


गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?
गणेश चतुर्थी का त्योहार मुख्य रूप से भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के देवता भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था।
1. पौराणिक कथा और उत्पत्ति :-
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन (चंदन और हल्दी के लेप) से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण फूंक दिए। माता पार्वती ने उन्हें द्वारपाल नियुक्त किया और किसी को भी अंदर न आने देने का आदेश दिया।
जब भगवान शिव वहाँ पहुंचे, तो बालक गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया। माता पार्वती के अत्यंत दुखी होने पर, भगवान शिव ने एक गज (हाथी) का मस्तक बालक के धड़ से जोड़कर उन्हें पुनः जीवित किया। देवताओं ने भगवान गणेश को सभी देवों में “प्रथम पूज्य” (सबसे पहले पूजे जाने वाले) और “विघ्नहर्ता” (बाधाओं को दूर करने वाले) होने का वरदान दिया।
2. सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व :-
धार्मिक पहलू के अलावा, इस पर्व का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सामाजिक पहलू भी है। 1893 में स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप देना शुरू किया। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देश के लोगों को एक मंच पर लाने, उनमें राष्ट्रीय चेतना जगाने और सामाजिक एकजुटता बढ़ाने के लिए इस त्योहार का उपयोग एक जन-आंदोलन के रूप में किया।
आज यह त्योहार न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपार भक्ति, उल्लास, और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मनाया जाता है। 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भगवान गणेश की स्थापना की जाती है और अनंत चतुर्दशी के दिन उनका विसर्जन कर उन्हें भावभीनी विदाई दी जाती है।
