वाह कस्बा (आगरा)

विस्तृत जानकारी (Detailed History) वाह (Bah) कस्बा आगरा जिले की एक महत्वपूर्ण तहसील है, जो अपने अदम्य साहस और ऐतिहासिक वीरता के लिए जानी जाती है। इस क्षेत्र को ‘भदावर‘ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहाँ सदियों तक भदौरिया राजवंश का शासन रहा। वाह कस्बे का इतिहास दिल्ली सल्तनत और मुगल काल […]

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फतेहाबाद कस्बा (आगरा )

विस्तृत जानकारी (Detailed History) आगरा जिले में स्थित फतेहाबाद ऐतिहासिक दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। इसका प्राचीन नाम ‘ज़फ़राबाद‘ था, लेकिन मुगल इतिहास में इसका नाम तब बदला जब औरंगजेब ने अपने भाइयों के खिलाफ उत्तराधिकार के युद्ध में निर्णायक जीत हासिल की। जून 1658 में, सामूगढ़ की लड़ाई के बाद, औरंगजेब ने

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किरावली कस्बा

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित किरावली एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और प्रशासनिक केंद्र है। यह आगरा और फतेहपुर सीकरी के मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण पर्यटकों के लिए एक प्रमुख पड़ाव है। ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) किरावली का इतिहास मुगल काल से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह शहर आगरा (मुगल राजधानी)

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खैरागढ़ कस्बा

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित खैरागढ़ एक ऐतिहासिक और सामरिक महत्व वाली तहसील है। राजस्थान की सीमा के अत्यंत निकट होने के कारण यहाँ की संस्कृति में ब्रज और राजपूताना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ खैरागढ़ पर आधारित विस्तृत ब्लॉग दिया गया है: ​विस्तृत जानकारी (Detailed History) खैरागढ़ का इतिहास

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फतेहपुर सीकरी किले के खुलने और बंद होने का समय

फतेहपुर सीकरी किले के खुलने और बंद होने का समय निम्नलिखित है। ​यह किला सप्ताह के सातों दिन पर्यटकों के लिए खुला रहता है। विशेष सुझाव :– यदि आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं और शांति से किले का भ्रमण करना चाहते हैं, तो सुबह 8:00 बजे से पहले पहुँचना सबसे अच्छा रहता है। दोपहर में

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जय माँ कुष्मांडा

नवरात्रि का चौथा दिन :- माँ कुष्मांडा की दिव्य मुस्कान और सृष्टि की उत्पत्ति ​नमस्ते पाठकों, अपने बिस्तर के आरामदेह कोने से नवरात्रि के चौथे दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस करने के लिए आपका स्वागत है। उम्मीद है कि आप अपने पसंदीदा पेय (शायद अदरक वाली चाय?) के साथ आराम से बैठे हैं और

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विजयादशमी

विस्तृत जानकारी (Detailed History) आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी या दशहरा का त्यौहार पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसका इतिहास दो प्रमुख पौराणिक घटनाओं से जुड़ा है। पहली घटना भगवान श्री राम से संबंधित है, जिन्होंने इसी दिन अहंकारी राक्षस राज रावण का वध कर माता

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माँ सिद्धिदात्री

विस्तृत जानकारी (Detailed History) नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट है, ‘सिद्धि‘ का अर्थ है अलौकिक शक्ति और ‘दात्री‘ का अर्थ है देने वाली। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने इन्हीं देवी की कठिन तपस्या करके आठों सिद्धियाँ प्राप्त की

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माँ महागौरी

विस्तृत जानकारी (Detailed History) नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है, जिसे ‘अष्टमी‘ भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों की तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। जब भगवान

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माँ कालरात्रि

विस्तृत जानकारी (Detailed History) नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। माँ दुर्गा का यह सातवां स्वरूप अत्यंत भयानक और विकराल दिखाई देता है, लेकिन इनका हृदय भक्तवत्सल है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे राक्षसों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था, तब देवताओं की रक्षा

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