बाला किला ( अलवर )

बाला किला :- अरावली की ऊँचाइयों पर अलवर का प्रहरी

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

अलवर शहर के ठीक ऊपर अरावली की पहाड़ियों पर स्थित इस किले का निर्माण 15वीं शताब्दी (1492 ई.) में अलघू राय ने करवाया था। इतिहास में इसे ‘बाला किला‘ (कुँवारा किला) इसलिए कहा जाता है क्योंकि माना जाता है कि इस पर कभी कोई बड़ा युद्ध नहीं हुआ और इसे किसी दुश्मन द्वारा कभी जीता नहीं जा सका। इस किले पर खानजादा मुसलमानों, मुगलों, जाटों और अंततः महाराव राजा प्रताप सिंह (अलवर रियासत के संस्थापक) का शासन रहा। मुग़ल सम्राट बाबर ने यहाँ एक रात बिताई थी और अकबर के बेटे जहांगीर को भी यहाँ कुछ समय के लिए निर्वासित किया गया था।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

  • बाहरी बनावट (Exterior) :– यह किला उत्तर से दक्षिण तक 5 किलोमीटर और पूर्व से पश्चिम तक 1.5 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। इसमें 6 मुख्य प्रवेश द्वार हैं: चाँद पोल, सूरज पोल, लक्ष्मण पोल, अंधेरी पोल, कृष्ण पोल और जय पोल। किले की दीवारों पर बंदूकों और तोपों के लिए 446 छेद बने हुए हैं, जो इसकी सुरक्षा प्रणाली को दर्शाते हैं।
  • आंतरिक बनावट (Interior) :– किले के भीतर राजपूती और मुगल स्थापत्य का मिश्रण है।
    • निकुंभ महल :– यह किले का सबसे प्राचीन हिस्सा है जिसकी नक्काशी देखने लायक है।
    • सलीम सागर और सूरज कुण्ड :– पानी के भंडारण के लिए बने ये विशाल जलाशय आज भी अपनी इंजीनियरिंग के लिए जाने जाते हैं।
    • जहांगीर महल :– शहजादा सलीम (जहांगीर) के प्रवास के दौरान बना यह महल मुगल शैली का सुंदर नमूना है।
    • चक्रधारी हनुमान मंदिर :– किले के भीतर स्थित यह मंदिर भक्तों और पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

  • टिकट (Ticket) :– प्रवेश के लिए मामूली शुल्क (लगभग ₹20-50) और वाहन का शुल्क अलग से लिया जा सकता है।
  • समय (Timing) :– सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक।
  • कैसे पहुँचें (How to Reach) :
    • हवाई मार्ग :– निकटतम हवाई अड्डा दिल्ली (160 किमी) या जयपुर (150 किमी) है।
    • रेल मार्ग :– अलवर जंक्शन दिल्ली-जयपुर रेल मार्ग पर एक प्रमुख स्टेशन है।
    • सड़क मार्ग :– अलवर दिल्ली और जयपुर से NH-48 द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है। शहर से किले तक जाने के लिए जीप या टैक्सी किराए पर ली जा सकती है।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– किले की बुर्ज से अलवर शहर का विहंगम दृश्य, प्राचीन पोल (दरवाजे) और सलीम सागर झील।
  • स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार :– अलवर का ‘कलाकंद’ (Milk Cake) विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ के ‘बजाजा बाज़ार‘ से आप चांदी के आभूषण और पारंपरिक राजस्थानी कपड़े खरीद सकते हैं।

अतिरिक्त आकर्षण और आकर्षक स्थल (Hidden Gems)

  • सरिस्का टाइगर रिजर्व :– किले के पास ही सरिस्का का घना जंगल है, जहाँ आप बाघ और अन्य वन्यजीव देख सकते हैं।
  • मूसी महारानी की छतरी :– किले की तलहटी में स्थित यह सफेद संगमरमर की छतरी अपनी अद्भुत नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
  • सिटी पैलेस :– अलवर का राजमहल और उसका संग्रहालय प्राचीन अस्त्र-शस्त्रों के शौकीनों के लिए स्वर्ग है।

Interesting Facts (रोचक तथ्य)

  1. ​बाला किला उन चुनिंदा किलों में से है जहाँ बाबर ने दिल्ली विजय के बाद अपना खजाना सुरक्षित रखने के लिए भेजा था।
  2. ​किले के भीतर से सरिस्का के जंगल का जो नज़ारा दिखता है, वह मानसून के समय किसी जादुई दुनिया जैसा लगता है।
  3. ​इस किले की बनावट इतनी जटिल है कि घने कोहरे में भी दुश्मन आसानी से इसके मुख्य हिस्से तक नहीं पहुँच सकता था।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- क्या किले के ऊपर तक अपनी गाड़ी ले जा सकते हैं?

उत्तर:- हाँ, किले के मुख्य द्वार तक पक्की सड़क बनी हुई है, जहाँ आप कार या बाइक से जा सकते हैं।

प्रश्न 2:- क्या किले के पास जंगल में जानवर मिलते हैं?

उत्तर:- हाँ, यह सरिस्का के बफर जोन में आता है, इसलिए रास्ते में हिरण, जंगली सूअर और कभी-कभी तेंदुए भी दिख सकते हैं।

“अरावली की चोटी पर सजा अलवर का ताज, बाला किला आज भी सुनाता है मुगलों और राजपूतों के राज।”

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