भूल भूलैया, दिल्ली

दिल्ली का अनसुना रहस्य

दिल्ली का अनसुना रहस्य :- भूल भुलैया (अधम खान का मकबरा) का इतिहास और यात्रा गाइड

​विस्तृत जानकारी (Detailed History)

जब भी ‘भूल भुलैया‘ का नाम लिया जाता है, तो लोगों के दिमाग में तुरंत लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा आता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि देश की राजधानी दिल्ली के महरौली इलाके में भी सदियों पुरानी एक ऐतिहासिक ‘भूल भुलैया’ (Bhool Bhulaiya) मौजूद है। इतिहास के पन्नों में इसे ‘अधम खान का मकबरा’ (Tomb of Adham Khan) के नाम से जाना जाता है। इस इमारत का निर्माण सन 1562 में मुग़ल सम्राट अकबर ने करवाया था।

अधम खान, अकबर की धाय माँ (दूध पिलाने वाली माँ) माहम अंगा का बेटा था और अकबर की सेना में एक सेनापति था। अधम खान स्वभाव से बेहद क्रूर और घमंडी था। सन 1562 में सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई में अधम खान ने अकबर के पसंदीदा प्रधानमंत्री अतगा खान की सरेआम हत्या कर दी। इस बात से क्रोधित होकर युवा सम्राट अकबर ने अधम खान को अपने महल (आगरा किला) की छत से दो बार नीचे फिकवा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत के सदमे में माहम अंगा ने भी चालीस दिनों के भीतर दम तोड़ दिया। अकबर ने अपनी धाय माँ के प्रति सम्मान दिखाते हुए इस स्थान पर अधम खान और माहम अंगा दोनों को एक साथ दफनाया और इस भव्य मकबरे का निर्माण करवाया। इसके गलियारों की जटिल बनावट के कारण लोग अक्सर यहाँ रास्ता भटक जाते थे, जिसके कारण स्थानीय लोगों ने इसका नाम ‘भूल भुलैया’ रख दिया।

​बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

​महरौली की यह भूल भुलैया पारंपरिक मुग़ल वास्तुकला से बिल्कुल अलग है। यह लोधी और सूरी राजवंश के अष्टकोणीय (Octagonal) स्थापत्य कला के पैटर्न पर बनी हुई है, जो मुग़ल काल में बहुत कम देखने को मिलती है।

​बाहरी बनावट (Exterior Architecture)

​यह पूरी इमारत एक बहुत ऊंचे अष्टकोणीय चबूतरे पर खड़ी है। मकबरे के चारों ओर आठ कोने हैं और प्रत्येक तरफ तीन खूबसूरत मेहराबदार प्रवेश द्वार (Arches) बने हुए हैं। इमारत के ऊपर एक विशाल मुख्य गुंबद है, जो दूर से ही दिखाई देता है। इसके चारों ओर बने बरामदे और छज्जे इसे एक किले जैसा रूप देते हैं। ब्रिटिश काल में इस इमारत का स्वरूप काफी खराब कर दिया गया था; एक समय तो इसे अंग्रेजों ने अपने रहने का बंगला बना लिया था और बाद में इसे एक डाक बंगले और पुलिस स्टेशन के रूप में भी इस्तेमाल किया गया। लॉर्ड कर्जन के समय इसे दोबारा खाली कराकर इसके मूल रूप में बहाल किया गया।

आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :-

​मकबरे के भीतर जाने पर एक विशाल केंद्रीय कक्ष दिखाई देता है, जहाँ अधम खान की मज़ार (कब्र) स्थित है (हालांकि ब्रिटिश काल में कब्र को हटा दिया गया था, जिसे बाद में दोबारा स्थापित किया गया)। इस इमारत को ‘भूल भुलैया’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके अष्टकोणीय बरामदों और मोटी दीवारों के भीतर बनी सीढ़ियों का ढांचा बेहद जटिल है। यदि कोई व्यक्ति इसके ऊपरी छज्जों और गलियारों में गाइड के बिना घूमता है, तो वह इसकी एक जैसी दिखने वाली दीवारों और मोड़ों के कारण भ्रमित हो जाता है कि वह किस रास्ते से अंदर आया था। इसके गुंबद के नीचे खड़े होकर आवाज़ लगाने पर एक खास गूंज सुनाई देती है।

​यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

  • टिकट और प्रवेश शुल्क :– दिल्ली की भूल भुलैया (अधम खान का मकबरा) में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क (Free) है। यहाँ कोई टिकट नहीं लगता।
  • जाने का समय और दिन :– यह ऐतिहासिक स्थल सप्ताह के सभी सात दिन खुला रहता है।
  • खुलने और बंद होने का समय :– सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक (सूर्योदय से सूर्यास्त तक)।
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :
    • मेट्रो द्वारा :– यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन येलो लाइन पर स्थित ‘महरौली’ (Mehrauli) या ‘कुतुब मीनार’ (Qutub Minar) है। मेट्रो स्टेशन से यह मकबरा पैदल दूरी पर या 5 मिनट के ई-रिक्शा के रास्ते पर स्थित है।
    • सड़क मार्ग और बस द्वारा :– यह मकबरा महरौली बस टर्मिनल के ठीक सामने स्थित है। दिल्ली के किसी भी हिस्से से महरौली के लिए सीधी बसें, ऑटो या कैब आसानी से मिल जाती हैं।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स :– मकबरे का ऊंचा अष्टकोणीय अग्रभाग, इसके मेहराबों से छनकर आती धूप, और यहाँ से दिखने वाला कुतुब मीनार का नज़ारा बेहतरीन फोटोग्राफी स्पॉट्स हैं।
  • स्थानीय स्वाद (Local Food) :– महरौली के स्थानीय बाज़ार में आपको दिल्ली के पारंपरिक चाट, समोसे, और मुगलाई कबाब का स्वाद चखने को मिलेगा। पास ही में कई आधुनिक कैफे और रूफटॉप रेस्टोरेंट्स भी हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार (Nearby Markets) :– इसके ठीक बगल में ‘महरौली मुख्य बाज़ार’ है जो अपनी पारंपरिक दुकानों के लिए जाना जाता है। इसके अलावा थोड़ी दूरी पर साकेत के बड़े मॉल्स स्थित हैं।

​आस-पास के आकर्षक बिंदु (Nearby Attractions)

महरौली ऐतिहासिक स्मारकों का गढ़ है, इसलिए भूल भुलैया देखने के साथ आप इन जगहों पर भी जा सकते हैं।

  • कुतुब मीनार परिसर :– यह विश्व प्रसिद्ध मीनार भूल भुलैया से मात्र कुछ ही सौ मीटर की दूरी पर स्थित है।
  • महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क (Mehrauli Archaeological Park) :– यहाँ जमाली-कमाली मस्जिद, राजों की बाओली और बलबन का मकबरा जैसी 100 से अधिक ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं।
  • जहाज महल और हौज़-ए-शम्सी :– सिकंदर लोधी के काल का यह खूबसूरत महल और विशाल तालाब भी पास ही स्थित है।
  • योगमाया मंदिर :– यह दिल्ली के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है, जो महाभारत कालीन माना जाता है।

​लेखक के विचार (Author’s Perspective)

​दिल्ली की भूल भुलैया सिर्फ एक मकबरा नहीं है, बल्कि यह अकबर के न्याय और इतिहास की एक दर्दनाक दास्तान की गवाह है। जहाँ एक तरफ लोग कुतुब मीनार की भव्यता देखने आते हैं, वहीं इसके ठीक सामने स्थित यह शांत और थोड़ा उपेक्षित स्मारक अपने भीतर एक अलग ही रहस्य समेटे हुए है। आज यह जगह महरौली के स्थानीय लोगों के लिए शाम को बैठने का एक पार्क बन गई है, लेकिन जब आप इसकी सूनी मेहराबों के बीच खड़े होते हैं, तो इतिहास की गूंज साफ महसूस होती है। यदि आप दिल्ली के किसी ऐसे ऐतिहासिक कोने को तलाश रहे हैं जो भीड़भाड़ से दूर हो और जहाँ एक अनसुनी कहानी छिपी हो, तो आपको महरौली की इस भूल भुलैया को अपनी लिस्ट में ज़रूर शामिल करना चाहिए।

​रोचक तथ्य (Interesting Facts)

  • अकबर का कड़ा न्याय :– यह मकबरा मुग़ल सम्राट अकबर के उस सख्त न्याय का प्रतीक है, जहाँ उन्होंने अपनी सगी धाय माँ के बेटे को भी हत्या के जुर्म में मौत की सजा देने में संकोच नहीं किया।
  • अष्टकोणीय बनावट का रहस्य :– मुग़ल काल में अष्टकोणीय (8 कोनों वाले) मकबरे आमतौर पर उन लोगों के बनाए जाते थे जिन्हें गद्दार या बागी माना जाता था, ताकि वे शाही मुग़ल वास्तुकला (चारकोणीय या वर्गाकार) से अलग दिखें।
  • डाक बंगला और पुलिस स्टेशन :– ब्रिटिश शासन के दौरान एक अंग्रेज अधिकारी ने इस मकबरे के भीतर की कब्रों को खोदकर फेंक दिया था और इसे अपना डाइनिंग हॉल बना लिया था। बाद में यह पुलिस स्टेशन भी रहा।
  • डरावनी कहानियाँ :– स्थानीय लोगों में यह अफवाह भी थी कि इसके भूलभुलैया वाले रास्तों में एक बार पूरी बारात खो गई थी, जिसके बाद से इसके कुछ अंदरूनी रास्तों को बंद कर दिया गया था।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1: दिल्ली की भूल भुलैया का असली नाम क्या है और यह कहाँ है?

उत्तर:- दिल्ली की भूल भुलैया का असली नाम ‘अधम खान का मकबरा’ है। यह दक्षिण दिल्ली के महरौली क्षेत्र में महरौली बस टर्मिनल के पास स्थित है।

प्रश्न 2: इस इमारत को भूल भुलैया क्यों कहा जाता है?

उत्तर:- इसके अष्टकोणीय बरामदों, छज्जों और दीवारों के भीतर बनी सीढ़ियों का जाल इतना उलझा हुआ है कि लोग इसमें आसानी से दिशा का भ्रम खो देते थे, इसलिए इसे भूल भुलैया कहा जाने लगा।

प्रश्न 3:- अधम खान कौन था और उसका मकबरा अकबर ने क्यों बनवाया?

उत्तर:- अधम खान अकबर की धाय माँ माहम अंगा का बेटा था। उसने अकबर के प्रधानमंत्री की हत्या कर दी थी, जिसके बदले अकबर ने उसे मृत्युदंड दिया और बाद में उसकी माँ और उसकी याद में यह मकबरा बनवाया।

प्रश्न 4: क्या दिल्ली की भूल भुलैया देखने के लिए कोई गाइड की ज़रूरत होती है?

उत्तर:- लखनऊ की भूल भुलैया जितनी बड़ी न होने के कारण यहाँ आधिकारिक गाइड की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन इसके कुछ ऊपरी रास्तों पर सुरक्षा कारणों से अब जाने की मनाही है।

“इतिहास के पन्नों में दफन यह वो भूल भुलैया है, जहाँ रास्ते नहीं, बल्कि मुग़ल सल्तनत के कई गहरे राज खो गए थे।”

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