शेरगढ़ किला ( बारां )

परवन नदी के तट पर बसा जल और गिरि दुर्ग का संगम

शेरगढ़ किला :- परवन नदी के तट पर बसा जल और गिरि दुर्ग का संगम

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

बारां जिले में परवन नदी के किनारे स्थित शेरगढ़ किला राजस्थान के प्राचीनतम किलों में से एक है। मूल रूप से इसे ‘कोशवर्धन‘ दुर्ग कहा जाता था। 16वीं शताब्दी में जब अफगान शासक शेरशाह सूरी ने मालवा अभियान के दौरान इस पर अधिकार किया, तो उसने इसका पुनर्निर्माण करवाया और इसका नाम बदलकर ‘शेरगढ़‘ रख दिया। यह किला सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि यह मालवा और राजपूताना के बीच के मार्ग पर स्थित था। यहाँ के शिलालेखों से पता चलता है कि यहाँ कभी नागवंशी राजाओं और बाद में परमारों का शासन रहा था।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

  • बाहरी बनावट (Exterior) :– यह किला ‘जल दुर्ग‘ और ‘गिरि दुर्ग‘ दोनों की श्रेणियों में आता है। इसकी विशाल दीवारें परवन नदी के किनारे एक ऊँची पहाड़ी पर बनी हैं। किले के चारों ओर दोहरी रक्षा प्राचीर है। मुख्य प्रवेश द्वार अत्यंत विशाल और कलात्मक है, जिस पर हाथियों की आकृतियाँ बनी हुई हैं।
  • आंतरिक बनावट (Interior) :– किले के भीतर कई ऐतिहासिक और धार्मिक संरचनाएं हैं।
    • अमीर खां की हवेली :– पिंडारी अमीर खां द्वारा बनवाई गई यह हवेली अपनी स्थापत्य शैली के लिए जानी जाती है।
    • प्राचीन मंदिर :– किले के अंदर लक्ष्मी नारायण मंदिर और सोमनाथ महादेव का मंदिर प्रमुख हैं। मंदिरों की दीवारों पर बारीक नक्काशी और मूर्तियाँ मौजूद हैं।
    • जैन मंदिर :– यहाँ 8वीं शताब्दी के प्राचीन जैन मंदिर के अवशेष मिलते हैं, जो इस स्थान की प्राचीनता दर्शाते हैं।
    • शस्त्रागार और बारादरी :– राजाओं के बैठने का स्थान और हथियारों को रखने के लिए बने तहखाने आज भी मौजूद हैं।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

  • टिकट (Ticket) :– प्रवेश पूर्णतः निशुल्क है।
  • समय (Timing) :– सुबह 9:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक।
  • कैसे पहुँचें (How to Reach) :
    • हवाई मार्ग :– निकटतम हवाई अड्डा कोटा (110 किमी) या जयपुर (350 किमी) है।
    • रेल मार्ग :– बारां रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है, जो कोटा और बीना लाइन से जुड़ा है।
    • सड़क मार्ग :– बारां शहर से यह किला लगभग 65 किमी की दूरी पर है। निजी टैक्सी या बस द्वारा अटरू होते हुए यहाँ पहुँचा जा सकता है।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– परवन नदी के ऊपर से किले का प्रतिबिंब, मुख्य द्वार की नक्काशी और किले की बुर्ज से नदी का घुमावदार नज़ारा।
  • स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार :– बारां अपनी ‘धनुष लीला‘ और मेले के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के स्थानीय बाज़ारों से आप ‘बदाणा’ (एक प्रकार की मिठाई) और कोटा डोरिया की साड़ियाँ ले सकते हैं।

अतिरिक्त आकर्षण और आकर्षक स्थल (Hidden Gems)

  • परवन नदी का किनारा :– मानसून के दौरान नदी का बहाव और किले की हरियाली इसे किसी हिल स्टेशन जैसा बना देती है।
  • अटरू के मंदिर :– शेरगढ़ के पास ही अटरू में ‘गढ़गच‘ के देवालय स्थित हैं, जो अपनी बेजोड़ मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • सांपों की शरणस्थली :– स्थानीय लोग इसे सांपों का संरक्षण केंद्र भी मानते हैं, यहाँ की जैव विविधता बहुत समृद्ध है।

Interesting Facts (रोचक तथ्य)

  1. शेरगढ़ किले का प्राचीन नाम ‘कोशवर्धन‘ इसलिए था क्योंकि इसे धन-धान्य और कोष की रक्षा करने वाला दुर्ग माना जाता था।
  2. ​शेरशाह सूरी ने यहाँ एक मस्जिद और सराय का निर्माण भी करवाया था ताकि दिल्ली से मालवा जाने वाले यात्रियों को सुविधा हो।
  3. ​इस किले के पास से गुजरने वाली परवन नदी इसे तीन तरफ से घेरती है, जिससे इसे जीतना प्राचीन काल में बहुत कठिन था।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- क्या शेरगढ़ किला घूमने के लिए सुरक्षित है?

उत्तर:- हाँ, यह एक शांत स्थान है, लेकिन यहाँ झाड़ियाँ अधिक होने के कारण दिन के उजाले में घूमना ही उचित है।

प्रश्न 2:- क्या यहाँ रुकने की व्यवस्था है?

उत्तर:- किले के पास कोई अच्छे होटल नहीं हैं, ठहरने के लिए बारां शहर या कोटा सबसे अच्छे विकल्प हैं।

“परवन की लहरों से घिरा शेरगढ़, आज भी शेरशाह सूरी की गर्जना और कोशवर्धन की प्राचीनता को समेटे खड़ा है।”

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