FORTS OF INDIA ( भारत के किले )

सुनेल किला ( झालावाड़ )

सुनेल किला :- मालवा और राजस्थान की सीमाओं का सजग रक्षक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) झालावाड़ जिले की सुनेल तहसील में स्थित यह किला ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। सुनेल का क्षेत्र प्राचीन काल में ‘मालवा‘ का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन भाषाई और सांस्कृतिक रूप से यह हमेशा राजस्थान के करीब रहा। […]

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पिडावा किला ( झालावाड़ )

पिडावा किला :- मालवा और हाड़ौती की सीमाओं का सजग प्रहरी ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) झालावाड़ जिले की पिडावा तहसील में स्थित यह किला ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इसका निर्माण मध्यकाल के दौरान स्थानीय राजपूत शासकों द्वारा किया गया था। पिडावा का क्षेत्र सामरिक दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह मालवा

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अकलेरा किला ( झालावाड़ )

अकलेरा किला :- मालवा की सरहदों का मजबूत प्रहरी ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) झालावाड़ जिले की अकलेरा तहसील में स्थित यह किला ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इसका निर्माण मध्यकाल के दौरान स्थानीय राजपूत शासकों द्वारा किया गया था, जिसे बाद में कोटा रियासत के हाड़ा चौहानों ने और अधिक सुदृढ़

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शेरगढ़ किला ( बारां )

शेरगढ़ किला :- परवन नदी के तट पर बसा जल और गिरि दुर्ग ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) बारां जिले के अटरू तहसील में स्थित शेरगढ़ किला राजस्थान के प्राचीनतम और सबसे महत्वपूर्ण किलों में से एक है। इस किले का प्राचीन नाम ‘कोशवर्धन’ था, जिसका उल्लेख प्राचीन शिलालेखों में मिलता है। माना जाता है कि

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भवानी मंडी किला ( झालावाड़ )

भवानी मंडी किला :- डग की पहाड़ियों का रक्षक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) झालावाड़ जिले के भवानी मंडी क्षेत्र और डग कस्बे के समीप स्थित यह किला ऐतिहासिक रूप से मालवा और राजपूताना की संधि स्थल पर स्थित है। इसका निर्माण मध्यकाल में स्थानीय डोडिया राजपूतों द्वारा करवाया गया था। यह क्षेत्र प्राचीन काल में

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मनोहर थाना किला ( झालावाड़ )

मनोहर थाना किला :- परवन और कालीखाड़ नदियों का संगम प्रहरी ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) झालावाड़ जिले की सुदूर दक्षिण-पूर्व सीमा पर स्थित मनोहर थाना किला अपनी अनूठी भौगोलिक स्थिति के लिए प्रसिद्ध है। इसका निर्माण मध्यकाल में स्थानीय राजाओं द्वारा किया गया था, लेकिन बाद में इसे कोटा रियासत के शासकों ने और अधिक

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काकनवाड़ी किला ( अलवर )

काकनवाड़ी किला :- सरिस्का के घने जंगलों में छिपा इतिहास ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित यह किला एक पठार पर बना हुआ है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में आमेर के राजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। इतिहास में यह किला एक विशेष घटना के लिए

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शेरगढ़ किला ( धौलपुर )

शेरगढ़ किला, धौलपुर :- चंबल के बीहड़ों का अजेय रक्षक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) धौलपुर जिले में चंबल नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन किला मूल रूप से ‘दौलतगढ़‘ के नाम से जाना जाता था, जिसका निर्माण 15वीं शताब्दी में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने करवाया था। बाद में, 1540 ई. में अफगान शासक

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अजबगढ़ किला ( अलवर )

अजबगढ़ किला :- अरावली की शांत वादियों में बसा शौर्य का प्रतीक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) अलवर जिले की राजगढ़ तहसील में स्थित अजबगढ़ किले का निर्माण 1635 ई. में आमेर के राजा भगवान दास के प्रपौत्र और राजा माधो सिंह के बेटे अजब सिंह ने करवाया था। यह किला भानगढ़ किले के पास ही

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बाला किला ( अलवर )

बाला किला :- अरावली की ऊँचाइयों पर अलवर का प्रहरी ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) अलवर शहर के ठीक ऊपर अरावली की पहाड़ियों पर स्थित इस किले का निर्माण 15वीं शताब्दी (1492 ई.) में अलघू राय ने करवाया था। इतिहास में इसे ‘बाला किला‘ (कुँवारा किला) इसलिए कहा जाता है क्योंकि माना जाता है कि इस

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