सिवाणा किला ( बाड़मेर )

मारवाड़ के राजाओं की संकटकालीन राजधानी

सिवाणा किला :- मारवाड़ के राजाओं की संकटकालीन राजधानी

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

बाड़मेर जिले की सिवाणा तहसील में स्थित इस किले का निर्माण 10वीं शताब्दी (954 ई.) में परमार वंश के राजा वीर नारायण ने करवाया था। इतिहास में इस किले का अत्यधिक महत्व रहा है क्योंकि जब भी जोधपुर (मारवाड़) के राजाओं पर संकट आता था, वे इसी अभेद्य दुर्ग में शरण लेते थे। राव मालदेव और चंद्रसेन जैसे महान शासकों ने यहाँ रहकर अपनी स्वतंत्रता की रक्षा की। यह किला अलाउद्दीन खिलजी के विरुद्ध सातलदेव चौहान के भीषण युद्ध और उनके वीर बलिदान (जौहर) के लिए भी जाना जाता है।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

  • बाहरी बनावट (Exterior) :– यह किला ‘हल्देश्वर‘ पहाड़ी की ऊँची चोटी पर बना है। इसके चारों ओर कुमट के झाड़ अधिक होने के कारण इसे ‘कुमठाणा का किला‘ भी कहा जाता था। इसकी दीवारें प्राकृतिक चट्टानों के साथ मिलकर इसे शत्रु के लिए दुर्गम बनाती हैं।
  • आंतरिक बनावट (Interior) :– किले के भीतर कई ऐतिहासिक अवशेष मौजूद हैं:
    • भांडेला तालाब :– यह किले का मुख्य जल स्रोत था। कहा जाता है कि खिलजी ने इस तालाब में गाय का रक्त मिलवा दिया था, जिसके कारण राजपूतों को अंतिम युद्ध (शाका) करना पड़ा।
    • कल्ला जी की छतरी :– वीर कल्ला रायमलोत की वीरता की याद में बनी यह छतरी स्थापत्य का सुंदर नमूना है।
    • प्राचीन मंदिर :– किले के भीतर भगवान शिव और चामुंडा माता के प्राचीन मंदिर स्थित हैं।
    • हल्देश्वर महादेव :– पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह मंदिर शांत और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

  • टिकट (Ticket) :– प्रवेश पूर्णतः निशुल्क है।
  • समय (Timing) :– सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक। (दोपहर की गर्मी से बचने के लिए सुबह जल्दी जाना बेहतर है)।
  • कैसे पहुँचें (How to Reach) :
    • हवाई मार्ग :– निकटतम हवाई अड्डा जोधपुर (150 किमी) है।
    • रेल मार्ग :– जालोर या जोधपुर से बालोतरा तक ट्रेनें उपलब्ध हैं, जहाँ से सिवाणा पास है।
    • सड़क मार्ग :– जोधपुर, जालोर और बाड़मेर से सिवाणा के लिए नियमित बसें और निजी टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– हल्देश्वर पहाड़ी से नीचे का विहंगम दृश्य, प्राचीन तालाब के किनारे और किले के टूटे हुए बुर्ज।
  • स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार :– बाड़मेर की ‘अजरक प्रिंट’ की चादरें और सिवाणा के आसपास के गाँवों की ‘बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी’ का स्वाद लेना न भूलें।

अतिरिक्त आकर्षण और आकर्षक स्थल (Hidden Gems)

  • 56 की पहाड़ियाँ :– सिवाणा के पास स्थित ये पहाड़ियाँ ट्रैकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग हैं। यहाँ की आकृतियाँ बहुत ही विचित्र और सुंदर हैं।
  • नाकोड़ा जी तीर्थ :– सिवाणा से लगभग 30-35 किमी दूर प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल ‘नाकोड़ा जी‘ स्थित है, जो अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है।
  • पिपलूद :– इसे रेगिस्तान का छोटा हिल स्टेशन कहा जाता है, जहाँ बारिश के मौसम में झरनों का आनंद लिया जा सकता है।

Interesting Facts (रोचक तथ्य)

  1. सिवाणा किले को ‘मारवाड़ के राजाओं की शरणस्थली‘ कहा जाता है क्योंकि मुगलों से हारने के बाद राव चंद्रसेन सालों तक यहीं से छापामार युद्ध लड़ते रहे।
  2. ​यह किला मारवाड़ और मेवाड़ की सीमाओं के करीब होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था।
  3. ​अलाउद्दीन खिलजी ने जब इस किले को जीता था, तो इसका नाम बदलकर ‘खैराबाद’ रख दिया था।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- क्या किले के ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ हैं?

उत्तर:- हाँ, ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ और कच्चा रास्ता बना हुआ है, लेकिन चढ़ाई काफी ऊँची है, इसलिए शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है।

प्रश्न 2: क्या यहाँ रुकने के लिए अच्छे होटल हैं?

उत्तर:- सिवाणा एक छोटा कस्बा है, यहाँ सामान्य धर्मशालाएं मिल जाएँगी। अच्छे होटलों के लिए जालोर या बालोतरा ठहरना बेहतर विकल्प है।

“सिवाणा की चट्टानें आज भी मारवाड़ के उस स्वाभिमान की गवाह हैं, जो कभी झुका नहीं।”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *