कंवर ताल ( बिहार )

विस्तृत जानकारी (Detailed History) कंवर ताल (जिसे कावर झील भी कहा जाता है) बिहार के बेगूसराय जिले के मंझौल में स्थित है। यह झील गंडक नदी के पुराने मार्ग से कटकर बनी एक ‘गोखुर‘ झील है। इसकी महत्ता को देखते हुए इसे साल 2020 में बिहार का पहला रामसर स्थल (Ramsar Site) घोषित किया गया […]

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वन्दे भारत एक्सप्रेस

विस्तृत जानकारी (Detailed History) वन्दे भारत एक्सप्रेस, जिसे ‘ट्रेन 18‘ के नाम से भी जाना जाता है, भारत की पहली स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन है। इसका निर्माण चेन्नई स्थित ‘इंटीग्रल कोच फैक्ट्री‘ (ICF) में ‘मेक इन इंडिया‘ अभियान के तहत किया गया। पहली वन्दे भारत एक्सप्रेस को 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली और वाराणसी

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ट्रेडिंग क्या है

विस्तृत जानकारी (Detailed History) ट्रेडिंग का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि मानव सभ्यता का व्यापार। प्राचीन काल में इसे ‘वस्तु विनिमय‘ (Barter System) के रूप में जाना जाता था। आधुनिक वित्तीय ट्रेडिंग की शुरुआत 1602 में हुई जब ‘डच ईस्ट इंडिया कंपनी‘ ने दुनिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज एम्स्टर्डम में स्थापित किया। भारत

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त्सो मोरीरी झील (लद्दाख)

विस्तृत जानकारी (Detailed History) त्सो मोरीरी झील लद्दाख के चांगथांग (Changthang) क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत सुंदर और शांत ऊँचाई वाली झील है। यह समुद्र तल से लगभग 4,522 मीटर (14,836 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। इसे नवंबर 2002 में रामसर स्थल (Ramsar Site) घोषित किया गया था। यह झील ‘त्सो मोरीरी वेटलैंड कंजर्वेशन

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नंदा झील (गोवा)

विस्तृत जानकारी (Detailed History) नंदा झील का महत्व केवल इसके जल स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गोवा के “पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़” मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से, क्यूपेम के स्थानीय निवासी इस झील को एक पवित्र जल स्रोत के रूप में देखते आए हैं। इसे रामसर साइट का दर्जा मिलने के पीछे

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पाला वेटलैंड ( मिजोरम )

विस्तृत जानकारी (Detailed History) पाला वेटलैंड, जिसे स्थानीय मारा (Mara) भाषा में ‘पाला टिपा‘ कहा जाता है, मिजोरम के सियाहा (Saiha) जिले में स्थित है। यह मिजोरम की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है और इसे अगस्त 2022 में रामसर स्थल (Ramsar Site) के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। इस झील का इतिहास स्थानीय लोककथाओं से

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फतेहपुर सीकरी (आगरा)

विस्तृत जानकारी (Detailed History) फतेहपुर सीकरी का निर्माण मुगल सम्राट अकबर ने 1571 से 1585 के बीच करवाया था। माना जाता है कि अकबर की कोई संतान नहीं थी, तब वे सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के पास दुआ मांगने आए थे। उनके आशीर्वाद से जब जहाँगीर का जन्म हुआ, तो अकबर ने अपनी राजधानी

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दयालबाग आगरा (आगरा)

दयालबाग आगरा का एक अत्यंत विशिष्ट और आध्यात्मिक कस्बा है, जिसे ‘राधास्वामी सत्संग‘ आंदोलन के केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसकी स्थापना 20 जनवरी 1915 को राधास्वामी मत के पांचवें गुरु, परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज ने की थी। दयालबाग का अर्थ है ‘दया का बाग‘ (Garden of Mercy)। यह केवल एक धार्मिक

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स्वामीबाग आगरा ( आगरा )

स्वामीबाग (Soami Bagh) आगरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक स्थान है, जो विशेषकर राधास्वामी सत्संग (Radha Soami Satsang) के अनुयायियों के लिए परम पवित्र है। इसकी स्थापना राधास्वामी मत के संस्थापक और प्रथम गुरु, परम गुरु हुजूर शिव दयाल सिंह जी महाराज (परम पुरुष पूरण धनी सोमीजी महाराज) द्वारा की गई थी। स्वामीबाग का

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वरहन कस्बा (आगरा)

वरहन (Barhan) उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के एतमादपुर तहसील में स्थित एक ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कस्बा है। यह स्थान मुख्य रूप से अपने रेलवे जंक्शन के कारण प्रसिद्ध है, जो ब्रिटिश काल से ही उत्तर भारत के रेल मार्ग का एक अहम हिस्सा रहा है। वरहन का इतिहास यहाँ की कृषि

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