
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (पशु चिकित्सालय), मथुरा :- पशु स्वास्थ्य, शिक्षा और शोध का पावन केंद्र
उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक व धार्मिक नगरी मथुरा में दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) पर स्थित पण्डित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (DUVASU – Veterinary University & Hospital, Mathura) भारत का एक अत्यंत प्राचीन, प्रतिष्ठित और अग्रणी पशु चिकित्सा संस्थान है। वर्ष 1947 में स्थापित यह संस्थान एशिया के सबसे पुराने पशु चिकित्सा कॉलेजों में से एक है।
भगवान श्री कृष्ण की पावन क्रीड़ास्थली ब्रज में, जहाँ गऊ-सेवा और पशु प्रेम को सर्वोपरि स्थान दिया गया है, स्थित यह विशाल पशु चिकित्सालय (Veterinary Hospital) न केवल उत्तर भारत का सबसे बड़ा और आधुनिक पशु चिकित्सा केंद्र है, बल्कि यह पशु स्वास्थ्य, पशुपालकों के कल्याण, देशी गो-संवर्धन और उन्नत शोध का एक मुख्य स्तंभ है।
विस्तृत जानकारी (Detailed History)
मथुरा के इस पशु चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना 16 अगस्त 1947 (भारत की स्वतंत्रता के ठीक अगले दिन) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यूपी कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हस्बैंड्री (U.P. College of Veterinary Science & Animal Husbandry) के रूप में की गई थी। यह स्वतंत्र भारत में स्थापित होने वाला पहला समर्पित पशु चिकित्सा महाविद्यालय था।
वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश सरकार के अधिनियम के तहत इसे एक पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया और इसका नाम महान विचारक एवं समाज सेवी पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी के नाम पर ‘पण्डित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान’ (DUVASU) रखा गया। इसके अंतर्गत संचालित विशाल पशु चिकित्सालय (Veterinary Clinical Complex – VCC) चौबीसों घंटे चालू रहने वाला उत्तर भारत का सबसे बड़ा पशु रेफरल अस्पताल है, जहाँ गाय, भैंस, घोड़े, कुत्ते, बिल्ली, हाथी और अन्य वन्यजीवों का अत्याधुनिक चिकित्सीय उपचार किया जाता है।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture)
दुवासू (DUVASU) और इसके पशु चिकित्सालय का परिसर लगभग 800 एकड़ से अधिक की विशाल और हरी-भरी भूमि में फैला हुआ है। इसका स्थापत्य ब्रिटिशकालीन भव्यता और आधुनिक इंडो-सरसेनिक स्थापत्य शैली का एक बेजोड़ उदाहरण है।
- बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :– मुख्य राजमार्ग पर स्थित विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक प्रशासनिक इमारत और मुख्य द्वार इंडो-सैनिक व नागर शैली का मिश्रण है। लाल ईंटों और चूने के गारे से निर्मित पुरानी औपनिवेशिक इमारतें आज भी अपनी ऐतिहासिक भव्यता की गवाही देती हैं। परिसर के भीतर विशाल हरे-भरे मैदान, विशाल गो-अनुसंधान फार्म, पशु चारागाह और चौड़ी सड़कें बनी हुई हैं।
- आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :– पशु चिकित्सालय (Clinical Complex) के भीतर छोटे और बड़े पशुओं के लिए पृथक-पृथक वार्ड बने हुए हैं। इसमें अत्याधुनिक वेटरनरी ऑपरेशन थिएटर (OT), डिजिटल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड रूम, सीटी स्कैन यूनिट, इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU), उन्नत पैथोलॉजी लैब, और पशु डायग्नोस्टिक सेंटर निर्मित हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसर में विशाल केंद्रीय पुस्तकालय, प्रशासनिक भवन, अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र, छात्र हॉस्टल और प्रोफेसर क्वार्टर स्थित हैं।
आसपास के आकर्षक बिंदु (Nearby Attractions)
- श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा :– मुख्य मथुरा शहर में स्थित भगवान श्री कृष्ण का ऐतिहासिक जन्मस्थान।
- विश्राम घाट व यमुना तट :– मथुरा का प्रसिद्ध ऐतिहासिक घाट जहाँ दैनिक यमुना आरती होती है।
- गायत्री तपोभूमि व शांतिकुंज केंद्र :– मथुरा-दिल्ली मार्ग पर स्थित आध्यात्मिक केंद्र।
- वृंदावन धाम :– दुवासू परिसर से कुछ ही दूरी पर स्थित विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)
- प्रवेश व चिकित्सीय सेवाएँ (Entry & Hospital Timings) :–
- पशु चिकित्सालय आपातकालीन सेवा (Emergency OPD) :– चौबीसों घंटे (24×7) खुली रहती है।
- सामान्य ओपीडी समय :– प्रातः 08:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक (सोमवार से शनिवार)।
- अकादमिक/प्रशासनिक समय :– प्रातः 09:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक।
- टिकट/पंजीकरण शुल्क :– पशु इलाज हेतु पंजीकरण पर्चा अत्यंत न्यूनतम/सांकेतिक शुल्क (Nominal Charges) पर बनाया जाता है।
- पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :–
- सड़क मार्ग द्वारा :– पशु चिकित्सालय विश्वविद्यालय दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) पर मथुरा शहर के मुख्य चौराहे (स्टेट बैंक चौराहा/कृष्णा नगर) के पास स्थित है। मथुरा बस स्टैंड (लगभग 2-3 किमी) से ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा और टैक्सियाँ चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती हैं।
- रेल मार्ग द्वारा :– निकटतम मुख्य रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन (Mathura Junction – MTJ) है, जो यहाँ से मात्र 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जंक्शन से ऑटो या ई-रिक्शा द्वारा 10 मिनट में आसानी से पहुँचा जा सकता है।
- हवाई मार्ग द्वारा :– निकटतम हवाई अड्डा पंडित दीनदयाल उपाध्याय हवाई अड्डा, आगरा (लगभग 60 किमी) और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली (लगभग 150 किमी) है।
फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots)
- ऐतिहासिक मुख्य प्रशासनिक भवन (Heritage Building) :– लाल ईंटों से निर्मित ब्रिटिशकालीन औपनिवेशिक इमारत की हेरिटेज फोटोग्राफी।
- विशाल हरा-भरा कैंपस व प्रवेश द्वार :– विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार और वृक्षों से आच्छादित चौड़ी सड़कों के सुरम्य दृश्य।
- गो-अनुसंधान केंद्र (Go-Anusandhan Kendra) :– भारतीय देशी गो-वंश नस्लों और विशाल डेयरी फार्म क्षेत्र के प्राकृतिक दृश्य (अनुमति अनुसार)।
स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार (Local Flavors & Famous Markets)
- स्थानीय स्वाद :– दुवासू परिसर के पास और मथुरा शहर में प्रसिद्ध ब्रज स्वादों का आनंद लिया जा सकता है। यहाँ के प्रसिद्ध मथुरा के पेड़े, गरमा-गरम कचौड़ी और आलू की तीखी सब्जी, बेड़मी पूड़ी, समोसे, घेवर और शुद्ध दूध की मलाईदार कुल्हड़ लस्सी अत्यंत लोकप्रिय हैं।
- प्रसिद्ध बाज़ार :– पास ही स्थित ‘कृष्णा नगर बाज़ार’ और मथुरा का ‘होली गेट बाज़ार’, जो कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स, हस्तशिल्प, पीतल की मूर्तियों और प्रामाणिक ब्रज मिष्ठान के लिए प्रसिद्ध हैं।
रोचक तथ्य (Interesting Facts)
- स्वतंत्र भारत का पहला वेटरनरी कॉलेज :– 16 अगस्त 1947 को स्थापित यह संस्थान स्वतंत्र भारत में शुरू किया गया पहला समर्पित पशु चिकित्सा महाविद्यालय है।
- एशिया का पहला समर्पित गो-अनुसंधान संस्थान :– दुवासू भारत और एशिया का ऐसा पहला पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय है जिसके परिसर में समर्पित ‘गो-अनुसंधान संस्थान’ (Institute of Cownomics and Cow Research) स्थित है।
- उत्तर भारत का सबसे आधुनिक पशु अस्पताल :– यहाँ हाथियों, घोड़ों, सांडों जैसे विशालकाय पशुओं की सर्जरी के लिए अत्याधुनिक हाइड्रोलिक ऑपरेशन टेबल और विशेष एनेस्थीसिया मशीनें उपलब्ध हैं।
- ब्रज की गऊ-सेवा परंपरा का आधुनिक स्वरूप :– द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण की गो-सेवा की पावन परंपरा को यह संस्थान आधुनिक विज्ञान और चिकित्सा के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
प्रश्न 1:- मथुरा पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (DUVASU) की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर:– इस संस्थान की स्थापना 16 अगस्त 1947 को कॉलेज के रूप में हुई थी, जिसे वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया।
प्रश्न 2:- क्या मथुरा पशु चिकित्सालय में आम पशुपालक अपने पशुओं का इलाज करा सकते हैं?
उत्तर:– जी हाँ, यह उत्तर भारत का एक प्रमुख रेफरल पशु अस्पताल है जहाँ कोई भी किसान या पशुपालक अपने गाय, भैंस, कुत्ते, बिल्ली या अन्य पशुओं को बेहद कम शुल्क पर इलाज और सर्जरी के लिए ला सकता है।
प्रश्न 3:– मथुरा पशु चिकित्सालय मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से कितनी दूरी पर है?
उत्तर:– यह विश्वविद्यालय और अस्पताल मथुरा जंक्शन (Mathura Junction) से मात्र 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के समीप स्थित है।
लेखक के विचार (Author’s Thoughts)
”जिस ब्रज भूमि में भगवान श्री कृष्ण ने गो-सेवा और पशु-पक्षियों के प्रति करुणा का संदेश दिया, उसी पावन माटी पर स्थित मथुरा का यह पशु चिकित्सालय और विश्वविद्यालय हमारे देश की एक अनमोल धरोहर है। यह संस्थान न केवल पशु-पक्षियों के जीवन की रक्षा कर रहा है, बल्कि उन्नत अनुसंधान से किसानों और पशुपालकों की आजीविका को भी समृद्ध बना रहा है। ब्रज की इस पावन धरा पर आधुनिक विज्ञान और पशु-सेवा का यह संगम वास्तव में वंदनीय है।”
“मथुरा का पशु चिकित्सालय ब्रज की पावन धरा पर गो-सेवा की प्राचीन परंपरा और आधुनिक पशु चिकित्सा विज्ञान का एक अलौकिक व जगमगाता केंद्र है।”
