
नया संसद भवन, दिल्ली :- नए भारत की आत्मनिर्भरता और आधुनिक लोकतंत्र का गौरवशाली प्रतीक
विस्तृत जानकारी (Detailed History)
नई दिल्ली के सेंट्रल विस्टा (Central Vista) क्षेत्र के केंद्र में स्थित ‘नया संसद भवन’ (New Parliament House) 21वीं सदी के बदलते, बढ़ते और आत्मनिर्भर भारत की सबसे भव्य पहचान है। यह ऐतिहासिक इमारत केवल देश का नया विधायी केंद्र नहीं है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत‘ के संकल्प और हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा संगम है। पुराने संसद भवन (संविधान सदन) की बढ़ती उम्र, स्थान की कमी और आधुनिक तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक नए और अत्याधुनिक भवन की आवश्यकता महसूस की गई। इसी उद्देश्य के साथ 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस नए भवन का शिलान्यास किया गया।
इस भव्य और विशाल इमारत का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया और 28 मई 2023 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह नया संसद भवन भारत सरकार के ‘सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास पुनरुत्थान परियोजना‘ (Central Vista Redevelopment Project) का एक मुख्य हिस्सा है। इस शानदार इमारत का डिजाइन भारत के विख्यात आर्किटेक्ट डॉ. बिमल पटेल और उनकी फर्म ‘एचसीपी डिजाइन‘ (HCP Design) द्वारा तैयार किया गया है, जबकि इसका निर्माण ‘टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड‘ द्वारा किया गया है। इस नए भवन की सबसे बड़ी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषता इसके भीतर स्थापित पवित्र ‘सेंगोल’ (Sengol) है, जो चोल साम्राज्य की न्यायपूर्ण और धर्मपरायण शासन परंपरा का प्रतीक है और जिसे लोकसभा अध्यक्ष के आसन के ठीक बगल में स्थापित किया गया है।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture) :-
नया संसद भवन वास्तुकला और आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ उदाहरण है। इसकी बनावट में जहां एक ओर अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, वहीं दूसरी ओर भारत के कोने-कोने की पारंपरिक कला और शिल्पकला को इसके भीतर जीवंत किया गया है।
- बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :– पुराने संसद भवन के विपरीत, नया संसद भवन पूरी तरह से त्रिकोणीय (Triangular) आकार में बना है। इस त्रिकोणीय डिजाइन को भूखंड के आकार के इष्टतम उपयोग और ‘पवित्र ज्यामिति’ (Sacred Geometry) के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह इमारत लगभग 64,500 वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्र में फैली हुई है और यह चार मंजिला है। इसकी बाहरी दीवारों पर धौलपुर के उत्तम लाल और हल्के पीले बलुआ पत्थरों (Sandstone) की नक्काशीदार जालियाँ लगाई गई हैं, जो इसे लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक परिवेश के साथ जोड़ती हैं। भवन के शीर्ष पर स्थापित ‘राष्ट्रीय प्रतीक’ (National Emblem)—चार शेरों की विशाल कांस्य मूर्ति (Ashoka Lat) इसकी भव्यता और संप्रभुता को और बढ़ाती है।
- आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :– इस नए भवन की आंतरिक बनावट बेहद विहंगम है, जिसमें देश के राष्ट्रीय प्रतीकों को तीन मुख्य कक्षों के डिजाइनों में ढाला गया है:
- लोकसभा कक्ष (Lok Sabha Chamber) :– यह कक्ष भारत के राष्ट्रीय पक्षी ‘मोर’ (Peacock) की थीम पर आधारित है। इसकी दीवारों और छतों पर मोर के पंखों जैसी सुंदर हरी नक्काशी और कालीन बिछाए गए हैं। इसमें कुल 888 सदस्यों के बैठने की विशाल व्यवस्था है।
- राज्यसभा कक्ष (Rajya Sabha Chamber) :– यह कक्ष भारत के राष्ट्रीय फूल ‘कमल’ (Lotus) की थीम पर डिज़ाइन किया गया है। इसमें लाल-लाल रंगों की शाही आभा और कमल के रूपांकनों का प्रयोग किया गया है। इसमें 384 सदस्यों के बैठने की क्षमता है।
- संवैधानिक हॉल (Constitution Hall) :– भवन के केंद्र में एक विशाल संवैधानिक हॉल बनाया गया है, जो भारतीय लोकतंत्र की यात्रा और हमारे संविधान की महत्ता को अत्याधुनिक डिजिटल माध्यमों और शिल्पकला के जरिए प्रदर्शित करता है। इसके अलावा, पूरे परिसर के भीतर देश के अलग-अलग हिस्सों की कलाकृतियां (जैसे राजस्थान के पत्थर, मिर्जापुर के कालीन और त्रिपुरा के बांस के काम) सजाई गई हैं।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)
नया संसद भवन नई दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण और अति-सुरक्षित प्रशासनिक क्षेत्र ‘संसद मार्ग’ (Parliament Street) पर पुराने संसद भवन के ठीक सामने स्थित है। यहाँ आने के लिए आवश्यक गाइड नीचे दी गई है।
- प्रवेश टिकट और अनुमति (Entry Ticket & Admission) :– देश का सर्वोच्च विधायी केंद्र होने के कारण नए संसद भवन के भीतर आम नागरिकों और पर्यटकों का सीधे प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। हालांकि, आप इसके बाहरी परिसर की भव्यता को बाहर की मुख्य सड़क से देख सकते हैं। यदि कोई नागरिक संसद सत्र के दौरान लोकसभा या राज्यसभा की कार्यवाही देखना चाहता है, तो उसे एक वैध पहचान पत्र के साथ किसी सांसद (MP) के संदर्भ द्वारा या संसदीय सचिवालय से विशेष ‘विज़िटर पास’ (Official Visitor Pass) के लिए आवेदन करना होता है।
- समय (Visiting Timings) :– इस वीआईपी क्षेत्र और इसके बाहरी रास्तों को देखने और वास्तुकला की तस्वीरें लेने का सबसे अच्छा समय सुबह 09:00 बजे से शाम 05:00 बजे के बीच का है। संसद के चारों ओर सुरक्षा बेहद कड़ी रहती है।
- पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :–
- मेट्रो द्वारा :– यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी और सुविधाजनक मेट्रो स्टेशन ‘केंद्रीय सचिवालय’ (Central Secretariat) है, जो येलो लाइन और वायलेट लाइन का एक प्रमुख इंटरचेंज स्टेशन है। इसके अलावा ‘उद्योग भवन’ (Udyog Bhawan) मेट्रो स्टेशन भी बेहद पास है। मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलकर संसद भवन मात्र 5 मिनट की पैदल दूरी पर है।
- बस द्वारा :– केंद्रीय दिल्ली और राष्ट्रपति भवन की ओर जाने वाली दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसें आपको ‘संसद भवन’ या ‘कृषि भवन’ बस स्टॉप पर उतारेंगी, जो इस परिसर के ठीक पास हैं।
- ऑटो/कैब :– कनॉट प्लेस, इंडिया गेट या नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से आप सीधे ऑटो या कैब करके मात्र 5 से 10 मिनट में यहाँ पहुँच सकते हैं।
आसपास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions) :-
- पुराना संसद भवन (संविधान सदन) :– नए भवन के ठीक सामने स्थित भारत की वह ऐतिहासिक धरोहर, जिसने आजाद भारत के जन्म और संविधान के निर्माण को अपनी आँखों से देखा है।
- राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) :– भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास स्थान, जो अपनी विशालता और राजसी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और यहाँ से थोड़ी ही दूरी पर है।
- कर्तव्य पथ और इंडिया गेट (Kartavya Path & India Gate) :– हाल ही में पुनर्विकसित किया गया देश का सबसे प्रमुख और खूबसूरत मार्ग, जो शाम के समय टहलने और फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन जगह है।
- राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) :– भारत के प्राचीन इतिहास, मूर्तियों और कलाकृतियों का सबसे बड़ा संग्रह केंद्र, जो जनपथ रोड पर पास ही स्थित है।
- जंतर मंतर (Jantar Mantar) :– महाराजा जयसिंह द्वारा निर्मित एक ऐतिहासिक खगोलीय वेधशाला, जो संसद मार्ग पर ही थोड़ी दूरी पर स्थित है।
फोटोग्राफी, स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार (Lifestyle Guide) :-
- फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :– नए संसद भवन की त्रिकोणीय आधुनिक संरचना और इसके शीर्ष पर लगे विशाल ‘राष्ट्रीय प्रतीक‘ (Ashoka Lat) को विजय चौक (Vijay Chowk) से या कर्तव्य पथ की ओर जाने वाले रास्तों से फ्रेम करना एक बेहतरीन और गर्व से भर देने वाली तस्वीर देता है। (ध्यान दें: यह एक अत्यधिक संवेदनशील वीआईपी क्षेत्र है, इसलिए सुरक्षा बलों के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। बैरिकेड्स और संवेदनशील द्वारों के पास फोटोग्राफी पूरी तरह से वर्जित है)।
- स्थानीय स्वाद (Local Taste) :– संसद के आसपास के सरकारी कार्यालयों के क्षेत्रों में मिलने वाली कड़क चाय और समोसे बहुत लोकप्रिय हैं। इसके अलावा भोजन के शौकीन पास के ‘कनॉट प्लेस’ के प्रसिद्ध रेस्तरां या बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्थित विभिन्न राज्यों के भवनों की कैंटीन (जैसे आंध्र भवन या महाराष्ट्र सदन) में जाकर बेहतरीन क्षेत्रीय व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं।
- प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Markets) :– खरीदारी के लिए पास ही स्थित ‘कनॉट प्लेस’, ‘जनपथ मार्केट’ और ‘पालिका बाजार’ सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय विकल्प हैं, जहाँ से आप हस्तशिल्प, पारंपरिक कपड़े और बेहतरीन किताबें खरीद सकते हैं।
रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-
- नए संसद भवन का त्रिकोणीय आकार ‘पवित्र ज्यामिति’ (Sacred Geometry) और त्रिकोण की मजबूती से प्रेरित है। विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों में त्रिकोण को ऊर्जा, संतुलन और प्रगति का प्रतीक माना जाता है।
- इस नए भवन के निर्माण में संपूर्ण भारत की झलक देखने को मिलती है—इसके लिए सागवान की लकड़ी मध्य प्रदेश के बैतुल से, लाल और सफेद बलुआ पत्थर राजस्थान के धौलपुर और सरमथुरा से, कालीन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से और बांस की लकड़ी त्रिपुरा से मंगवाई गई थी। इसी वजह से इसे ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सच्चा प्रतीक माना जाता है।
- नए लोकसभा कक्ष की एक अनूठी विशेषता यह है कि संयुक्त सत्र (Joint Session) के दौरान इसमें 1,272 से अधिक सदस्यों के बैठने की व्यवस्था की जा सकती है, जिससे भविष्य में सीटों के परिसीमन (Delimitation) के बाद भी जगह की कोई कमी नहीं होगी।
- यह पूरी इमारत पूरी तरह से ‘हरित भवन’ (Green Building) के रूप में डिजाइन की गई है, जो पर्यावरण के अनुकूल है और बिजली व पानी की भारी बचत करती है। साथ ही यह दिल्ली के उच्च भूकंपीय क्षेत्र को देखते हुए भूकंप-रोधी (Zone-5 रेजिलिएंट) तकनीक से बनाई गई है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
प्रश्न 1:– नए संसद भवन का उद्घाटन कब और किसके द्वारा किया गया था?
उत्तर:- नए संसद भवन का भव्य उद्घाटन 28 मई 2023 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।
प्रश्न 2:- नए संसद भवन का आकार कैसा है और इसके मुख्य आर्किटेक्ट कौन हैं?
उत्तर:- नए संसद भवन का आकार त्रिकोणीय (Triangular) है। इस आधुनिक और भव्य इमारत का डिजाइन देश के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट डॉ. बिमल पटेल द्वारा तैयार किया गया है।
प्रश्न 3:– नए संसद भवन के भीतर स्थापित ‘सेंगोल’ (Sengol) क्या है?
उत्तर:- ‘सेंगोल’ एक पवित्र राजदंड है जो भारत की प्राचीन चोल साम्राज्य की परंपरा से जुड़ा है। यह न्यायपूर्ण शासन, कर्तव्यपरायणता और सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक है, जिसे नए लोकसभा अध्यक्ष के आसन के बगल में स्थापित किया गया है।
लेखक के विचार (Author’s Thoughts) :-
नए संसद भवन के सामने खड़े होना एक नए, सशक्त और गौरवशाली भारत की दहलीज पर खड़े होने जैसा है। जहां हमारा पुराना संसद भवन औपनिवेशिक काल की यादों और हमारी शुरुआती लोकतांत्रिक यात्रा का गवाह था, वहीं यह नया त्रिकोणीय भवन हमारे अपने पसीने, हमारी अपनी कला और हमारे अपने संकल्पों से निर्मित आत्मनिर्भर भारत का जीवंत दस्तावेज़ है। मोर की थीम पर सजा लोकसभा कक्ष और कमल की आभा से दमकता राज्यसभा कक्ष यह अहसास कराता है कि हम आधुनिक जरूर हो रहे हैं, लेकिन हमारी जड़ें आज भी हमारी संस्कृति में गहराई से जुड़ी हैं। यह इमारत केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं है; यह आने वाले सैकड़ों सालों तक दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के स्वर्णिम भविष्य की नीतियां लिखने वाला नया ‘शब्द-तीर्थ’ है।
“नया संसद भवन स्वतंत्र और आत्मनिर्भर भारत के उस अटूट आत्मसम्मान की कहानी है, जिसने अपनी कला और तकनीक से 21वीं सदी का नया इतिहास लिखा है।”
