
विस्तृत जानकारी (Detailed History)
इंट्राडे ट्रेडिंग का अर्थ है एक ही दिन के भीतर शेयरों को खरीदना और बेचना। इसकी शुरुआत तब से हुई जब शेयर बाजारों ने ‘टी+0′ (T+0) सेटलमेंट या रीयल-टाइम ट्रेडिंग की सुविधा देना शुरू किया। भारत में, सेबी (SEBI) के कड़े नियमों के तहत इसे सुरक्षित बनाया गया है ताकि छोटे निवेशक भी बाजार की दैनिक हलचल से लाभ उठा सकें।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture)
इंट्राडे ट्रेडिंग का मुख्य ढांचा ‘मार्जिन‘ (Margin) और ‘लीवरेज‘ (Leverage) पर टिका होता है। इसमें ब्रोकर आपको आपके पास मौजूद राशि से 5 गुना तक ज्यादा के शेयर खरीदने की सुविधा देता है। इसकी बनावट में ‘कैंडलस्टिक चार्ट‘ (Candlestick Charts) और ‘वॉल्यूम‘ (Volume) का सबसे बड़ा महत्व है। इसमें सौदे को बाजार बंद होने से पहले (जैसे भारत में 3:15 PM तक) काटना अनिवार्य होता है, अन्यथा ब्रोकर इसे अपने आप बेच देता है।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)
इंट्राडे की यात्रा शुरू करने के लिए आपका मार्ग निम्न होना चाहिए।
- डीमैट खाता :– एक विश्वसनीय डिस्काउंट ब्रोकर के पास खाता खोलें।
- वॉचलिस्ट :– कम से कम 5-10 लिक्विड (High Volume) शेयरों की सूची बनाएं।
- समय :– सुबह 9:15 से 10:30 और दोपहर 1:30 से 3:00 बजे का समय सबसे अधिक उतार-चढ़ाव वाला होता है।
- उपकरण :– मूविंग एवरेज (VWAP) और आरएसआई (RSI) जैसे इंडिकेटर्स का उपयोग करें।
Interesting Facts
- इंट्राडे ट्रेडिंग में आप गिरते हुए बाजार से भी ‘शॉर्ट सेलिंग‘ (Short Selling) करके पैसा कमा सकते हैं।
- दुनिया का लगभग 70% से अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम अब इंसानों के बजाय कंप्यूटर एल्गोरिदम (Algo Trading) द्वारा किया जाता है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
प्रश्न 1:- क्या इंट्राडे ट्रेडिंग में रिस्क ज्यादा है?
उत्तर:- हाँ, क्योंकि इसमें समय बहुत कम होता है और बाजार की दिशा किसी भी पल बदल सकती है, इसलिए स्टॉप लॉस का उपयोग अनिवार्य है।
प्रश्न 2:- क्या मैं 1000 रुपये से इंट्राडे शुरू कर सकता हूँ?
उत्तर:- बिल्कुल, आप कम राशि से भी छोटे-छोटे ट्रेड लेकर अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।
“बिना स्टॉप लॉस के इंट्राडे ट्रेडिंग करना, बिना ब्रेक की गाड़ी चलाने जैसा है।”
