राष्ट्रीय समर स्मारक दिल्ली

राष्ट्रीय समर स्मारक दिल्ली का संपूर्ण इतिहास और वास्तुकला (National War Memorial Delhi :- Complete Guide)

दिल्ली के ऐतिहासिक और प्रशासनिक केंद्र ‘सेंट्रल विस्टा‘ परिसर में इंडिया गेट के ठीक पीछे स्थित ‘राष्ट्रीय समर स्मारक‘ (National War Memorial) स्वतंत्र भारत का एक अत्यंत पवित्र और भव्य राष्ट्रीय स्मारक है। यह स्मारक उन वीर और जाँबाज भारतीय सैनिकों को समर्पित है, जिन्होंने आजादी के बाद (1947 से अब तक) देश की संप्रभुता, अखंडता और नागरिकों की रक्षा के लिए अलग-अलग युद्धों, अभियानों और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह स्थान हर भारतीय के मन में देशभक्ति, कृतज्ञता और असीम गर्व की भावना जगाता है।

​विस्तृत जानकारी (Detailed History)

​आजादी के बाद से ही देश में एक ऐसे केंद्रीय समर स्मारक की मांग की जा रही थी, जहाँ विशेष रूप से स्वतंत्र भारत के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा सके (क्योंकि इंडिया गेट मूल रूप से प्रथम विश्व युद्ध के शहीदों का स्मारक है)। दशकों के इंतजार और गहन योजना के बाद, भारत सरकार ने वर्ष 2015 में इस परियोजना को मंजूरी दी।

​इस भव्य स्मारक का निर्माण कार्य रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया और 25 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को इसे समर्पित करते हुए इसकी मुख्य लौ को प्रज्वलित किया था। यह स्मारक लगभग 40 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है।

इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व तब और बढ़ गया जब 21 जनवरी 2022 को एक ऐतिहासिक सैन्य समारोह में इंडिया गेट के नीचे पिछले 50 वर्षों से जल रही ‘अमर जवान ज्योति‘ की लौ को पूरे राजकीय सम्मान के साथ राष्ट्रीय समर स्मारक की मुख्य लौ (अमर चक्र) में विलीन कर दिया गया। अब देश के सभी शहीदों की याद में केवल इसी परिसर में अखंड ज्योति अनवरत रूप से प्रज्वलित रहती है।

​बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

राष्ट्रीय समर स्मारक की वास्तुकला अत्यंत आधुनिक, प्रतीकात्मक और भारतीय दर्शन पर आधारित है। इसका डिज़ाइन एक वैश्विक प्रतियोगिता के माध्यम से चुना गया था। इस स्मारक को चक्रव्यूह और प्राचीन भारतीय सैन्य संरचनाओं से प्रेरित होकर चार संकेंद्रित वृत्तों (Concentric Circles) के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो सैनिक के जीवन और बलिदान के विभिन्न चरणों को दर्शाते हैं।

​बाहरी और आंतरिक बनावट का चक्रवार विवरण

  • 1. अमर चक्र (Circle of Immortality) :– यह स्मारक का सबसे आंतरिक और मुख्य केंद्र बिंदु है। यहाँ एक 15 मीटर ऊंचा भव्य स्मारक स्तंभ (Obelisk) खड़ा है, जिसके आधार पर ‘अमर चक्र’ की अखंड ज्योति (Eternal Flame) चौबीसों घंटे जलती रहती है। यह लौ शहीद सैनिकों की अमर आत्मा का प्रतीक है।
  • 2. वीरता चक्र (Circle of Bravery) :– यह दूसरा वृत्त है, जो एक ढकी हुई भूमिगत गैलरी के रूप में बना है। इस चक्र की दीवारों पर भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्धों (जैसे 1947-48 का युद्ध, 1965, 1971, 1999 का कारगिल युद्ध, और सर्जिकल स्ट्राइक) तथा महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों के गौरवमयी इतिहास को कांसे की उत्कृष्ट कलाकृतियों (Bas-Relief Murals) के माध्यम से जीवंत किया गया है।
  • 3. त्याग चक्र (Circle of Sacrifice) :– वीरता चक्र के बाहर स्थित यह तीसरा वृत्त पूरी तरह से शहीदों के सम्मान में समर्पित है। यहाँ ग्रेनाइट पत्थरों की गोलाकार दीवारें बनी हैं, जिन पर सोने के अक्षरों में 26,000 से अधिक शहीद सैनिकों के नाम, उनके रैंक और रेजिमेंट के साथ व्यक्तिगत रूप से लिखे गए हैं। यह पूरी संरचना एक पारंपरिक सैनिक चक्रव्यूह की तरह दिखाई देती है।
  • 4. रक्षक चक्र (Circle of Protection) :– यह सबसे बाहरी वृत्त है जो पेड़ों की एक घनी और कतारबद्ध कंक्रीट की कतार से बना है। इस चक्र में लगे सदाबहार पेड़ देश के नागरिकों की चौबीसों घंटे रक्षा करने वाले सैनिकों के ‘रक्षक कवच’ और अटूट सुरक्षा चक्र को प्रदर्शित करते हैं।
  • परम योद्धा स्थल :– स्मारक परिसर के ठीक बगल में एक विशेष पार्क बनाया गया है, जहाँ भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित सभी 21 वीर योद्धाओं की कांस्य प्रतिमाएं (Statues) उनकी वीरता की कहानियों के साथ स्थापित की गई हैं।

​यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

​यदि आप राष्ट्रीय समर स्मारक के दर्शन करने और देश के वीरों को नमन करने की योजना बना रहे हैं, तो आवश्यक मार्गदर्शिका नीचे दी गई है:

  • टिकट (Entry Fee) :– राष्ट्रीय समर स्मारक में प्रवेश पूरी तरह से नि:शुल्क (Free) है। यहाँ नागरिकों और विदेशी पर्यटकों के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।
  • समय (Visiting Time) :– यह स्मारक सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है। इसके खुलने का समय सुबह 9:00 बजे से रात 8:30 बजे तक (नवंबर से जनवरी के बीच शाम 7:30 बजे तक) होता है। प्रत्येक शाम यहाँ सूर्यास्त के समय एक बेहद भव्य और अनुशासित ‘रिट्रीट सेरेमनी’ (Next-of-Kin Ceremony) और चेंज ऑफ गार्ड की रस्म होती है, जिसे देखना एक अद्भुत अनुभव है।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :– अमर चक्र के मुख्य स्तंभ के साथ जलती हुई लौ का दृश्य, त्याग चक्र की अंतहीन ग्रेनाइट की दीवारें और परम योद्धा स्थल में परमवीर चक्र विजेताओं की लगी कतारबद्ध प्रतिमाएं बेहतरीन फोटोग्राफी स्पॉट्स हैं (परिसर के नियमों और शालीनता का ध्यान रखें)।
  • स्थानीय स्वाद (Local Food) :– स्मारक के ठीक बाहर इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के वेंडिंग ज़ोन हैं। यहाँ आप दिल्ली के प्रसिद्ध चाट-पकोड़े, गोलगप्पे, चुस्की और आइसक्रीम का आनंद ले सकते हैं। दक्षिण भारतीय और उत्तर भारतीय स्वादों के लिए नजदीक ही पंडारा रोड के प्रसिद्ध रेस्तरां मौजूद हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार (Nearby Markets) :– खरीदारी के लिए यहाँ से सबसे नजदीक खान मार्केट और कनॉट प्लेस का जनपथ मार्केट है, जहाँ से आप हस्तशिल्प और ब्रांडेड सामान खरीद सकते हैं।

पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :-

  • मेट्रो द्वारा :– स्मारक का सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘केंद्रीय सचिवालय’ (Central Secretariat) है, जो येलो और वॉयलेट लाइन पर पड़ता है। इसके अलावा वॉयलेट लाइन का ‘खान मार्केट’ स्टेशन भी यहाँ से काफी पास है। मेट्रो स्टेशन से आप पैदल या ई-रिक्शा द्वारा यहाँ मिनटों में पहुँच सकते हैं।
  • बस द्वारा :– दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की इंडिया गेट, पटियाला हाउस या राष्ट्रीय संग्रहालय रूट की बसें आपको स्मारक के बिल्कुल करीब उतारती हैं।
  • हवाई मार्ग द्वारा :– इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI) यहाँ से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
  • रेल मार्ग द्वारा :– नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से यहाँ की दूरी मात्र 4.5 किलोमीटर है और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से यह करीब 5.5 किलोमीटर दूर है।

​आसपास के आकर्षक बिंदु (Nearby Attractions)

  • इंडिया गेट (India Gate) :– राष्ट्रीय समर स्मारक के ठीक सामने स्थित यह भव्य ब्रिटिशकालीन युद्ध स्मारक है, जो इसकी समरूपता को पूरा करता है।
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस की छतरी (Canopy) :– समर स्मारक और इंडिया गेट के बीच स्थित ऐतिहासिक छतरी है, जहाँ नेताजी की भव्य विशाल प्रतिमा स्थापित है।
  • कर्तव्य पथ (Kartavya Path) :– इंडिया गेट से शुरू होकर राष्ट्रपति भवन तक जाने वाला नवनिर्मित शानदार हरित मार्ग है, जो टहलने के लिए बेहतरीन स्थान है।
  • राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) :– जनपथ मार्ग पर स्थित भारत का सबसे बड़ा संग्रहालय है, जहाँ प्राचीन काल की अनमोल ऐतिहासिक धरोहरें सुरक्षित हैं।
  • राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (NGMA) :– कला प्रेमियों के लिए एक मुख्य केंद्र है, जो समर स्मारक के बेहद नजदीक शेरशाह सूरी रोड के कोने पर स्थित है।
  • पुराना किला (Purana Qila) :– यहाँ से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित एक प्राचीन ऐतिहासिक किला है, जहाँ शाम को बेहतरीन लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होता है।

​रोचक तथ्य (Interesting Facts)

  • डिजिटल श्रद्धांजलि की सुविधा :– इस स्मारक परिसर में आगंतुकों के लिए डिजिटल कियोस्क (Digital Kiosks) लगाए गए हैं। आप स्क्रीन पर किसी भी शहीद सैनिक का नाम टाइप करके उनके बलिदान की कहानी पढ़ सकते हैं और उन्हें वर्चुअल श्रद्धांजलि (e-Tribute) दे सकते हैं।
  • वास्तुकला में समरूपता :– इस स्मारक को इस तरह से भूमिगत और सतह के समानांतर डिज़ाइन किया गया है कि यह इंडिया गेट के पारंपरिक दृश्य और सेंट्रल विस्टा की ऐतिहासिक समरूपता में कोई बाधा नहीं डालता।
  • शहीदों के परिजनों द्वारा वंदना :– हर दिन सुबह के समय किसी एक शहीद सैनिक के परिवार के सदस्यों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है, जो मुख्य स्तंभ पर आकर अपने वीर परिजन को पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1: राष्ट्रीय समर स्मारक दिल्ली में कहाँ स्थित है?

उत्तर:– यह स्मारक नई दिल्ली के दिल में, इंडिया गेट के ठीक पीछे ‘प्रिंसेस पार्क’ के सामने सी-हेक्सागन (C-Hexagon) क्षेत्र में स्थित है।

प्रश्न 2:- राष्ट्रीय समर स्मारक का उद्घाटन कब हुआ था?

उत्तर:– इस भव्य स्मारक का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 फरवरी 2019 को किया गया था।

प्रश्न 3: अमर जवान ज्योति को यहाँ कब विलीन किया गया था?

उत्तर:– इंडिया गेट की अमर जवान ज्योति को 21 जनवरी 2022 को पूरे सैन्य सम्मान के साथ राष्ट्रीय समर स्मारक की मुख्य लौ में विलीन किया गया था।

प्रश्न 4: त्याग चक्र पर कितने सैनिकों के नाम लिखे गए हैं?

उत्तर:– त्याग चक्र की दीवारों पर 1947 के बाद से विभिन्न युद्धों और ऑपरेशनों में शहीद हुए 26,000 से अधिक जाँबाज सैनिकों के नाम व्यक्तिगत रूप से स्वर्णिम अक्षरों में लिखे गए हैं।

​लेखक के विचार (Author’s Thoughts)

​राष्ट्रीय समर स्मारक कोई साधारण पर्यटन स्थल नहीं है; यह हमारे देश की आजादी, शांति और संप्रभुता के लिए अपनी जवानी कुर्बान करने वाले वीरों का एक पावन मंदिर है। जब आप ‘त्याग चक्र’ की दीवारों पर लिखे हजारों वीर जवानों के नामों को करीब से देखते हैं, तो आँखों में नमी और दिल में उनके प्रति सम्मान की भावना अपने आप उमड़ पड़ती है। इस परिसर की असीम शांति, चारों तरफ फैली हरियाली और हवा में लहराती मुख्य लौ हमें अहसास कराती है कि हमारी सुरक्षित रातों के पीछे सरहद पर तैनात किसी वीर का सर्वस्व बलिदान छिपा है। हर भारतीय को अपने जीवन में कम से कम एक बार यहाँ आकर देश के इन असली नायकों को सेल्यूट जरूर करना चाहिए।

“ग्रेनाइट के पत्थरों पर स्वर्णिम अक्षरों में लिखे ये नाम महज शब्द नहीं, बल्कि आज़ाद भारत के आसमान पर चमकते शौर्य के अमर सितारे हैं।”

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