लोहागढ़ किला ( भरतपुर )

लोहागढ़ किला :- मिट्टी की दीवार जिसने अंग्रेजों को भी झुका दिया

विस्तृत जानकारी (Detailed History) :-

भरतपुर में स्थित लोहागढ़ किले का निर्माण 1733 ईस्वी में जाट शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था। इस किले का नाम ‘लोहागढ़‘ इसलिए पड़ा क्योंकि इसे कभी कोई जीत नहीं सका। इस किले की सबसे बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि 1805 में ब्रिटिश जनरल लॉर्ड लेक ने अपनी विशाल सेना और आधुनिक तोपों के साथ इसे जीतने के लिए पाँच बार आक्रमण किया, लेकिन वह हर बार असफल रहा। यह किला जाटों के शौर्य, स्वाभिमान और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

बाहरी बनावट :

  • ​इस किले की बनावट दुनिया के अन्य किलों से बिल्कुल अलग है। इसके चारों ओर मिट्टी की एक बहुत ही मोटी और ऊँची दीवार बनाई गई थी।
  • ​जब दुश्मन की तोप के गोले इस मिट्टी की दीवार पर गिरते थे, तो वे मिट्टी में धंस जाते थे और उनका प्रभाव खत्म हो जाता था।
  • ​किले के चारों ओर एक गहरी और चौड़ी खाई है, जिसमें मोती झील का पानी भरा रहता था। इसमें मगरमच्छ छोड़े जाते थे ताकि कोई तैरकर अंदर न आ सके।

आंतरिक बनावट :

  • लोहिया पोल :– यह किले का मुख्य द्वार है, जो अष्टधातु से बना है। माना जाता है कि इसे महाराजा जवाहर सिंह दिल्ली के लाल किले से जीत कर लाए थे।
  • जवाहर बुर्ज :– यह महाराजा जवाहर सिंह की दिल्ली पर विजय की याद में बनवाया गया था, जहाँ भरतपुर के राजाओं का राज्याभिषेक होता था।
  • फतेह बुर्ज :– यह अंग्रेजों पर विजय के प्रतीक के रूप में बनवाया गया था।
  • महल परिसर :– यहाँ ‘किशोरी महल‘, ‘महल खास‘ और ‘कोठी खास‘ स्थित हैं, जो जाट वास्तुकला के सुंदर उदाहरण हैं।

आस-पास के प्रमुख आकर्षण (Nearby Attractions) :-

  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo National Park) :– यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, जो किले से मात्र 5 किमी दूर है और हजारों प्रजातियों के पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है।
  • डीग के महल (Deeg Palace) :– भरतपुर से 32 किमी दूर स्थित ये महल अपने सुंदर बगीचों और फव्वारों के लिए जाने जाते हैं।
  • गंगा मंदिर :– सफेद संगमरमर और बलुआ पत्थर से बना यह मंदिर वास्तुकला का अद्भुत मेल है।
  • बांके बिहारी मंदिर :– किले के भीतर स्थित एक बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध मंदिर।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

  • टिकट (Tickets) :– किले में प्रवेश निशुल्क है, लेकिन राजकीय संग्रहालय (Museum) के लिए भारतीयों को ₹20 और विदेशियों को ₹100 देने होते हैं।
  • समय (Visiting Time) :– सुबह 9:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक।
  • पहुँचने का मार्ग :
    • हवाई मार्ग :– निकटतम हवाई अड्डा आगरा (55 किमी) और दिल्ली (180 किमी) है।
    • रेल मार्ग :– भरतपुर रेलवे स्टेशन दिल्ली-मुंबई मुख्य लाइन पर स्थित है और सभी बड़े शहरों से जुड़ा है।
    • सड़क मार्ग :– आगरा (56 किमी), मथुरा (39 किमी) और जयपुर (180 किमी) से सीधी बसें उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– जवाहर बुर्ज, किले की विशाल खाई और राजकीय संग्रहालय के अंदर रखे प्राचीन हथियार।
  • स्थानीय स्वाद :– यहाँ की ‘मिश्री मावा‘ और गरमा-गरम ‘कचौड़ी‘ बहुत प्रसिद्ध है।
  • प्रसिद्ध बाज़ार :– लक्ष्मण मंदिर बाज़ार, जहाँ से आप हस्तशिल्प और राजस्थानी कपड़े खरीद सकते हैं।

Interesting Facts ( रोचक तथ्य )

  1. यह भारत का एकमात्र ऐसा किला है जिसकी दीवारें मिट्टी की बनी होने के बावजूद इसे ‘अजेय‘ बना पाईं।
  2. ​अंग्रेजों ने इस किले पर लगातार बमबारी की थी, लेकिन मिट्टी की दीवार ने सारे गोलों को सोख लिया और किले को खरोंच तक नहीं आई।
  3. ​अष्टधातु का दरवाजा जो यहाँ लगा है, वह मूल रूप से चित्तौड़गढ़ का था जिसे अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली ले गया था, और बाद में जाट राजा इसे वापस राजस्थान ले आए।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- लोहागढ़ किले को ‘मिट्टी का किला’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर:- क्योंकि इसकी मुख्य सुरक्षा प्राचीर मिट्टी की एक मोटी परत से ढकी हुई है, जो तोप के गोलों को बेकार कर देती थी।

प्रश्न 2:- इस किले का निर्माण किसने करवाया था?

उत्तर:- इसका निर्माण जाट महाराजा सूरजमल ने 1733 में करवाया था।

प्रश्न 3:- लोहागढ़ किले की सुरक्षा के लिए क्या विशेष इंतजाम थे?

उत्तर:- किले के चारों ओर 250 फीट चौड़ी और 60 फीट गहरी खाई थी, जिसमें पानी भरा रहता था।

“लोहागढ़ वह मिट्टी का किला है जिसने लोहे की तोपों को भी मात दे दी।”

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