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शेरगढ़ किला ( धौलपुर )

शेरगढ़ किला, धौलपुर :- चंबल के बीहड़ों का अजेय रक्षक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) धौलपुर जिले में चंबल नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन किला मूल रूप से ‘दौलतगढ़‘ के नाम से जाना जाता था, जिसका निर्माण 15वीं शताब्दी में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने करवाया था। बाद में, 1540 ई. में अफगान शासक […]

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कनवास किला ( कोटा )

कनवास किला :- उजयार और चंबल की धाराओं का रक्षक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) कोटा जिले की कनवास तहसील में स्थित यह किला हाड़ौती क्षेत्र के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक रहा है। इसका इतिहास मुख्य रूप से हाड़ा चौहान शासकों के शौर्य से जुड़ा है। कनवास का किला सामरिक दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण

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प्रतापगढ़ किला

प्रतापगढ़ किला :- देवलिया की विरासत और अरावली का प्रहरी ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) राजस्थान के सबसे नए जिलों में से एक प्रतापगढ़ का ऐतिहासिक आधार इसका विशाल किला है। इस किले और शहर की स्थापना 1699 ई. में महाराणा प्रताप सिंह ने की थी। इससे पहले इस रियासत की राजधानी ‘देवलिया‘ हुआ करती थी।

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मनोहर थाना किला ( झालावाड़ )

मनोहर थाना किला :- परवन और कालीखाड़ नदियों का संगम रक्षक ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) झालावाड़ जिले के सुदूर दक्षिण में स्थित मनोहर थाना किला ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। यह किला परवन और कालीखाड़ नदियों के पवित्र संगम पर बना हुआ है। प्राचीन काल में इसे ‘मनोहरगढ़‘ के नाम से

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अक्लेरा किला ( झालावाड़ )

अक्लेरा किला :- हाड़ौती का प्राचीन सैन्य स्तंभ ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) झालावाड़ जिले के अक्लेरा कस्बे में स्थित यह किला मध्यकालीन स्थापत्य का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यह मुख्य रूप से मालवा और राजपूताना के व्यापारिक और सैन्य मार्ग की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। इस किले पर विभिन्न समय में स्थानीय

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लोहागढ़ किला ( भरतपुर )

लोहागढ़ किला :- मिट्टी की वह दीवार जिसे अंग्रेज भी न भेद सके ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) भरतपुर में स्थित लोहागढ़ किले का निर्माण 18वीं शताब्दी (1733 ई.) में महान जाट शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था। इस किले का नाम ‘लोहागढ़‘ इसलिए पड़ा क्योंकि इसे जीतना लोहे के चने चबाने जैसा था। इतिहास गवाह

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नाहरगढ़ किला

नाहरगढ़ किला :- गुलाबी शहर का मुकुट और अरावली की शान ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1734 में इस किले का निर्माण करवाया था। इसे मुख्य रूप से जयपुर शहर की सुरक्षा के लिए एक अभेद्य दीवार के रूप में बनाया गया था। लोककथाओं के अनुसार, इस

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बदनौर किला ( भीलवाड़ा )

बदनौर किला :- मेवाड़ की रक्षा का सात मंजिला प्रहरी ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) भीलवाड़ा जिले के बदनौर कस्बे में एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह किला मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। इसका निर्माण 15वीं शताब्दी में राणा कुंभा के शासनकाल के दौरान मेवाड़ की सीमाओं की रक्षा के लिए किया गया

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गागरोन किला ( झालावाड़ )

गागरोन किला :- जल की गोद में बसा अभेद्य दुर्ग ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) झालावाड़ जिले में स्थित गागरोन किला यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह भारत के चुनिंदा ‘जल-दुर्गों‘ में से एक है, क्योंकि यह तीन ओर से आहू और कालीसिंध नदियों के संगम से घिरा हुआ है। इस किले

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जालौर किला

जालौर किला :- सुवर्णगिरी की अभेद्य ढाल ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) जालौर का किला अरावली की ‘सोनगिरी‘ पहाड़ी पर स्थित है। इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में प्रतिहार राजाओं द्वारा करवाया गया था, जिसके बाद यह परमारों और फिर चौहानों के नियंत्रण में आया। इस किले का सबसे गौरवशाली इतिहास राजा कान्हड़देव चौहान से जुड़ा है,

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