बांदा जिला

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित ‘बांदा’ एक अत्यंत प्राचीन, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर है। केन नदी के तट पर बसे इस शहर का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस क्षेत्र का नाम प्रसिद्ध महर्षि वामदेव के नाम पर पड़ा था, जिन्होंने यहाँ एक गुफा में कठोर तपस्या की थी। बांदा का सबसे बड़ा ऐतिहासिक गौरव यहाँ से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित कालिंजर का किला (Kalinjar Fort) है, जो विंध्याचल की पहाड़ियों पर बना हुआ है।

ऐतिहासिक राजवंश और महत्व :

कालिंजर किले और बांदा क्षेत्र पर नौवीं से पंद्रहवीं शताब्दी तक चंदेल राजपूत शासकों का राज रहा, जिन्होंने खजुराहो के मंदिरों का भी निर्माण कराया था। यह किला इतिहास में अपनी अभेद्यता के लिए जाना जाता था, जिसे जीत पाना बड़े-से-बड़े आक्रमणकारियों के लिए असंभव था। सन 1545 में सूर साम्राज्य के संस्थापक शेरशाह सूरी ने इस किले पर कब्जा करने के लिए घेराबंदी की थी, लेकिन एक ‘उक्का’ (आग्नेयास्त्र/बारूद का गोला) किले की दीवार से टकराकर वापस बारूद के ढेर पर गिर गया, जिससे हुए विस्फोट में शेरशाह सूरी की यहीं मृत्यु हो गई थी। बाद में यह क्षेत्र बुंदेला राजा छत्रसाल के अधीन आया और मराठा पेशवाओं के दौर से गुजरते हुए ब्रिटिश काल में एक प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बना। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1857 की क्रांति में भी बांदा के नवाब अली बहादुर द्वितीय ने सक्रिय भूमिका निभाई थी

​बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

​बांदा और उसके आसपास की वास्तुकला मुख्य रूप से मध्यकालीन चंदेल शैली, बुंदेली स्थापत्य कला और सैन्य दुर्ग निर्माण कला का एक बेजोड़ उदाहरण है।

बाहरी और आंतरिक बनावट:-


कालिंजर दुर्ग की बाहरी बनावट:- यह किला समुद्र तल से लगभग 1200 फीट की ऊंचाई पर एक अलग पहाड़ी पर बना हुआ है। इसकी बाहरी दीवारें विशाल और बेहद चौड़े ग्रेनाइट व लाल बलुआ पत्थरों को आपस में जोड़कर बनाई गई हैं। किले में प्रवेश करने के लिए सात विशाल दरवाजे बने हैं, जिन्हें सिंह द्वार, गणेश द्वार, चंडी द्वार, बुद्ध द्वार, हनुमान द्वार, लाल द्वार और बड़ा दरवाजा कहा जाता है। यह पूरी बनावट इस तरह तैयार की गई थी कि दुश्मन की सेना चाहकर भी मुख्य परिसर तक न पहुँच सके
आंतरिक बनावट और नीलकंठ मंदिर :-

किले के भीतर की आंतरिक बनावट में कई महल, तालाब और मंदिर शामिल हैं। इसका सबसे खास हिस्सा ‘नीलकंठ मंदिर’ है, जिसे चंदेल शासक परमार्दिदेव ने बनवाया था। मंदिर के गर्भगृह में चट्टान को काटकर बनाई गई भगवान शिव की एक विशाल नीले पत्थर की मूर्ति है, जिसके चौदह हाथ हैं। मंदिर की दीवारों और खंभों पर देवी-देवताओं, अप्सराओं और मिथुन आकृतियों की बेहद बारीक और सजीव नक्काशी की गई है, जो चंदेल कला की भव्यता को दर्शाती है। इसके अलावा किले के अंदर ‘कोटि तीर्थ’ नामक जलाशय और ‘रानी महल’ की आंतरिक नक्काशी देखने योग्य है।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)


बांदा और कालिंजर की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने के लिए यात्रा गाइड और पहुँचने के मार्ग की पूरी जानकारी नीचे दी गई है।


प्रवेश टिकट और समय:


टिकट:- बांदा शहर के सामान्य स्थलों के लिए कोई टिकट नहीं है। कालिंजर किले (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित) में प्रवेश के लिए भारतीय नागरिकों का टिकट लगभग 25 रुपये और विदेशी नागरिकों के लिए यह लगभग 300 रुपये है।
समय: कालिंजर किला और नीलकंठ मंदिर प्रतिदिन सुबह 06:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है।
पहुँचने का मार्ग:
हवाई मार्ग द्वारा:– सबसे नजदीकी हवाई अड्डा खजुराहो (लगभग 100 किमी) और कानपुर (लगभग 130 किमी) है। वहाँ से बांदा के लिए सीधी टैक्सियाँ और बसें आसानी से मिल जाती हैं।
रेल मार्ग द्वारा:- ‘बांदा रेलवे स्टेशन’ (BNDA) एक प्रमुख जंक्शन है, जो उत्तर मध्य रेलवे के अंतर्गत आता है। यह स्टेशन दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद (प्रयागराज), झांसी और जबलपुर जैसे बड़े शहरों से सीधी ट्रेनों (जैसे संपर्क क्रांति एक्सप्रेस) द्वारा बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। स्टेशन से स्थानीय परिवहन के लिए ऑटो और ई-रिक्शा हमेशा उपलब्ध रहते हैं।
सड़क मार्ग द्वारा:- बांदा राष्ट्रीय राजमार्ग 35 (NH-35) पर स्थित है। कानपुर से बांदा की सड़क कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है और राज्य परिवहन (UPSRTC) की बसें नियमित रूप से चलती हैं। आप अपनी गाड़ी या टैक्सी से भी बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उपयोग करके यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं।
फोटोग्राफी स्पॉट्स:
कालिंजर किले के झरोखे:- यहाँ से नीचे फैले बुंदेलखंड के मैदानों और गांवों का विहंगम नजारा दिखता है, जो विशेषकर सूर्योदय के समय फोटोग्राफी के लिए सबसे उत्तम है।
केन नदी का तट: शाम के समय केन नदी के पुल या घाट से सूर्यास्त का दृश्य कैमरे में कैद करने लायक होता है।
स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार:-
स्थानीय स्वाद:- बांदा में बुंदेलखंडी स्वाद का प्रभाव है। यहाँ की ‘बेड़मी पूड़ी’ और ‘मट्ठा आलू’ का नाश्ता बेहद चाव से खाया जाता है। इसके अलावा स्थानीय मिठाई की दुकानों पर मिलने वाला दूध का पेड़ा भी बहुत स्वादिष्ट होता है।
प्रसिद्ध बाज़ार:–  बांदा का ‘चौक बाजार’ और ‘बाबूलाल चौराहा’ मुख्य व्यापारिक केंद्र हैं। यहाँ से आप बुंदेलखंड के पारंपरिक हस्तशिल्प और कपड़े खरीद सकते हैं।
रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-
शजर पत्थर (Shajar Stone):- बांदा पूरी दुनिया में अपने दुर्लभ शजर पत्थर (Dendritic Agate) के लिए प्रसिद्ध है, जो केवल यहाँ की केन नदी में पाया जाता है। इस प्राकृतिक पत्थर की खासियत यह है कि इसके अंदर पेड़-पौधों, पत्तियों और प्राकृतिक दृश्यों की खूबसूरत आकृतियां अपने आप उभरी हुई दिखाई देती हैं। इसे ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत विशेष बढ़ावा दिया गया है।

भगवान शिव का विषपान स्थल:- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने विषपान किया था, तब उन्होंने अपने कंठ की जलन को शांत करने के लिए इसी कालिंजर पहाड़ी पर विश्राम किया था, इसीलिए यहाँ नीलकंठ मंदिर स्थापित है।
अजेय दुर्ग:- इतिहास में महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक और हुमायूं जैसे शक्तिशाली शासकों ने कालिंजर किले पर आक्रमण किए, लेकिन वे इसके मुख्य परकोटे को कभी पूरी तरह भेद नहीं पाए।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-


प्रश्न 1:- बांदा शहर किस नदी के किनारे बसा हुआ है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर:- बांदा शहर केन नदी (Ken River) के किनारे बसा हुआ है। यह शहर अपने ऐतिहासिक कालिंजर किले और दुनिया के दुर्लभ ‘शजर पत्थर’ (Shajar Stone) के शिल्प के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।


प्रश्न 2:- कालिंजर का किला बांदा से कितनी दूर है और इसका निर्माण किसने कराया था?
उत्तर:- कालिंजर का किला बांदा जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित है। इस भव्य और अभेद्य किले का अधिकांश विकास नौवीं शताब्दी के दौरान चंदेल राजपूत शासकों द्वारा कराया गया था।


प्रश्न 3:- इतिहास के किस प्रसिद्ध शासक की मृत्यु कालिंजर किले के अभियान के दौरान हुई थी?
उत्तर:- सन 1545 में सूर साम्राज्य के संस्थापक शेरशाह सूरी की मृत्यु कालिंजर किले पर आक्रमण के दौरान एक बारूद विस्फोट (उक्का नामक आग्नेयास्त्र फटने) के कारण हुई थी।


प्रश्न 4:- बांदा के केन नदी में मिलने वाले ‘शजर पत्थर’ की क्या विशेषता है?
उत्तर:- शजर पत्थर एक बहुमूल्य एगेट पत्थर है, जिसमें प्राकृतिक रूप से जंगलों, पेड़ों और पत्तों के चित्र उभरे होते हैं। यह पत्थर पूरी दुनिया में सिर्फ केन नदी की तलहटी में ही पाया जाता है।


“केन नदी के आंचल में छिपे शजर पत्थरों की प्राकृतिक कारीगरी और कालिंजर की अभेद्य दीवारों में दफन इतिहास की गूंज ही बांदा की असली पहचान है।”

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