
संसद भवन :- भारत के लोकतंत्र का नया मंदिर और वास्तुकला का आधुनिक चमत्कार
दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र के केंद्र में स्थित ‘संसद भवन’ (Parliament House) सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का धड़कता हुआ दिल है। भारत की संप्रभुता, लोकतांत्रिक मूल्यों और विधायी निर्णयों का यह सर्वोच्च केंद्र आज पुरानी और नई वास्तुकला के एक अद्भुत संगम के रूप में दुनिया के सामने खड़ा है। आज इस विस्तृत ब्लॉग के माध्यम से हम भारत के पुराने और नए संसद भवन के गौरवशाली इतिहास, इसकी बेजोड़ बनावट और इससे जुड़े हर महत्वपूर्ण यात्रा विवरण की सैर करेंगे।
विस्तृत जानकारी (Detailed History)
भारत के संसदीय परिसर का इतिहास दो महत्वपूर्ण अध्यायों में बंटा हुआ है – एक हमारा ऐतिहासिक पुराना संसद भवन और दूसरा हमारा अत्याधुनिक नया संसद भवन।
- पुराना संसद भवन (कौंसिल हाउस) :– इस ऐतिहासिक इमारत को ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने डिजाइन किया था। इसका निर्माण 1921 में शुरू हुआ और 1927 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हुआ। ब्रिटिश काल में इसे ‘कौंसिल हाउस‘ कहा जाता था। आजादी के बाद, यही इमारत भारतीय लोकतंत्र का गवाह बनी, जहाँ हमारे संविधान का निर्माण हुआ। साल 2023 में इस ऐतिहासिक इमारत को ‘संविधान सदन’ (Samvidhan Sadan) का नया नाम दिया गया।
- नया संसद भवन :– 21वीं सदी की जरूरतों, आधुनिक तकनीक और सांसदों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक नए और भव्य संसद भवन की आवश्यकता महसूस की गई। ‘सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना‘ के तहत इस नए भवन की आधारशिला दिसंबर 2020 में रखी गई। भारत के प्रसिद्ध वास्तुकार बिमल पटेल द्वारा डिजाइन किए गए इस नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई 2023 को किया गया। यह पूरी तरह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना से प्रेरित है, जिसे रिकॉर्ड समय में भारतीय कारीगरों और सामग्रियों से तैयार किया गया है।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture)
नया संसद भवन भारतीय संस्कृति, क्षेत्रीय कलाओं और अत्याधुनिक वास्तुकला का एक ऐसा बेजोड़ मिश्रण है, जिसे देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है।
- बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :– पुराने संसद भवन की वृत्ताकार (गोलाकार) संरचना के विपरीत, नया संसद भवन एक त्रिकोणीय (Triangular) आकार में बना है। यह आकार भूमि के इष्टतम उपयोग और पवित्र ज्यामिति (Sacred Geometry) को दर्शाता है। इमारत के निर्माण में धौलपुर से मंगाए गए लाल और गुलाबी बलुआ पत्थरों (Sandstone) का उपयोग किया गया है, जो इसे लुटियंस दिल्ली की अन्य ऐतिहासिक इमारतों के साथ एकरूपता देता है। इसके तीन मुख्य द्वार हैं, जिन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार नाम दिया गया है, और इन द्वारों पर संरक्षकों के रूप में राष्ट्रीय प्रतीकों (जैसे गज, हंस, गरुड़ और शेर) की मूर्तियाँ लगाई गई हैं।
- आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :– इसके भीतर कदम रखते ही भारत की विविधता और कलात्मक भव्यता के दर्शन होते हैं:
- लोकसभा कक्ष :– इसकी आंतरिक बनावट भारत के राष्ट्रीय पक्षी ‘मोर’ (Peacock) के थीम पर आधारित है। यहाँ हरी कालीन और दीवारों पर मोर के पंखों जैसी नक्काशी की गई है। यहाँ 888 सांसदों के बैठने की व्यवस्था है।
- राज्यसभा कक्ष :– यह भारत के राष्ट्रीय फूल ‘कमल’ (Lotus) के थीम पर सजाया गया है। इसमें लाल रंग की थीम का उपयोग किया गया है और यहाँ 384 सांसदों के बैठने की आधुनिक व्यवस्था है।
- सेंगोल (Sengol) :– लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) के आसन के ठीक बगल में पवित्र ‘सेंगोल’ (राजदंड) को स्थापित किया गया है, जो भारत की प्राचीन चोल परंपरा और सत्ता के हस्तांतरण व न्याय का प्रतीक है।
- संवैधानिक हॉल (Constitutional Hall) :– भवन के केंद्र में एक विशाल कॉन्स्टिट्यूशन हॉल है, जहाँ भारत की लोकतांत्रिक यात्रा और संविधान की डिजिटल प्रति को प्रदर्शित किया गया है।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)
यदि आप भारत के इस आधुनिक गौरव को बाहर से देखने और इसके पास से गुजरने का अनुभव लेना चाहते हैं, तो पूरा विवरण नीचे दिए गए क्रम में है।
- टिकट (Ticket) :– संसद भवन के बाहरी परिसर, कर्तव्य पथ और संसद मार्ग पर घूमने के लिए कोई टिकट नहीं लगता है, यहाँ आना पूरी तरह से निःशुल्क (Free) है।
- नोट :– सुरक्षा कारणों से संसद भवन के मुख्य आंतरिक कक्षों में आम जनता का प्रवेश केवल विशेष गैलरी पास या आधिकारिक अनुमति पत्र के माध्यम से ही संभव होता है, जिसकी अनुमति सांसदों की सिफारिश पर मिलती है।
- समय (Visiting Time) :– आप संसद मार्ग और कर्तव्य पथ पर सुबह 06:00 बजे से रात 09:00 बजे के बीच कभी भी घूम सकते हैं। शाम के समय जब संसद भवन रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठता है, तो इसका नजारा देखने लायक होता है।
- खुलने और बंद होने का समय (Opening & Closing Time) :– संसद के प्रशासनिक क्षेत्र चौबीसों घंटे चालू रहते हैं, लेकिन पर्यटकों के लिए बाहरी रास्तों से इसके भव्य दीदार का सबसे अच्छा समय सूर्योदय से लेकर रात 10:00 बजे तक होता है।
- पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :–
- मेट्रो द्वारा :– सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘केंद्रीय सचिवालय’ (Central Secretariat) है, जो येलो और वायलट लाइन का इंटरचेंज है। इसके अलावा ‘उद्योग भवन’ मेट्रो स्टेशन भी पास है। यहाँ से संसद भवन मात्र 5-10 मिनट की पैदल दूरी पर स्थित है।
- बस द्वारा :– दिल्ली के लगभग हर कोने से ‘केंद्रीय सचिवालय’, ‘कृषि भवन’ या ‘संसद मार्ग‘ जाने वाली डीटीसी बसें आपको संसद भवन के बेहद करीब छोड़ देंगी।
- सड़क मार्ग/कैब द्वारा :– आप अपनी निजी कार या कैब के जरिए सीधे ‘New Parliament House, New Delhi’ लोकेशन डालकर पहुँच सकते हैं। यह क्षेत्र ‘हाई-सिक्योरिटी जोन’ में आता है, इसलिए आम वाहनों को संसद भवन की सुरक्षा दीवारों के पास रोकने या पार्क करने की सख्त मनाही है। वाहनों को केवल निर्दिष्ट सार्वजनिक पार्किंग क्षेत्रों में ही खड़ा किया जा सकता है।
फोटोग्राफी स्पॉट्स, स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार :-
- फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :–
- संसद मार्ग और रेल भवन के चौराहे के पास से दिखने वाला नए और पुराने संसद भवन (संविधान सदन) का एक साथ ऐतिहासिक फ्रेम।
- विजय चौक (Vijay Chowk) से संसद भवन और नॉर्थ व साउथ ब्लॉक का सममित और भव्य नजारा।
- रात के समय जब तिरंगे की रोशनी और आधुनिक लाइटिंग से पूरा संसद परिसर चमकता है, तब की तस्वीरें।
- विशेष निर्देश :– संसद भवन के मुख्य द्वारों और सुरक्षा जांच चौकियों के बेहद करीब जाकर तस्वीरें खींचना सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित है। आप एक निश्चित दूरी से सुरक्षित रूप से बेहतरीन तस्वीरें ले सकते हैं।
- स्थानीय स्वाद (Local Flavors) :– संसद भवन के ठीक बाहर कोई व्यावसायिक स्टॉल नहीं हैं, लेकिन विजय चौक और कर्तव्य पथ के आसपास शाम को मिलने वाली दिल्ली की चाट, गोलगप्पे, भेलपूरी और कुल्हड़ वाली चाय सैलानियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। यदि आप दक्षिण भारतीय व्यंजनों के शौकीन हैं, तो पास ही स्थित ‘आंध्र भवन’ या ‘कनॉट प्लेस’ के प्रामाणिक रेस्तराओं में जाकर बेहतरीन भोजन का आनंद ले सकते हैं।
- प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Market) :– संसद भवन से मात्र 1.5 से 2 किलोमीटर की दूरी पर दिल्ली का दिल कहा जाने वाला ‘कनॉट प्लेस’ (Connaught Place) और ‘जनपथ मार्केट’ स्थित हैं। जनपथ बाजार अपनी एथनिक ड्रेसेस, हस्तशिल्प, आर्टिफिशियल ज्वेलरी और स्मृति चिन्हों (Souvenirs) की खरीदारी के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
आसपास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions)
संसद भवन के दौरे के साथ आप लुटियंस दिल्ली के इन अन्य ऐतिहासिक स्थलों को भी देख सकते हैं।
- राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) :– जो संसद भवन से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर रायसिना हिल पर स्थित है।
- इंडिया गेट और राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) :– कर्तव्य पथ के दूसरे छोर पर स्थित भारत का प्रसिद्ध राष्ट्रीय स्मारक।
- राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) :– भारत की प्राचीन कला और सांस्कृतिक इतिहास को समझने के लिए सबसे उत्तम जगह।
- जंतर मंतर :– महाराजा जयसिंह द्वारा बनाई गई ऐतिहासिक खगोलीय वेधशाला, जो संसद मार्ग पर ही आगे स्थित है।
रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-
- नया संसद भवन पूरी तरह से ‘ग्रीन बिल्डिंग’ (Green Building) के सिद्धांतों पर आधारित है, जो बिजली और पानी की भारी बचत करता है। यह भूकंप रोधी (Zone-5) तकनीक से निर्मित है।
- इस भवन के निर्माण में पूरे भारत की झलक मिलती है जैसे नागपुर से सागौन की लकड़ी, राजस्थान के सरमथुरा से बलुआ पत्थर, मिर्जापुर की पारंपरिक कालीनें और अगरतल्ला (त्रिपुरा) का बांस का फर्नीचर इस्तेमाल किया गया है।
- पुराने संसद भवन को गिराया नहीं जाएगा, बल्कि इसे भारत की लोकतांत्रिक धरोहर के रूप में सहेज कर रखा गया है और इसके बड़े कक्षों का उपयोग संसदीय संग्रहालय और पुरालेख के रूप में किया जा रहा है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
प्रश्न 1:– क्या आम नागरिक नए संसद भवन के अंदर जाकर उसे देख सकते हैं?
उत्तर:- आम नागरिकों को संसद भवन के अंदर जाने की अनुमति केवल तभी मिलती है जब उनके पास किसी सांसद (MP) द्वारा अनुशंसित ‘विजिटर गैलरी पास’ हो, या वे किसी आधिकारिक शैक्षणिक/संसदीय दौरे का हिस्सा हों। बाहर से इसे देखने के लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं होती।
प्रश्न 2:- नए संसद भवन के मुख्य वास्तुकार कौन हैं?
उत्तर:- नए संसद भवन के मुख्य वास्तुकार ‘एचसीपी डिजाइंस‘ के बिमल पटेल हैं, जिन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखकर इसे बेहद आधुनिक रूप दिया है।
प्रश्न 3:– लोकसभा और राज्यसभा कक्षों की थीम क्या है?
उत्तर:- लोकसभा कक्ष की थीम भारत के राष्ट्रीय पक्षी ‘मोर’ (Peacock) पर आधारित है, जबकि राज्यसभा कक्ष की थीम भारत के राष्ट्रीय फूल ‘कमल’ (Lotus) पर आधारित है।
लेखक के विचार (Author’s Perspective) :-
मेरी दृष्टि में नया संसद भवन सिर्फ पत्थरों और कंक्रीट से बनी एक आधुनिक इमारत नहीं है, बल्कि यह उभरते हुए और आत्मनिर्भर भारत के आत्मविश्वास की हुंकार है। जहाँ हमारा पुराना संसद भवन औपनिवेशिक काल की याद दिलाता था, वहीं यह नया भवन पूरी तरह से भारतीयता के रंग में रंगा हुआ है। इसके त्रिकोणीय आकार की भव्यता और इसके भीतर छिपी सांस्कृतिक कलाकृतियाँ यह दर्शाती हैं कि भारत अपनी प्राचीन विरासत को समेटे हुए आधुनिक भविष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। यह हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का एक जीवंत प्रतीक है।
S“त्रिकोणीय आकार में ढला यह आधुनिक प्रांगण, भारतीय लोकतंत्र की अमर यात्रा और आत्मनिर्भर भारत के स्वर्णिम भविष्य का नया शिलालेख है।”
