टील और पक्के पत्थरों का नक्काशीदार मिश्रण दिखता है। कैंपस के चारों ओर विशाल खेल के मैदान, सुंदर लॉन और घने वृक्ष हैं जो इसे एक शांत और अध्ययन-अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।
  • आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :– विश्वविद्यालय के भीतर पृथक-पृथक अकादमिक ब्लॉक (Academic Blocks) बने हुए हैं। इसमें अत्याधुनिक वातानुकूलित सेंट्रल लाइब्रेरी (Central Library), हाई-टेक कंप्यूटर लैब्स, स्मार्ट क्लासरूम, भव्य ऑडिटोरियम (Auditorium), रिसर्च सेंटर और मल्टी-पर्पज हॉल मौजूद हैं। इसके अलावा कैंपस के अंदर छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल, कैफेटेरिया और खेल परिसर निर्मित हैं।

​आसपास के आकर्षक बिंदु (Nearby Attractions)

  1. चौमुहाँ ऐतिहासिक कस्बा :– जीएलए यूनिवर्सिटी के समीप स्थित यह कस्बा पौराणिक रूप से ब्रह्मा जी के मोह-भंग (ब्रह्म-मोहन लीला) के इतिहास से जुड़ा हुआ है।
  2. वृंदावन धाम :– जीएलए कैंपस से लगभग 15-18 किमी की दूरी पर स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर।
  3. श्री कृष्ण जन्मभूमि, मथुरा :– मुख्य मथुरा शहर में स्थित भगवान कृष्ण का ऐतिहासिक जन्मस्थान।
  4. कोकिलावन (शनिदेव मंदिर) :– जीएलए से कोसीकलां मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध कोकिलावन धाम।

​यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

  • प्रवेश व भ्रमण (Entry & Permission) :– जीएलए यूनिवर्सिटी का बाहरी परिसर व मुख्य द्वार देखने योग्य है। कैंपस के अंदर प्रवेश के लिए सुरक्षा द्वार पर पंजीकृत विजिटर पास (Visitor Pass) या छात्र/कर्मचारी पहचान पत्र आवश्यक होता है। शैक्षणिक या एडमिशन से जुड़े कार्यों के लिए मुख्य द्वार से प्रवेश आसानी से मिल जाता है।
  • समय (Timings) :
    • अकादमिक व प्रशासनिक कार्यालय का समय:- प्रातः 09:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक (सोमवार से शनिवार)।
    • विश्वविद्यालय परिसर भ्रमण:- दिन के समय भ्रमण हेतु सुगम
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :
    • सड़क मार्ग द्वारा :– जीएलए यूनिवर्सिटी दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) पर मथुरा और कोसीकलां के बीच (चौमुहाँ के पास) स्थित है। मथुरा बस स्टैंड (लगभग 20-22 किमी) और कोसीकलां से ऑटो-रिक्शा, बसें और निजी टैक्सियाँ चौबीसों घंटे उपलब्ध हैं।
    • रेल मार्ग द्वारा :– निकटतम रेलवे स्टेशन छटीकरा / चौमुहाँ फ्लैग स्टेशन तथा प्रमुख जंक्शन मथुरा जंक्शन (Mathura Junction – MTJ) एवं कोसीकलां रेलवे स्टेशन हैं। मथुरा जंक्शन से विश्वविद्यालय के लिए सीधी बसें और ऑटो मिलते हैं।
    • हवाई मार्ग द्वारा :– निकटतम हवाई अड्डा पंडित दीनदयाल उपाध्याय हवाई अड्डा, आगरा (लगभग 70 किमी) और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली (लगभग 140 किमी) है।

​फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots)

  1. भव्य मुख्य प्रवेश द्वार (Main Gate) :– राष्ट्रीय राजमार्ग से दिखता विशाल नक्काशीदार द्वार और विश्वविद्यालय का मुख्य साइनबोर्ड।
  2. सेंट्रल लॉन व लाइब्रेरी ब्लॉक :– हरे-भरे मैदानों के बीच आधुनिक अकादमिक इमारतों का आर्किटेक्चरल फ्रेम।
  3. कैंपस एम्फीथिएटर व ऑडिटोरियम :– शाम के समय कैंपस की रोशनी और आधुनिक संरचनाओं की फोटोग्राफी।

​स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार (Local Flavors & Famous Markets)

  • स्थानीय स्वाद :– जीएलए कैंपस के आसपास और नजदीकी चौमुहाँ/मथुरा क्षेत्र में स्वादिष्ट ब्रज व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकता है। यहाँ के पेड़े, कचौड़ी-जलेबी, बेड़मी पूड़ी व आलू की सब्जी, समोसे, चाट और मलाईदार कुल्हड़ लस्सी छात्रों और आगंतुकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार :– यूनिवर्सिटी के समीप स्थित ‘चौमुहाँ बाज़ार’ दैनिक आवश्यकताओं के लिए प्रसिद्ध है, जबकि मथुरा का ‘होली गेट बाज़ार’ और वृंदावन का ‘छटीकरा बाज़ार’ खरीदारी व हस्तशिल्प के लिए बेहतरीन स्थान हैं।

रोचक तथ्य (Interesting Facts)

  1. NAAC ‘A+’ ग्रेड प्राप्त :– जीएलए यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश के उन अग्रणी निजी विश्वविद्यालयों में से एक है जिसे NAAC द्वारा उच्चतम ‘A+’ ग्रेडिंग प्रदान की गई है।
  2. श्री गणेशी लाल अग्रवाल की स्मृति :– इस विशाल शिक्षण संस्थान की स्थापना श्री नारायण दास अग्रवाल ने अपने पिता स्व. गणेशी लाल अग्रवाल के सम्मान और शिक्षा प्रसार के उद्देश्य से की थी।
  3. ब्रह्म-मोहन लीला स्थली के समीप :– यह विश्वविद्यालय चौमुहाँ के पास स्थित है, जिसे पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा द्वारा बाल-कृष्ण की परीक्षा लेने (ब्रह्म मोहन लीला) का स्थान माना जाता है।
  4. हरित और इको-फ्रेंडली कैंपस :– जीएलए कैंपस में सौर ऊर्जा (Solar Power Plants), वाटर हार्वेस्टिंग और विशाल वृक्षारोपण के माध्यम से इसे पर्यावरण-अनुकूल बनाया गया है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- जीएलए यूनिवर्सिटी की स्थापना कब और किसके द्वारा की गई थी?

उत्तर:– जीएलए की शुरुआत 1998 में एक इंस्टीट्यूट के रूप में हुई थी, जिसे 2010 में यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। इसकी स्थापना श्री नारायण दास अग्रवाल द्वारा अपने पिता स्व. श्री गणेशी लाल अग्रवाल की स्मृति में की गई थी।

प्रश्न 2:- जीएलए यूनिवर्सिटी मथुरा शहर से कितनी दूरी पर स्थित है?

उत्तर:– जीएलए यूनिवर्सिटी मथुरा शहर के मुख्य केंद्र से दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) पर उत्तर दिशा में लगभग 20 से 22 किलोमीटर की दूरी पर चौमुहाँ के पास स्थित है।

प्रश्न 3: क्या आम लोग जीएलए यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर घूम सकते हैं?

उत्तर:– कैंपस के भीतर सुरक्षा कारणों से केवल छात्रों, कर्मचारियों या एडमिशन व आधिकारिक कार्य से आने वाले व्यक्तियों को ही सुरक्षा पास के साथ प्रवेश दिया जाता है।

​लेखक के विचार (Author’s Thoughts)

​”मथुरा-वृंदावन की पहचान केवल प्राचीन मंदिरों और भक्ति रस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र अब आधुनिक शिक्षा और ज्ञान का भी एक बड़ा केंद्र बन चुका है। जीएलए यूनिवर्सिटी इस बात का एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे ब्रज की सांस्कृतिक और पौराणिक पृष्ठभूमि में एक आधुनिक शिक्षण संस्थान युवाओं के भविष्य को संवार रहा है। यदि आप ब्रज अंचल की इस आधुनिक शैक्षणिक प्रगति को देखना चाहते हैं, तो जीएलए कैंपस का अवलोकन एक अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव प्रदान करता है।”

“जीएलए यूनिवर्सिटी ब्रज की पावन धरा पर प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक उच्च शिक्षा का एक उत्कृष्ट और जगमगाता केंद्र है।”

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