सफदरजंग का मकबरा

दिल्ली की आखिरी मुग़ल विरासत

दिल्ली की आखिरी मुग़ल विरासत :- सफदरजंग का मकबरा (Safdarjung’s Tomb, Delhi)

​विस्तृत जानकारी (Detailed History)

नई दिल्ली के सफदरजंग रोड और लोधी रोड के चौराहे पर स्थित सफदरजंग का मकबरा (Safdarjung’s Tomb) मुग़ल वास्तुकला की गिरती और अंतिम सांस लेती शैली का एक ऐतिहासिक प्रतीक है। यह मकबरा मुग़ल साम्राज्य के शक्तिशाली वज़ीर (प्रधानमंत्री) और अवध के नवाब ‘मिर्ज़ा मुक़ीम अबुल मंसूर ख़ान‘ की याद में बनाया गया था, जिन्हें इतिहास में ‘सफदरजंग‘ के नाम से जाना जाता है। सफदरजंग की मृत्यु 1754 ईस्वी में हुई थी।

उनकी मृत्यु के बाद, उनके बेटे नवाब शुजाउद्दौला ने अपने पिता की स्मृति में इस आलीशान मकबरे का निर्माण 1573-1754 ईस्वी के दौरान करवाया था। यह मकबरा दिल्ली में मुग़लों द्वारा निर्मित अंतिम उद्यान-मकबरा (Garden Tomb) माना जाता है। इस समय तक मुग़ल साम्राज्य का पतन शुरू हो चुका था और शाही खजाना लगभग खाली था। यही कारण है कि इस मकबरे के निर्माण के लिए आवश्यक पत्थरों की कमी को पूरा करने के लिए पास ही स्थित अब्दुल रहीम खान-ए-खाना के मकबरे से बलुआ पत्थर और संगमरमर को निकाला गया था। हालांकि इसे मुग़ल साम्राज्य के कमजोर दौर में बनाया गया, फिर भी यह अपनी भव्यता को बनाए रखने में सफल रहा। आज इसकी देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की जाती है।

​बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

​सफदरजंग का मकबरा हुमायूँ के मकबरे की स्थापत्य शैली पर आधारित है, लेकिन इसमें मुग़ल काल के अंतिम दौर की अपनी एक अलग कलात्मक झलक देखने को मिलती है।

  • बाहरी बनावट (Exterior) :– यह मकबरा एक विशाल ऊंचे चबूतरे पर स्थित है और चारों ओर से एक खूबसूरत ‘चारबाग’ शैली के बगीचे से घिरा हुआ है। इस दो मंजिला इमारत के निर्माण में मुख्य रूप से लाल और भूरे रंग के बलुआ पत्थर (Red and Brown Sandstone) का उपयोग किया गया है, जबकि इसके मुख्य गुंबद पर सफेद संगमरमर की पट्टियां लगाई गई हैं। इसके केंद्र में एक बड़ा और ऊंचा गुंबद है जो फारसी शैली का है। इमारत की दीवारों पर ऊंचे सजावटी मेहराब (Peshthaks) बने हैं। मुख्य मकबरे के चारों कोनों पर चार बहुमंजिला मीनारें (Minarets) बनी हैं, जो इमारत के साथ जुड़ी हुई हैं और उन पर बहुत ही सुंदर संगमरमर का काम किया गया है।
  • आंतरिक बनावट (Interior) :– मकबरे के भीतर जाने पर आपको एक बड़ा केंद्रीय अष्टकोणीय (Octagonal) कक्ष दिखाई देगा। इस कक्ष के बीच में सफदरजंग और उनकी बेगम की प्रतीकात्मक कब्रें (Cenotaphs) बनी हैं, जबकि मूल कब्रें नीचे तहखाने में स्थित हैं। आंतरिक दीवारों और छतों पर चूने के गारे (Plaster) पर बहुत ही सुंदर प्लास्टर मोल्डिंग और रोकोको शैली (Rococo style) जैसी अरबी नक्काशी का काम किया गया है। छत की जटिल ज्यामितीय कलाकृतियाँ देखने लायक हैं। परिसर के भीतर चार मुख्य जल चैनल (Water Channels) बने हैं, जो अलग-अलग दिशाओं में जाते हैं और उनके छोर पर सुंदर फव्वारे लगे हैं।

​यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

  • टिकट और शुल्क :– भारतीय नागरिकों और सार्क (SAARC) व बिम्सटेक (BIMSTEC) देशों के पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क ₹35 से ₹40 है (ऑनलाइन या डिजिटल माध्यम से टिकट खरीदने पर छूट उपलब्ध है)। विदेशी नागरिकों के लिए टिकट की कीमत ₹550 से ₹600 के बीच है। 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का प्रवेश बिल्कुल निःशुल्क है।
  • समय (Visiting Time) :– सफदरजंग का मकबरा सप्ताह के सातों दिन पर्यटकों के लिए खुला रहता है। इसके खुलने का समय सुबह 7:00 बजे से शाम 5:00 या 6:00 बजे तक (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) होता है। सुबह के समय यहाँ शांति से घूमना बेहद सुखद होता है।
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :
    • मेट्रो द्वारा :– यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन येलो लाइन पर स्थित ‘सफदरजंग मदरसा’ या ‘जोर बाग मेट्रो स्टेशन’ (Jor Bagh Metro Station) है। जोर बाग स्टेशन से मकबरे की दूरी मात्र 200 से 300 मीटर है, जहाँ से आप पैदल या स्थानीय ई-रिक्शा द्वारा 2 मिनट में पहुँच सकते हैं।
    • बस और ऑटो द्वारा :– नई दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे या एम्स (AIIMS) की तरफ जाने वाली कई डीटीसी बसें इस मार्ग से होकर गुजरती हैं। आप लोकल ऑटो या ओला/उबर कैब के जरिए भी आसानी से आ सकते हैं।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– मुख्य प्रवेश द्वार से मकबरे का केंद्रीय दृश्य, जल चैनलों में दिखने वाला मकबरे का अक्स (Reflection), कोने के बगीचे से मीनारों के साथ लिया गया शॉट और सूर्यास्त के समय ढलती धूप में चमकता हुआ इसका मुख्य गुंबद फोटोग्राफी के लिए सबसे बेहतरीन स्पॉट्स माने जाते हैं।
  • स्थानीय स्वाद :– मकबरे के पास स्थित लोधी कॉलोनी में कई शानदार कैफे और रेस्टोरेंट्स हैं। इसके अलावा थोड़ी दूरी पर स्थित ‘खान मार्केट’ और ‘आईएनए (INA)’ में आप दिल्ली के चाट, छोले भटूरे और प्रसिद्ध मुगलई व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार :– हस्तशिल्प और पारंपरिक भारतीय कपड़ों की खरीदारी के लिए पास ही में ‘दिल्ली हाट (Dilli Haat, INA)’ स्थित है। इसके अलावा बुक्स और ब्रांडेड कपड़ों के लिए आप दिल्ली के सबसे पॉश ‘खान मार्केट’ का रुख भी कर सकते हैं।

​आसपास के आकर्षण (Nearby Attractions in Detail)

  • लोधी गार्डन (Lodhi Garden) :– सफदरजंग के मकबरे से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह दिल्ली का एक बेहद खूबसूरत और विशाल ऐतिहासिक पार्क है। यहाँ सैय्यद और लोधी राजवंशों के शासकों के मकबरे (जैसे सिकंदर लोधी और मोहम्मद शाह का मकबरा) और ‘शीश गुंबद’ स्थित हैं। यह सुबह की सैर और पिकनिक के लिए दिल्ली की सबसे पसंदीदा जगह है।
  • खान मार्केट (Khan Market) :– मकबरे से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध और महंगा बाजार है। यहाँ कई तरह के बुक स्टोर्स, बुटीक, डिजाइनर शोरूम्स और प्रीमियम कैफे हैं, जहाँ अक्सर मशहूर हस्तियां और विदेशी पर्यटक घूमते हुए नजर आते हैं।
  • लोधी आर्ट डिस्ट्रिक्ट (Lodhi Art District) :– लोधी कॉलोनी में स्थित यह भारत का पहला ओपन-एयर पब्लिक आर्ट डिस्ट्रिक्ट है। यहाँ की सरकारी इमारतों की विशाल दीवारों पर देश और दुनिया के जाने-माने कलाकारों ने बहुत ही खूबसूरत और सामाजिक संदेश देने वाली स्ट्रीट आर्ट (Graffiti) बनाई है, जो युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है।
  • हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह (Hazrat Nizamuddin Dargah) :– मकबरे से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित यह महान सूफी संत ख्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया की पवित्र दरगाह है, जहाँ की रूहानी कव्वाली संगीत प्रेमियों के बीच पूरी दुनिया में मशहूर है।

​रोचक तथ्य (Interesting Facts)

  • ​सफदरजंग के मकबरे को ‘मुग़ल वास्तुकला का अंतिम चिराग’ कहा जाता है, क्योंकि इसके बाद मुग़लों ने किसी भी बड़े या भव्य स्मारक का निर्माण नहीं करवाया।
  • ​इस मकबरे को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि इसमें हुमायूँ के मकबरे या ताजमहल जैसी पूर्ण समरूपता (Symmetry) नहीं है, क्योंकि इसके ऊंचे वर्टिकल अनुपात के कारण इसे कुछ इतिहासकारों द्वारा वास्तुकला की दृष्टि से थोड़ा असंतुलित माना गया है।
  • ​इस मकबरे के मुख्य भवन के उत्तर, दक्षिण और पूर्व दिशा में सुंदर मंडप (Pavilions) बने हैं, जिन्हें ‘जंगला महल’ (Jangli Mahal), ‘मोती महल’ (Moti Mahal) और ‘बादशाह पसंद’ (Badshah Pasand) के नाम से जाना जाता है।
  • ​हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए भी यह मकबरा काफी लोकप्रिय रहा है। हॉलीवुड फिल्म ‘द डार्क नाइट राइजेस’ (The Dark Knight Rises) के कुछ दृश्यों का संदर्भ इस क्षेत्र से जुड़ता है और कई हिंदी गानों की शूटिंग यहाँ हुई है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1: सफदरजंग का मकबरा किसने और किसकी याद में बनवाया था?

उत्तर:– सफदरजंग का मकबरा उनके बेटे नवाब शुजाउद्दौला ने अपने पिता और मुग़ल साम्राज्य के वज़ीर मिर्ज़ा मुक़ीम अबुल मंसूर ख़ान (सफदरजंग) की याद में बनवाया था।

प्रश्न 2: इस मकबरे की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?

उत्तर:– इस मकबरे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दिल्ली में मुग़ल स्थापत्य शैली द्वारा निर्मित अंतिम ऐतिहासिक उद्यान-मकबरा (Garden Tomb) है।

प्रश्न 3: क्या सफदरजंग का मकबरा सोमवार को खुला रहता है?

उत्तर:– हाँ, सफदरजंग का मकबरा सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है। सोमवार को भी आप यहाँ सुबह से शाम तक घूम सकते हैं।

​लेखक के विचार (Author’s Thoughts)

​सफदरजंग का मकबरा महज़ एक शासक की मज़ार नहीं, बल्कि एक बिखरते साम्राज्य की आखिरी भव्य कोशिश का आइना है। जहाँ ताजमहल और हुमायूँ का मकबरा मुग़ल साम्राज्य के स्वर्णिम काल की दास्तान सुनाते हैं, वहीं सफदरजंग का यह मकबरा अपने भीतर एक शांत और संजीदा उदासी समेटे खड़ा है। नई दिल्ली की आधुनिक रफ़्तार के बीच इस मकबरे के शांत चारबाग के लॉन में बैठना, इतिहास के पन्नों को करीब से महसूस करने जैसा है। एक लेखक के तौर पर, मेरा मानना है कि यदि आप दिल्ली के अन्य स्मारकों की भारी भीड़-भाड़ से दूर सुकून के कुछ पल बिताना और मुग़ल वास्तुकला के आखिरी दौर को समझना चाहते हैं, तो शाम के वक्त सफदरजंग के मकबरे की सैर ज़रूर करें।

“मुग़ल सल्तनत के ढलते सूरज की आखिरी चमक समेटे, सफदरजंग का यह मकबरा आज भी अपने अतीत के वैभव की गवाही देता है।”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *