संकट मोचन हनुमान मंदिर

भक्ति, शांति और आस्था का संगम

संकट मोचन हनुमान मंदिर :- भक्ति, शांति और आस्था का संगम

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

संकट मोचन हनुमान मंदिर वाराणसी के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना 16वीं शताब्दी में स्वयं महान संत कवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। कहा जाता है कि तुलसीदास जी को इसी स्थान पर हनुमान जी के दर्शन हुए थे, जिसके बाद उन्होंने यहाँ उनकी प्रतिमा स्थापित की। ‘संकट मोचन‘ का अर्थ है ‘संकटों को दूर करने वाला’। 1982 में प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित ओम्कारनाथ ठाकुर के शिष्य पंडित वीरभद्र मिश्रा ने इस मंदिर का विस्तार और प्रबंधन संभाला। हर साल यहाँ ‘संकट मोचन संगीत समारोह‘ आयोजित किया जाता है, जिसमें देश-विदेश के विख्यात कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं।

बाहरी बनावट का विवरण (Exterior Architecture) :-

​मंदिर का बाहरी परिसर अत्यंत साधारण और पारंपरिक है, जो शांति का अनुभव कराता है। मंदिर के चारों ओर ऊँची दीवारें और बड़े प्रवेश द्वार हैं। बाहर से देखने पर मंदिर बहुत ही भव्य और खुला दिखाई देता है, जहाँ चारों तरफ घने पेड़ लगे हुए हैं। मंदिर का शिखर पारंपरिक उत्तर भारतीय शैली में बना है। मुख्य द्वार पर सुरक्षा जाँच के कड़े इंतज़ाम रहते हैं और यहाँ का वातावरण अन्य भीड़भाड़ वाले मंदिरों की तुलना में काफी शांत और स्वच्छ है।

आंतरिक बनावट का विवरण (Interior Architecture) :-

मंदिर के अंदर एक बड़ा प्रांगण है। मुख्य गर्भगृह में भगवान हनुमान की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित है, जो भगवान राम की ओर देखते हुए प्रतीत होती है। यहाँ हनुमान जी को ‘सिंदूर‘ चढ़ाया जाता है। मंदिर के अंदर की दीवारों पर रामायण के प्रसंगों का वर्णन मिलता है। परिसर के भीतर छोटे-छोटे अन्य मंदिर भी हैं। मंदिर के अंदर बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं, जिन्हें हनुमान जी का स्वरूप मानकर भक्त बहुत सम्मान देते हैं।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-

  • टिकट (Ticket) :– प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क (Free) है।
  • समय (Timings) :– सुबह 5:00 AM से दोपहर 12:00 PM तक और शाम 3:00 PM से रात 11:00 PM तक।
  • पहुँचने का मार्ग :– यह मंदिर वाराणसी के दक्षिणी भाग में ‘अस्सी’ के पास स्थित है। वाराणसी कैंट स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 7-8 किमी है। आप ऑटो या ई-रिक्शा से यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– सुरक्षा कारणों से मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल और कैमरा ले जाना सख्त मना है। बाहरी गेट के पास आप कुछ तस्वीरें ले सकते हैं।
  • स्थानीय स्वाद :– यहाँ का ‘बेसन का लड्डू‘ प्रसाद के रूप में विश्व प्रसिद्ध है। मंदिर के बाहर की दुकानों पर बनारसी चाट का आनंद लिया जा सकता है।
  • प्रसिद्ध बाज़ार :– पास में ही ‘अस्सी बाज़ार‘ और ‘लंका बाज़ार‘ स्थित हैं, जहाँ से आप धार्मिक पुस्तकें और हस्तशिल्प खरीद सकते हैं।

आसपास के मुख्य आकर्षण (Nearby Attractions)

  1. अस्सी घाट :– यहाँ से मात्र 1.5 किमी की दूरी पर स्थित, जहाँ की सुबह की आरती (सुबह-ए-बनारस) प्रसिद्ध है।
  2. तुलसी मानस मंदिर :– यह वह स्थान है जहाँ रामचरितमानस की रचना हुई थी, जो संकट मोचन के बहुत करीब है।
  3. दुर्गा कुंड मंदिर :– यह एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है जो अपनी लाल बनावट के लिए जाना जाता है।
  4. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) :– मंदिर के पास ही एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय और नया विश्वनाथ मंदिर स्थित है।

Interesting Facts

  • ​इस मंदिर की प्रतिमा मिट्टी की बनी है और इसे स्वयं तुलसीदास जी ने तैयार किया था।
  • ​यहाँ के बंदर बहुत ही मिलनसार हैं और भक्तों को नुकसान नहीं पहुँचाते, बशर्ते उन्हें परेशान न किया जाए।
  • ​संकट मोचन संगीत समारोह पिछले कई दशकों से बिना रुके आयोजित किया जा रहा है, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत का बड़ा मंच है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- क्या मंदिर के अंदर मोबाइल ले जा सकते हैं?

उत्तर:- नहीं, मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही लॉकर की सुविधा उपलब्ध है जहाँ आपको अपना मोबाइल और गैजेट जमा करने होते हैं।

प्रश्न 2:- दर्शन के लिए सबसे भीड़ वाला दिन कौन सा होता है?

उत्तर:- मंगलवार और शनिवार को यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है क्योंकि ये दिन हनुमान जी को समर्पित हैं।

लेखक के विचार (Author’s Thoughts) :-

मेरे व्यक्तिगत अनुभव में, संकट मोचन मंदिर वाराणसी का सबसे शांतिपूर्ण स्थान है। यहाँ बैठकर ‘हनुमान चालीसा‘ का पाठ करना एक दिव्य ऊर्जा से भर देता है। यदि आप शहर के कोलाहल से दूर रहकर अपनी आत्मा को शांत करना चाहते हैं, तो यह मंदिर आपके लिए सबसे उपयुक्त है।

“जहाँ संकट का अंत और भक्ति की शुरुआत होती है, वही संकट मोचन धाम है।”

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