
जूनागढ़ किला :- बीकानेर की वास्तुकला का बेजोड़ रत्न
विस्तृत जानकारी (Detailed History)
बीकानेर का जूनागढ़ किला राजस्थान के उन गिने-चुने किलों में से एक है जो किसी ऊँची पहाड़ी पर नहीं, बल्कि समतल ज़मीन पर बना है। इसका निर्माण 1589 ईस्वी में बीकानेर के शासक राजा राय सिंह ने करवाया था। राजा राय सिंह मुगल सम्राट अकबर और जहांगीर की सेना में एक उच्च पदस्थ सेनापति थे।
शुरुआत में इसे ‘चिंतामणि‘ कहा जाता था, लेकिन 20वीं शताब्दी की शुरुआत में जब शाही परिवार ‘लालगढ़ महल‘ में स्थानांतरित हो गया, तो इसका नाम बदलकर ‘जूनागढ़‘ (पुराना किला) रख दिया गया। इतिहास गवाह है कि कई आक्रमणों के बावजूद इस किले को कभी कोई बाहरी शासक पूरी तरह जीत नहीं सका, सिवाय कामरान मिर्जा के एक दिन के संक्षिप्त कब्जे के।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture) और प्रमुख आकर्षण :-
यह किला मुगल, राजपूत और बाद में गुजराती व यूरोपीय स्थापत्य शैली का एक अद्भुत मिश्रण है।
- अनूप महल :– यह किले का सबसे भव्य हिस्सा है। इसकी दीवारों पर सोने की परत चढ़ी हुई है और कांच व शीशे का बारीक काम (Meenakari) किया गया है। यहाँ राजाओं का राज्याभिषेक होता था।
- बादल महल :– इसकी दीवारों पर नीले रंग के बादलों और बिजली कड़कने के दृश्य चित्रित हैं, जो रेगिस्तान में बारिश की कल्पना को साकार करते हैं।
- फूल महल :– यह किले का सबसे पुराना हिस्सा है, जो गुलाब के फूलों की नक्काशी और कांच के काम से सजा है।
- चंद्र महल :– यहाँ के शाही शयनकक्षों में बेशकीमती कलाकृतियाँ और नक्काशीदार संगमरमर के झरोखे देखने को मिलते हैं।
- संग्रहालय (Museum) :– यहाँ मध्यकालीन युद्ध के हथियार, शाही पोशाकें और यहाँ तक कि प्रथम विश्व युद्ध का एक पुराना ‘बायप्लेन‘ विमान भी सुरक्षित रखा गया है।
आस-पास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions) :-
- लाल गढ़ पैलेस :– यह लाल बलुआ पत्थर से बना एक आधुनिक महल है जो अपनी नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
- करणी माता मंदिर (देशनोक) :– यहाँ से 30 किमी दूर स्थित यह विश्व प्रसिद्ध ‘चूहों वाला मंदिर‘ है।
- राष्ट्रीय ऊँट अनुसंधान केंद्र (Camel Research Centre) :– एशिया का सबसे बड़ा ऊँट फार्म, जहाँ आप ऊँट के दूध की आइसक्रीम का आनंद ले सकते हैं।
- भांडाशाह जैन मंदिर :– अपनी सुंदर चित्रकारी और घी से बनी नींव के लिए प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-
- टिकट (Entry Fee) :–
- भारतीय पर्यटक:- ₹50
- भारतीय छात्र:- ₹30
- विदेशी पर्यटक:- ₹300
- (कैमरा शुल्क अलग से ₹100 लिया जाता है।)
- समय (Visiting Time) :– सुबह 10:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक (प्रतिदिन)।
- पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :–
- रेल मार्ग :– बीकानेर जंक्शन दिल्ली, जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों से रेल द्वारा सीधे जुड़ा है।
- सड़क मार्ग :– बीकानेर सड़क मार्ग से बहुत अच्छी तरह जुड़ा है। दिल्ली (450 किमी) या जयपुर (330 किमी) से लग्जरी बसें उपलब्ध हैं।
- हवाई मार्ग :– बीकानेर का अपना घरेलू हवाई अड्डा है, जहाँ से दिल्ली और जयपुर के लिए उड़ानें मिलती हैं।
- फोटोग्राफी स्पॉट्स :– अनूप महल की सुनहरी दीवारें, किले का मुख्य द्वार (सूरज पोल) और बादल महल की चित्रकारी।
- स्थानीय स्वाद :– यहाँ का ‘बीकानेरी भुजिया‘, ‘रसगुल्ला‘ और ‘पापड़‘ पूरी दुनिया में मशहूर है।
- प्रसिद्ध बाज़ार :– कोटे गेट के अंदर का बाज़ार, जहाँ से आप ऊँट की खाल से बनी हस्तशिल्प और मोजरियां खरीद सकते हैं।
Interesting Facts (रोचक तथ्य) :-
- जूनागढ़ किला उन दुर्लभ दुर्गों में से है जहाँ खाई (Moat) बनी हुई है, जिसे सुरक्षा के लिए पानी से भरा जाता था।
- अनूप महल में इतना सोना इस्तेमाल किया गया है कि इसकी चमक आज भी वैसी ही बनी हुई है।
- इस किले के अंदर एक लिफ्ट भी लगी हुई है, जो बहुत पहले के समय में शाही परिवार की सुविधा के लिए लगाई गई थी।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
- प्रश्न 1:- जूनागढ़ किले का पुराना नाम क्या था? उत्तर:- इसे पहले ‘चिंतामणि दुर्ग‘ के नाम से जाना जाता था।
- प्रश्न 2:- बीकानेर का यह किला पहाड़ी पर क्यों नहीं बना है?
- उत्तर:- इसे सुरक्षा के साथ-साथ एक सुव्यवस्थित निवास के रूप में समतल मैदान पर ‘धान्वन दुर्ग’ श्रेणी में बनाया गया था।
- प्रश्न 3:- किले के किस महल में सोने का सबसे ज्यादा काम हुआ है?
- उत्तर:- अनूप महल में सोने की नक्काशी और वर्क का सबसे ज्यादा काम किया गया है।
“रेगिस्तान के बीच खड़ा स्थापत्य कला का सुनहरा खजाना – बीकानेर का जूनागढ़ किला।”
