
जूनागढ़ किला :- बीकानेर की बेजोड़ विरासत
विस्तृत जानकारी (Detailed History)
राजस्थान के अन्य किलों के विपरीत, जूनागढ़ किला किसी ऊँची पहाड़ी पर नहीं, बल्कि समतल ज़मीन पर बना है। इसे ‘जमीन का जेवर‘ भी कहा जाता है। इसका निर्माण 1589 से 1594 के बीच बीकानेर के राजा रायसिंह ने करवाया था, जो मुगल सम्राट अकबर की सेना में एक उच्च पदस्थ सेनापति थे। इस किले की सबसे खास बात यह है कि इतिहास में कई आक्रमणों के बावजूद इसे कभी कोई बाहरी आक्रमणकारी जीत नहीं पाया। यह किला पहले ‘बीकानेर किला‘ कहलाता था, लेकिन 20वीं सदी में जब शासक नए लालगढ़ महल में रहने चले गए, तो इसे ‘जूनागढ़‘ (पुराना किला) नाम दिया गया।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture)
बाहरी बनावट :– यह किला लाल बलुआ पत्थर और नक्काशीदार संगमरमर से बना है। इसकी बाहरी दीवारें 986 मीटर लंबी हैं और इनमें 37 बुर्ज (bastions) हैं जो सुरक्षा के लिए बनाए गए थे। किले के मुख्य द्वार को ‘करण पोल‘ और ‘सूरज पोल‘ कहा जाता है। सूरज पोल पर राजा रायसिंह की प्रशस्ति (प्रशंसा पत्र) अंकित है।
आंतरिक बनावट :– किले के भीतर के महल अपनी बारीक़ नक्काशी और पेंटिंग्स के लिए विख्यात हैं।
- अनूप महल :– यह सोने की परत के काम (Gold leaf work) और कांच की सजावट के लिए जाना जाता है। इसे बीकानेर के शासकों का राजतिलक कक्ष माना जाता था।
- बादल महल :– इसकी दीवारों पर नीले बादलों और बिजली की चमक के चित्र बने हैं, जो गर्मियों में मानसून का अहसास कराते थे।
- फूल महल :– यहाँ की दीवारों पर फूलों और बेल-बूटों की इतनी बारीक़ नक्काशी है कि यह आज भी ताज़ी लगती है।
- गज मंदिर :– राजा गजसिंह के इस महल में हाथीदांत का काम और सुंदर झरोखे देखने लायक हैं।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)
- टिकट (Ticket) :– भारतीय पर्यटकों के लिए लगभग ₹50, विदेशी पर्यटकों के लिए ₹300। कैमरा और म्यूजियम के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होता है।
- समय (Visiting Time) :– सुबह 10:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक।
- पहुँचने का मार्ग :– बीकानेर रेलवे स्टेशन से किला मात्र 2 किमी की दूरी पर है। आप ऑटो या ई-रिक्शा से आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं। बीकानेर सड़क और रेल मार्ग से जयपुर और दिल्ली से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
- फोटोग्राफी स्पॉट्स :– बादल महल की नीली दीवारें, अनूप महल का स्वर्ण कार्य और किले के प्रवेश द्वार पर स्थित हाथियों की मूर्तियाँ।
- स्थानीय स्वाद :– बीकानेर आएँ और यहाँ की प्रसिद्ध ‘बीकानेरी भुजिया‘, ‘रसगुल्ले‘ और ‘घेवर‘ का स्वाद न लें, यह अधूरा होगा।
- प्रसिद्ध बाज़ार :– ‘कोट गेट‘ बाज़ार यहाँ का सबसे मुख्य बाज़ार है जहाँ से आप ऊँट की खाल से बनी चीज़ें (Usta Art) और राजस्थानी मोजरी खरीद सकते हैं।
लेखक के विचार (Author’s Perspective) :-
जूनागढ़ किला अपनी आंतरिक साज-सज्जा के मामले में राजस्थान के अन्य किलों से कहीं आगे है। जहाँ अन्य किले युद्ध और शक्ति के प्रतीक लगते हैं, जूनागढ़ अपनी कलात्मकता और विलासिता से मंत्रमुग्ध कर देता है। यहाँ का संग्रहालय भारत के सबसे व्यवस्थित संग्रहालयों में से एक है, जहाँ प्रथम विश्व युद्ध का एक पुराना विमान (DH-9 DE Havilland) आज भी संरक्षित है, जिसे देखना एक अनूठा अनुभव है।
Interesting Facts
- जूनागढ़ किले के अंदर एक बहुत पुराना ‘लिफ्ट‘ लगा हुआ है, जो उस समय की आधुनिकता को दर्शाता है।
- किले के भीतर ‘गंगा निवास‘ हॉल की छत पर लकड़ी की नक्काशी का ऐसा काम है जो बिना किसी कील के टिका हुआ है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
प्रश्न 1:- जूनागढ़ किले का पुराना नाम क्या था?
उत्तर:- इसे पहले ‘बीकानेर किला‘ के नाम से जाना जाता था।
प्रश्न 2:- इस किले को ‘जमीन का जेवर’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:- क्योंकि यह समतल भूमि पर स्थित है और अपनी वास्तुकला की सुंदरता के कारण गहने के समान चमकता है।
“मरुस्थल की रेत पर नक्काशी का जादू देखना हो, तो जूनागढ़ ज़रूर आएँ।”
