तुगलकाबाद किला ( दिल्ली )

दिल्ली का शापित किला

6. तुगलकाबाद किला :- दिल्ली का शापित किला

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

तुगलकाबाद किले का निर्माण 1321 में तुगलक वंश के संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक ने करवाया था। यह दिल्ली का तीसरा शहर माना जाता है। इस किले के साथ एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक किस्सा जुड़ा है। कहा जाता है कि प्रसिद्ध सूफी संत निजामुद्दीन औलिया ने इस किले को श्राप दिया था— “या रहे उजाड़, या बसे गुज्जर“। संत और सुल्तान के बीच विवाद के कारण यह किला कभी पूरी तरह आबाद नहीं हो पाया और निर्माण के मात्र 6 साल बाद ही इसे छोड़ दिया गया।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

​यह किला अपनी विशाल और मोटी दीवारों के लिए जाना जाता है, जो सुरक्षा की दृष्टि से बनाई गई थीं। किले की दीवारें 10 से 15 मीटर तक ऊंची हैं। किले के भीतर कभी भव्य महल, मस्जिदें और बड़े-बड़े भंडार कक्ष हुआ करते थे। गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा किले के मुख्य द्वार के सामने एक अलग परिसर में स्थित है, जो लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना है और एक पुल के माध्यम से किले से जुड़ा है।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-

टिकट :– भारतीय पर्यटकों के लिए 25 रुपये और विदेशियों के लिए 300 रुपये।

समय :– सुबह 7:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक।

पहुँचने का मार्ग :– सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘तुगलकाबाद‘ (वॉलेट लाइन) है। वहाँ से आप ऑटो या टैक्सी लेकर किले तक पहुँच सकते हैं।

फोटोग्राफी स्पॉट्स :– किले की ऊँची ढलान वाली दीवारें और गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन हैं।

स्थानीय स्वाद :– किले के आसपास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं हैं, इसलिए साकेत या नेहरू प्लेस जाकर आप अच्छे भोजन का आनंद ले सकते हैं।

प्रसिद्ध बाज़ार :– खरीदारी के लिए ‘नेहरू प्लेस‘ और ‘बदरपुर‘ के स्थानीय बाज़ार पास में हैं।

Interesting Facts

  • ​इस किले के निर्माण के लिए गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के सभी मजदूरों को काम पर लगा दिया था, जिससे संत निजामुद्दीन औलिया की बावली का काम रुक गया था।
  • ​किले में कभी 52 बड़े द्वार हुआ करते थे, जिनमें से अब केवल कुछ ही सुरक्षित बचे हैं।
  • ​यह किला अपनी ऊँची और तिरछी दीवारों के कारण एक अजेय दुर्ग जैसा दिखाई देता है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- क्या तुगलकाबाद किला सुरक्षित है?

उत्तर:- किला बहुत बड़ा और वीरान है, इसलिए यहाँ दिन के समय और समूह (Group) में जाना ही बेहतर माना जाता है।

प्रश्न 2:- क्या यहाँ गाइड मिलते हैं?

उत्तर:- यहाँ आधिकारिक गाइडों की कमी है, इसलिए जाने से पहले इसके इतिहास के बारे में पढ़कर जाना अच्छा रहता है।

ब्लॉगर के लेख :- हमे तुगलकाबाद किला घूमने आना चाहिए यहां का नजारा बहुत ही अद्भुत है यह किला बहुत बड़ा है । इस किले की दीवारें बहुत मोटी है तथा बहुत ऊंची है , इस किले की दीवारें पत्थर से बनी हुई है।

” तुगलकाबाद किला अपनी विशाल दीवारों के पीछे आज भी सुल्तान की महत्वाकांक्षा और संत के श्राप की दास्ताँ समेटे हुए है।”

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