
श्री गोवर्धन पर्वत मथुरा :- इतिहास, परिक्रमा और संपूर्ण यात्रा
श्री गोवर्धन पर्वत (गिरिराज जी), मथुरा की अत्यंत पवित्र, ऐतिहासिक और अलौकिक यात्रा ।
विस्तृत जानकारी (Detailed History)
श्री गोवर्धन पर्वत (जिसे गिरिराज महाराज भी कहा जाता है) ब्रजमंडल का सबसे पावन और पूजनीय स्थल माना जाता है। श्रीमद्भागवत और सनातन धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस पवित्र पर्वत का सीधा संबंध द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं से है।
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रजवासी हर वर्ष इंद्र देव की पूजा करते थे। बालक श्री कृष्ण ने गोकुलवासियों को समझाया कि वर्षा करना इंद्र का केवल संवैधानिक कर्तव्य है, इसलिए हमें इंद्र के बजाय प्रकृति, पर्यावरण और हमारा पालन-पोषण करने वाले गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। इससे क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने ब्रज पर मूसलाधार वर्षा और प्रलयकारी तूफान बरसा दिया। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए 7 वर्ष के बालक श्री कृष्ण ने विशाल गोवर्धन पर्वत को अपनी बाएँ हाथ की कनिष्ठिका (छोटी उंगली) पर लगातार 7 दिनों तक उठाए रखा। इस चमत्कार के बाद इंद्र देव का अभिमान चूर हुआ और उन्होंने भगवान श्री कृष्ण से क्षमा मांगी। तभी से गिरिराज जी की पूजा और ‘अन्नकूट महोत्सव’ की परंपरा आरंभ हुई।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture)
- प्राकृतिक रूप व सिलाएँ :– गोवर्धन पर्वत कोई मानव निर्मित इमारत या मंदिर नहीं है, बल्कि यह लगभग 21 किलोमीटर लंबा प्राकृतिक बलुआ पत्थरों का एक विशाल पर्वत श्रृंखला क्षेत्र है। इसकी छोटी-बड़ी शिलाओं (पत्थरों) को स्वयं भगवान श्री कृष्ण का साक्षात स्वरूप माना जाता है, इसलिए यहाँ की सिलाओं को पैर लगाना वर्जित माना जाता है।
- मानसी गंगा और दानघाटी :– गोवर्धन के केंद्र में ‘मानसी गंगा’ नामक अति पवित्र सरोवर स्थित है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसे श्री कृष्ण ने अपने मन से प्रकट किया था। इसके समीप स्थित ‘दानघाटी मंदिर’ मुख्य पूजा स्थल है जहाँ गिरिराज जी का भव्य दुग्धाभिषेक और श्रृंगार किया जाता है।
- राधा कुंड और श्याम कुंड :– परिक्रमा मार्ग में स्थित राधा कुंड और श्याम कुंड वास्तुकला और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विहंगम और शांत जलकुंड हैं, जिन्हें श्री राधा-कृष्ण के निष्छल प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)
- प्रवेश व परिक्रमा शुल्क :– निःशुल्क (पर्वत दर्शन और परिक्रमा के लिए कोई शुल्क नहीं है)।
- परिक्रमा की जानकारी :–
- कुल दूरी :– गोवर्धन पर्वत की संपूर्ण परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर (7 कोस) की होती है। इसे दो भागों में बाँटा जाता है: ‘छोटी परिक्रमा’ और ‘बड़ी परिक्रमा’।
- परिक्रमा का समय :– श्रद्धालु प्रातः काल 04:00 AM से या शाम को ठंडे मौसम में परिक्रमा शुरू करते हैं। पैदल परिक्रमा में आमतौर पर 5 से 7 घंटे का समय लगता है। ई-रिक्शा द्वारा भी परिक्रमा की जा सकती है।
- पहुँचने का मार्ग :–
- रेल मार्ग :– निकटतम मुख्य रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन (लगभग 26 किमी) है। मथुरा स्टेशन से गोवर्धन के लिए 24 घंटे ई-रिक्शा, ऑटो-रिक्शा और बसें उपलब्ध रहती हैं।
- सड़क मार्ग :– दिल्ली, आगरा और जयपुर से एनएच-19 व स्टेट हाईवे के माध्यम से गोवर्धन बस स्टैंड तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। निजी वाहनों के लिए गोवर्धन में प्रवेश से पहले पार्किंग स्थल बने हुए हैं।
- वायु मार्ग :– सबसे पास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नई दिल्ली (लगभग 160 किमी) और घरेलू हवाई अड्डा आगरा (लगभग 85 किमी) है।
- फोटोग्राफी स्पॉट्स :– दानघाटी मंदिर के बाहर, कुसुम सरोवर की नक्काशीदार छतरियाँ, राधा कुंड और मानसी गंगा के घाटों पर बेहद सुंदर फोटोग्राफी की जा सकती है।
- स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार :– गोवर्धन में गिरिराज जी का दूध प्रसादम, रबड़ी, ताज़ा मख्खन-मिश्री, और खस्ता कचौड़ी-सब्जी अत्यंत प्रसिद्ध है। बाज़ार से आप कंठी माला, पीतल के बर्तन और गिरिराज शिला के चित्र खरीद सकते हैं।
रोचक तथ्य (Interesting Facts)
- प्रतिदिन घटने वाला पर्वत :– पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पुलस्त्य ऋषि के श्राप के कारण गोवर्धन पर्वत का आकार प्रतिदिन एक तिल के बराबर घटता (छोटा होता) जा रहा है।
- साक्षात श्री कृष्ण स्वरूप :– वैष्णव संप्रदाय में गोवर्धन की सिलाओं को भगवान श्री कृष्ण से भिन्न नहीं माना जाता, इसीलिए यहाँ की परिक्रमा नंगे पैर की जाती है।
- दूध की धारा से परिक्रमा :– कई श्रद्धालु 21 किलोमीटर लंबे परिक्रमा मार्ग पर हाथ में दूध का बर्तन लेकर पूरी परिक्रमा के दौरान लगातार दूध की धारा अर्पित करते हुए चलते हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
प्रश्न 1:- गोवर्धन पर्वत की कुल परिक्रमा कितने किलोमीटर की होती है?
उत्तर:- गोवर्धन पर्वत की संपूर्ण परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर (7 कोस) की होती है।
प्रश्न 2:- क्या गोवर्धन परिक्रमा के लिए ई-रिक्शा उपलब्ध होते हैं?
उत्तर:- हाँ, जो श्रद्धालु या बुजुर्ग पैदल चलने में असमर्थ हैं, वे ई-रिक्शा या ऑटो बुक करके भी 21 किमी की परिक्रमा पूरी कर सकते हैं।
प्रश्न 3:- गोवर्धन परिक्रमा का सबसे मुख्य मंदिर कौन सा है?
उत्तर :- परिक्रमा का मुख्य प्रारंभिक व पूजा केंद्र दानघाटी मंदिर और मुकुट मुखारविंद मंदिर माना जाता है।
आसपास के प्रमुख आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions)
- कुसुम सरोवर (Kusum Sarovar) :– परिक्रमा मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक और अद्भुत स्थापत्य कला से सुसज्जित बलुआ पत्थरों का भव्य जलाशय।
- राधा कुंड व श्याम कुंड (Radha Kund & Shyam Kund) :– वैष्णव संप्रदाय का अति पवित्र कुंड जो गोवर्धन से मात्र 3 किमी की दूरी पर स्थित है।
- जतीपुरा मंदिर (Jatipura Mukharvind) :– पर्वत के दूसरी ओर स्थित प्रसिद्ध स्थल जहाँ गिरिराज जी के मुखारविंद के दर्शन और दुग्धाभिषेक किया जाता है।
- मानसी गंगा (Mansi Ganga) :– गोवर्धन के केंद्र में स्थित पवित्र सरोवर जहाँ श्रद्धालु स्नान और आरती करते हैं।
लेखक के विचार (Author’s Thoughts)
श्री गोवर्धन पर्वत पर व्यतीत किया गया समय केवल एक यात्रा नहीं बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाली एक अलौकिक यात्रा है। नंगे पैर ‘गिरिराज महाराज की जय’ के उद्घोष के साथ 21 किलोमीटर की परिक्रमा करने पर शरीर की थकान मिट जाती है और मन एक अपार ऊर्जा व भक्ति रस से भर जाता है। कुसुम सरोवर की संध्याकालीन शांति और दानघाटी का भक्तिमय माहौल मन को मोह लेता है। यदि आप ब्रज यात्रा का विचार बना रहे हैं, तो गिरिराज जी की पावन परिक्रमा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करना आपकी यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा रहेगा।
“जहाँ छोटी उंगली पर पर्वत उठाकर प्रभु ने तोड़ा इंद्र का अभिमान, वही पावन भक्ति का आधार है गिरिराज गोवर्धन धाम।”
