वाराणसी (काशी) के प्रसिद्ध बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)

वाराणसी (काशी) के प्रसिद्ध बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

वाराणसी (काशी) के प्रसिद्ध बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर में स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर, जिसे आमतौर पर ‘नया विश्वनाथ मंदिर’ या ‘बीएचयू वीटी (BHU VT)’ कहा जाता है, भारत का एक अत्यंत भव्य और पवित्र आध्यात्मिक केंद्र है। इस भव्य मंदिर की नींव बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दूरदर्शी संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रेरणा से रखी गई थी। मालवीय जी का उद्देश्य एक ऐसा मंदिर बनाना था जहाँ बिना किसी जाति, धर्म या संप्रदाय के भेदभाव के सभी मनुष्य ईश्वर की आराधना कर सकें।

इस मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध उद्योगपति परिवार बिड़ला परिवार (विशेष रूप से जुगल किशोर बिड़ला) द्वारा कराया गया था, जिसके कारण इसे ‘बिड़ला मंदिर‘ भी कहा जाता है। मंदिर का निर्माण कार्य 1931 में शुरू हुआ था और यह मार्च 1966 में बनकर पूरी तरह तैयार हुआ। लगभग 35 वर्षों के निरंतर श्रम और उत्कृष्ट नक्काशी के बाद निर्मित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह आधुनिक भारत की एकता, शिक्षा और संस्कृति का एक अद्वितीय प्रतीक है।

​बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

बीएचयू का नया विश्वनाथ मंदिर अपनी वास्तुकला (Architecture) और विशालता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।

  • दुनिया का सबसे ऊँचा मंदिर शिखर :– इस मंदिर का मुख्य शिखर लगभग 252 फीट (77 मीटर) ऊँचा है, जो इसे दुनिया के सबसे ऊँचे मंदिर शिखरों में शामिल करता है। (यह मूल काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से भी ऊँचा है)।
  • सफेद संगमरमर का प्रयोग :– पूरा मंदिर बेहतरीन गुणवत्ता वाले सफेद संगमरमर (White Marble) से बना है। इसकी दीवारों पर जटिल नक्काशी और बारीक कारीगरी देखने को मिलती है।
  • बहु-स्तरीय आंतरिक संरचना (Three-tiered Structure) :– मंदिर परिसर मुख्य रूप से तीन मंजिलों में विभाजित है। भूतल (Ground Floor) पर मुख्य शिव लिंग स्थापित है, जबकि ऊपरी मंजिलों पर माँ दुर्गा, भगवान लक्ष्मी-नारायण, भगवान श्रीराम-सीता, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश के भव्य मंदिर स्थित हैं।
  • दीवारों पर पवित्र ग्रंथों के श्लोक :– मंदिर की अंदरूनी दीवारों पर भगवद्गीता, उपनिषद, वेद और रामचरितमानस की चौपाइयाँ व श्लोक संगमरमर पर उकेरे गए हैं, जो आगंतुकों को आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक अनुभव प्रदान करते हैं।
  • विशाल प्रांगण और हरित वाटिका :– मंदिर के चारों ओर फैला हरा-भरा विशाल प्रांगण, सुंदर बगीचे और बैठने की व्यवस्था इसे एक अत्यंत शांत और मनमोहक वातावरण प्रदान करती है।

​यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

  • टैक्सी / टिकट (Ticket & Entry Fee) :– मंदिर में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क (Free) है।
  • समय (Timings) :– मंदिर प्रतिदिन सुबह 4:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। (दैनिक आरती का समय: प्रातः आरती 4:30 AM, संध्या आरती 7:00 PM)।
  • बाहरी और आंतरिक बनावट :– 252 फीट ऊँचा संगमरमर का शिखर, गीता के श्लोकों से सजी अंदरूनी दीवारें और खूबसूरत लॉन।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– मंदिर का भव्य बाहरी प्रांगण, मुख्य प्रवेश द्वार, खूबसूरत लॉन और शाम के समय लाइटों से जगमगाता मंदिर परिसर। (मुख्य गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी वर्जित है)।
  • स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार :– बीएचयू वीटी परिसर अपने प्रसिद्ध ‘वीटी कोल्ड कॉफी’, साउथ इंडियन डोसा, समोसे, लस्सी और चाट के लिए पूरे वाराणसी में विख्यात है। यहाँ छात्रों और पर्यटकों के लिए किताबों और हस्तशिल्प की दुकानें भी हैं।
  • पहुँचने का मार्ग :
    • रेलवे स्टेशन :– वाराणसी जंक्शन (कैंट स्टेशन) से मंदिर की दूरी लगभग 9 किमी और बनारस (मंडुआडीह) रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी है।
    • हवाई अड्डा :– लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (बाबतपुर) से दूरी लगभग 30-35 किमी है।
    • लोकल ट्रांसपोर्ट :– शहर के किसी भी हिस्से (गोदौलिया, लंका, कैंट) से ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा या टैक्सी द्वारा बीएचयू के मुख्य द्वार (लंका) पहुँचकर सीधे मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।

​आसपास के आकर्षण (Nearby Attractions)

  • भारत कला भवन (BHU Museum) :– बीएचयू परिसर के अंदर ही स्थित भारत का प्रसिद्ध संग्रहालय जहाँ दुर्लभ मूर्तियाँ, चित्रकारी और ऐतिहासिक पांडुलिपियाँ मौजूद हैं।
  • संकट मोचन हनुमान मंदिर :– बीएचयू परिसर से मात्र 2 किमी की दूरी पर स्थित प्रसिद्ध और ऐतिहासिक हनुमान मंदिर।
  • अस्सी घाट (Assi Ghat) :– वाराणसी का प्रसिद्ध घाट जो बीएचयू (लंका) से मात्र 2.5 किमी दूर है, जहाँ की सुबह की ‘सुबह-ए-बनारस’ और आरती विश्व प्रसिद्ध है।
  • दुर्गा कुंड मंदिर :– बीएचयू के समीप स्थित एक ऐतिहासिक लाल पत्थरों से बना मंदिर।

​रोचक तथ्य (Interesting Facts)

  1. सबके लिए खुले द्वार :– पंडित मदन मोहन मालवीय जी की इच्छा के अनुसार, यह मंदिर बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के सभी मनुष्यों और विदेशी पर्यटकों के लिए 24 घंटे समान रूप से खुला रहता है।
  2. सबसे ऊँचा शिखर :– 252 फीट की ऊँचाई के साथ इसका शिखर भारत के सबसे ऊँचे मंदिर शिखरों में गिना जाता है।
  3. कॉलेज लाइफ का मुख्य केंद्र :– यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि बीएचयू के हज़ारों छात्रों के लिए शाम को बैठने, पढ़ाई करने और प्रसिद्ध कोल्ड कॉफी का आनंद लेने का मुख्य केंद्र है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- बीएचयू विश्वनाथ मंदिर (New Vishwanath Temple) का निर्माण किसने करवाया था?

उत्तर:- इस मंदिर की नींव पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रेरणा से रखी गई थी और इसका निर्माण बिड़ला परिवार द्वारा कराया गया था।

प्रश्न 2:- बीएचयू स्थित नए विश्वनाथ मंदिर के शिखर की ऊँचाई कितनी है?

उत्तर:- इस मंदिर के मुख्य शिखर की ऊँचाई लगभग 252 फीट (77 मीटर) है।

प्रश्न 3:- क्या बीएचयू वीटी मंदिर में जाने के लिए कोई टिकट लगता है?

उत्तर:- नहीं, मंदिर में दर्शन और प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क है।

“बीएचयू का नया विश्वनाथ मंदिर ज्ञान और आध्यात्मिकता का वह पवित्र संगम है, जहाँ संगमरमर की भव्यता और बनारस का शांत सुकून एक साथ महसूस होता है।”

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