अचलगढ़ दुर्ग

अरावली की पहाड़ियों पर बसा ऐतिहासिक किला

अचलगढ़ दुर्ग :- अरावली की पहाड़ियों पर बसा ऐतिहासिक किला

​राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू की खूबसूरत वादियों में स्थित अचलगढ़ दुर्ग (Achalgarh Fort) इतिहास, स्थापत्य कला और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम है। अरावली पर्वतमाला की ऊँची पहाड़ियों पर बना यह प्राचीन किला आज भी मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास और स्थापत्य कला की गवाही देता है। यदि आप माउंट आबू की यात्रा कर रहे हैं, तो प्रकृति और इतिहास को समेटे इस दुर्ग को देखना एक बेहतरीन अनुभव है।

विस्तृत जानकारी (Detailed History) :-

अचलगढ़ दुर्ग मूल रूप से 9वीं शताब्दी में परमार राजवंश के राजाओं द्वारा बनवाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र की सीमाओं की रक्षा करना था। बाद में, वर्ष 1452 में मेवाड़ के महान और प्रतापी शासक राणा कुंभा ने इस किले का पुनर्निर्माण करवाया और इसे ‘अचलगढ़‘ नाम दिया, जिसका अर्थ होता है “वह किला जिसे हिलाया न जा सके“।

​राणा कुंभा ने मेवाड़ की रक्षा के लिए जो 32 किले बनवाए या पुनर्निर्मित किए थे, उनमें से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य चौकी थी। इस किले का धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है, क्योंकि इसके ठीक नीचे प्रसिद्ध अचलेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जहाँ भगवान शिव के अंगूठे की पूजा की जाती है।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture) :-

​अचलगढ़ दुर्ग की बनावट पारंपरिक राजपूती सैन्य वास्तुकला (Military Architecture) का एक बेहतरीन उदाहरण है। दुर्ग के मुख्य प्रवेश द्वार को ‘हनुमान पोल’ कहा जाता है, जिसके दोनों ओर हनुमान जी की मूर्तियाँ स्थापित हैं। किले के भीतर जाने पर दो और प्रमुख द्वार मिलते हैं, जिन्हें ‘चंपा पोल’ और ‘भैरव पोल’ कहा जाता है।

​किले के शीर्ष पर राणा कुंभा का महल, अनाज के गोदाम और संकट के समय पानी की आपूर्ति के लिए बनाए गए विशाल जलाशय मौजूद हैं। इस किले के भीतर 15वीं शताब्दी में बने भव्य जैन मंदिर (चौमुखा मंदिर) भी स्थित हैं, जो अपनी उत्कृष्ट संगमरमर की नक्काशी और बारीक कारीगरी के लिए जाने जाते हैं।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-

  • टिकट और समय :– अचलगढ़ दुर्ग में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क (Free) है। यहाँ घूमने का समय सुबह 5:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक रहता है। पूरी चढ़ाई और किले को देखने में लगभग 1 से 2 घंटे का समय लगता है।
  • पहुँचने का मार्ग :– यह किला मुख्य माउंट आबू शहर (नक्की झील) से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए शहर से स्थानीय टैक्सियाँ, ऑटो-रिक्शा या दुपहिया वाहन (स्कूटी) आसानी से किराए पर मिल जाते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन आबू रोड (ABR) है, जो यहाँ से लगभग 38 किलोमीटर दूर है।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– हनुमान पोल की ऐतिहासिक बनावट, किले के शीर्ष से दिखने वाली अरावली की हरी-भरी पहाड़ियाँ और किले के भीतर स्थित जैन मंदिरों की सुंदर वास्तुकला।
  • स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार :– माउंट आबू में मिलने वाली प्रसिद्ध ‘रबड़ी’ और ‘दाल-बाटी-चूरमा’ का स्वाद यहाँ आने पर जरूर लें। खरीदारी के लिए आप पास के नक्की लेक मार्केट जा सकते हैं, जहाँ से राजस्थानी हस्तशिल्प, बंधेज के कपड़े और संगमरमर की कलाकृतियाँ खरीदी जा सकती हैं।

रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-

  • ​किले के परिसर में ‘कपूर सागर’ और ‘सावन-भादो’ नाम के दो प्रसिद्ध तालाब हैं, जो प्राचीन जल संरक्षण तकनीक का अनूठा उदाहरण हैं।
  • ​दुर्ग के पास स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर में एक विशाल ‘पीतल के नंदी’ की मूर्ति है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह पाँच धातुओं (पंचधातु) के मिश्रण से बनी है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- अचलगढ़ दुर्ग राजस्थान के किस जिले में स्थित है?

उत्तर:- अचलगढ़ दुर्ग राजस्थान के सिरोही जिले के अंतर्गत माउंट आबू में स्थित है।

प्रश्न 2:- इस किले का पुनर्निर्माण किसने करवाया था?

उत्तर:- इस किले का पुनर्निर्माण 1452 ईस्वी में मेवाड़ के महाराजा राणा कुंभा ने करवाया था।

“अरावली की ऊंचाइयों पर खड़ा, इतिहास की गौरवगाथा सुनाता—यही है राजस्थान का अजेय अचलगढ़ दुर्ग।”

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