
कश्वरधन किला (कुशवर्धन) :- जानिए राजस्थान के बारां में स्थित इस रहस्यमयी और प्राचीन किले का इतिहास
राजस्थान अपने भव्य किलों और महलों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इन्हीं में से एक प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर है ‘कश्वरधन किला’ (Kashwardhan Fort), जिसे ‘कुशवर्धन किला’ या ‘शेरगढ़ का किला’ भी कहा जाता है। बारां जिले के अटरू क्षेत्र में परवन नदी के किनारे पहाड़ी पर बना यह किला अपनी बेहतरीन सैन्य वास्तुकला और प्राचीन इतिहास के लिए जाना जाता है। आइए इस शॉर्ट ब्लॉग में जानते हैं इस किले से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
विस्तृत जानकारी (Detailed History) :-
- स्थापना और इतिहास :– इस किले का प्राचीन नाम ‘कुशवर्धन’ (Kushavardhana) था। इतिहासकारों के अनुसार, इस प्राचीन किले का निर्माण डोड राजाओं या नागवंशीय शासकों द्वारा करवाया गया था। बाद में मालवा के परमार राजाओं का भी यहाँ अधिकार रहा।
- नाम बदलने की कहानी :– शेरशाह सूरी ने मालवा अभियान के समय जब इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण किले पर अधिकार किया, तो उसने इसका जीर्णोद्धार करवाया और अपने नाम पर इसका नाम बदलकर ‘शेरगढ़’ रख दिया। हालांकि, स्थानीय इतिहास और शिलालेखों में आज भी इसे ‘कुशवर्धन या कश्वरधन दुर्ग’ के रूप में याद किया जाता है।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture) :-
- बाहरी और आंतरिक बनावट :– यह दुर्ग ‘जल दुर्ग’ और ‘गिरि दुर्ग’ दोनों की श्रेणियों में आता है। इसकी बाहरी बनावट परवन नदी और ऊँची पहाड़ियों की वजह से बेहद सुरक्षित और अजेय थी। किले की विशाल प्राचीर (बुर्ज) और मजबूत पत्थरों के दरवाजे इसके सैन्य स्थापत्य को दर्शाते हैं। इसकी आंतरिक बनावट में प्राचीन महल के खंडहर, मुगलकालीन जामी मस्जिद, राजा झाला जालिम सिंह की हवेलियाँ और ऐतिहासिक बारूद खाने के अवशेष देखे जा सकते हैं।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-
- टिकट और प्रवेश शुल्क :– कश्वरधन (कुशवर्धन/शेरगढ़) किले में घूमने के लिए पर्यटकों को कोई टिकट या प्रवेश शुल्क नहीं देना होता है। यहाँ प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क है।
- समय (Visiting Time) :– यह किला पर्यटकों के लिए सुबह 07:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक खुला रहता है। धूप से बचने के लिए अक्टूबर से मार्च के महीनों में सुबह या शाम के समय जाना सबसे उत्तम रहता है।
- पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :–
- सड़क मार्ग द्वारा :– यह किला बारां जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर अटरू तहसील के पास स्थित है। कोटा और बारां से यहाँ के लिए बसें और प्राइवेट टैक्सियाँ आसानी से मिल जाती हैं।
- रेल मार्ग द्वारा :– सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ‘अटरू रेलवे स्टेशन’ और ‘बारां जंक्शन‘ है, जो राजस्थान के प्रमुख रेल मार्गों से जुड़े हैं।
- फोटोग्राफी स्पॉट्स :– परवन नदी के ऊपर से दिखने वाला किले का विशाल बाहरी दृश्य, किले के प्राचीन पत्थरों से बने मुख्य द्वार और बुर्ज से दिखने वाला प्राकृतिक नज़ारा।
- स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार :– किले के आसपास ग्रामीण क्षेत्र है, जहाँ पारंपरिक राजस्थानी भोजन जैसे ‘दाल-बाटी-चूरमा’ का स्वाद चखा जा सकता है। हस्तशिल्प और खरीदारी के लिए बारां और कोटा के मुख्य बाज़ार सबसे प्रसिद्ध हैं।
रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-
- कोषवर्धन से कुशवर्धन :– कुछ प्राचीन शिलालेखों में इस किले को ‘कोषवर्धन‘ भी कहा गया है, जिसका अर्थ होता है ‘खजाने को बढ़ाने वाला किला’। माना जाता है कि राजा यहाँ अपना गुप्त खजाना सुरक्षित रखते थे।
- झाला जालिम सिंह की शरणस्थली :– कोटा के प्रसिद्ध सेनापति और प्रशासक झाला जालिम सिंह ने भी मराठों और अन्य दुश्मनों से बचने के लिए इस किले का इस्तेमाल अपनी सैन्य छावनी और शरणस्थली के रूप में किया था।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
- प्रश्न 1:– कश्वरधन (कुशवर्धन) किला राजस्थान के किस जिले में स्थित है?
- उत्तर:– यह ऐतिहासिक किला राजस्थान के बारां जिले के अटरू क्षेत्र में स्थित है।
- प्रश्न 2:– कश्वरधन किले का नाम बदलकर ‘शेरगढ़’ किसने रखा था?
- उत्तर:– सूरी वंश के शासक शेरशाह सूरी ने इस किले पर अधिकार करने के बाद इसका नाम बदलकर ‘शेरगढ़’ रखा था।
“परवन नदी के तट पर इतिहास की लहरों को थामे खड़ा कश्वरधन किला, आज भी हाड़ौती अंचल के गौरवशाली सैन्य इतिहास और राजपूत-मुगल संघर्ष की गाथा गाता है।”
