राष्ट्रपति भवन, दिल्ली

भारत के लोकतंत्र का गौरव और स्थापत्य कला का शिखर

राष्ट्रपति भवन :- भारत के लोकतंत्र का गौरव और स्थापत्य कला का शिखर

दिल्ली के केंद्र में स्थित रायसिना हिल पर शान से खड़ा ‘राष्ट्रपति भवन’ (Rashtrapati Bhavan) सिर्फ भारत के प्रथम नागरिक का आधिकारिक निवास नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के गौरव, लोकतंत्र और अद्वितीय वास्तुकला का सबसे बड़ा प्रतीक है। 130 हेक्टेयर (330 एकड़) के विशाल क्षेत्र में फैला यह महल दुनिया के सबसे बड़े आधिकारिक आवासों में से एक है। आज इस विस्तृत ब्लॉग के माध्यम से हम भारत की इस सबसे प्रतिष्ठित इमारत के इतिहास, इसकी बेजोड़ बनावट और इससे जुड़े हर खास पहलू की सैर करेंगे।

विस्तृत जानकारी (Detailed History) :-

राष्ट्रपति भवन का इतिहास बीसवीं सदी की शुरुआत से जुड़ा है। जब 1911 के दिल्ली दरबार में ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत की राजधानी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय लिया, तो ब्रिटिश वायसराय के लिए एक भव्य महल बनाने की योजना तैयार की गई। इसे तब ‘वायसराय हाउस‘ (Viceroy’s House) कहा जाता था।

इस ऐतिहासिक इमारत को डिजाइन करने का जिम्मा प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस (Sir Edwin Lutyens) और उनके सहयोगी हर्बर्ट बेकर (Herbert Baker) को सौंपा गया। इसका निर्माण कार्य 1912 में शुरू हुआ था, जिसे पूरा होने में लगभग 17 वर्ष का लंबा समय लगा। आखिरकार, 1929 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हुआ और 1931 में भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन इसमें रहने वाले पहले ब्रिटिश निवासी बने।

26 जनवरी 1950 को जब भारत पूर्ण गणतंत्र बना, तब इस इमारत का नाम बदलकर ‘राष्ट्रपति भवन‘ कर दिया गया और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसमें प्रवेश किया। तब से लेकर आज तक, यह इमारत स्वतंत्र भारत के इतिहास, लोकतांत्रिक निर्णयों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत की गवाह रही है।

​बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

​राष्ट्रपति भवन की वास्तुकला भारतीय और पश्चिमी शैलियों का एक ऐसा बेजोड़ और उत्कृष्ट मिश्रण है, जो दुनिया भर के वास्तुकारों को अचंभित करता है।

  • बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :– मुख्य इमारत में चार मंजिलें हैं और इसमें कुल 340 कमरे हैं। इसके निर्माण में स्थानीय तौर पर मंगाए गए ‘धूसर पत्थरों’ (Grey Quartzite) तथा भारी मात्रा में लाल और गुलाबी धौलपुरी बलुआ पत्थरों (Sandstone) का उपयोग किया गया है। इमारत का सबसे मुख्य आकर्षण इसका विशाल केंद्रीय गुंबद (Central Dome) है, जो सांची के प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप की संरचना से प्रेरित है। इसके अलावा, भवन के स्तंभों पर बारीक नक्काशी की गई है, जिनमें भारतीय मंदिरों की तर्ज पर ‘घंटी’ (Bell) के डिजाइन बनाए गए हैं, जिन्हें ‘लुटियंस बेल’ कहा जाता है।
  • आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :– इसके भीतर के हिस्से भव्यता की कहानी बयां करते हैं। सबसे प्रमुख है ‘दरबार हॉल’ (Darbar Hall), जहाँ देश के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पुरस्कार और शपथ ग्रहण समारोह होते हैं। इसके ठीक ऊपर मुख्य गुंबद स्थित है। दूसरा मुख्य आकर्षण ‘अशोक हॉल’ (Ashoka Hall) है, जो अपनी छतों पर की गई फारसी शैली की अद्भुत चित्रकारी और सुंदर झूमरों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त, यहाँ ‘मार्बल हॉल’, ‘नॉन-स्टैट्यूटरी कॉरिडोर्स’ और ‘बैंक्वेट हॉल’ हैं, जहाँ दुर्लभ कलाकृतियाँ, प्राचीन पेंटिंग्स और भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों के तैलचित्र सहेज कर रखे गए हैं।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-

यदि आप देश के इस सर्वोच्च गौरव को अपनी आँखों से देखना चाहते हैं, तो पूरी यात्रा गाइड नीचे दिए गए क्रम में है।

  • टिकट (Ticket) :– राष्ट्रपति भवन के भीतर (सर्किट-1, सर्किट-2 और सर्किट-3) घूमने के लिए प्रति व्यक्ति ₹50 का मामूली पंजीकरण शुल्क लिया जाता है। 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश निःशुल्क है। बुकिंग केवल राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन ही की जा सकती है, वहाँ ऑन-स्पॉट टिकट नहीं मिलता है।
  • समय (Visiting Time) :– राष्ट्रपति भवन मुख्य रूप से पर्यटकों के लिए सुबह 09:00 बजे से शाम 04:00 बजे के बीच विभिन्न टाइम स्लॉट में खोला जाता है।
  • खुलने और बंद होने का समय (Opening & Closing Time) :– यह आम जनता के लिए सप्ताह में कुछ विशेष दिनों (आमतौर पर मंगलवार से रविवार, सरकारी छुट्टियों को छोड़कर) के लिए ही खोला जाता है। इसके प्रसिद्ध ‘अमृत उद्यान’ (Amrit Udyan) को हर साल वसंत ऋतु (फरवरी से मार्च) के दौरान आम जनता के लिए विशेष रूप से खोला जाता है।
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :
    • मेट्रो द्वारा :– सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘केंद्रीय सचिवालय’ (Central Secretariat) है, जो येलो और वायलट लाइन पर स्थित है। यहाँ से आप पैदल या ऑटो लेकर राष्ट्रपति भवन के प्रवेश द्वार (गेट नंबर 2 या गेट नंबर 37) तक पहुँच सकते हैं।
    • बस द्वारा :– दिल्ली के किसी भी हिस्से से ‘केंद्रीय सचिवालय’ या ‘कृषि भवन’ जाने वाली डीटीसी बसें आपको यहाँ के बेहद करीब छोड़ देंगी।
    • सड़क मार्ग/कैब द्वारा :– आप अपनी कार या कैब के जरिए सीधे ‘Rashtrapati Bhavan, New Delhi’ लोकेशन डालकर पहुँच सकते हैं। यह राजपथ (कर्तव्य पथ) के पश्चिमी छोर पर स्थित है। सुरक्षा कारणों से पर्यटकों के वाहनों को परिसर के अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है, इसलिए गाड़ियों को निर्दिष्ट पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करना होता है।

फोटोग्राफी स्पॉट्स, स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार :-

  • फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :
    • राष्ट्रपति भवन के सामने स्थित ‘जयपुर कॉलम‘ (Jaipur Column) और मुख्य प्रांगण (फोरकोर्ट) का भव्य नजारा।
    • ​कर्तव्य पथ (राजपथ) से दिखने वाला राष्ट्रपति भवन का दूरगामी और सममित दृश्य (Symmetrical View)।
    • ​वसंत ऋतु के दौरान ‘अमृत उद्यान’ में खिले सैकड़ों किस्म के ट्यूलिप, गुलाब और विदेशी फूलों के रंग-बिरंगे बैकग्राउंड।
    • विशेष निर्देश :- सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति भवन की मुख्य इमारत के अंदर कैमरा या मोबाइल ले जाना और फोटोग्राफी करना पूरी तरह वर्जित है। केवल अमृत उद्यान और बाहरी प्रांगण में ही तय नियमों के तहत तस्वीरें खींचने की अनुमति होती है।
  • स्थानीय स्वाद (Local Flavors) :– राष्ट्रपति भवन के अति-सुरक्षित क्षेत्र के अंदर कोई व्यावसायिक फूड स्टॉल नहीं हैं। लेकिन परिसर से बाहर आते ही ‘कर्तव्य पथ’ पर मिलने वाली दिल्ली की मशहूर आइसक्रीम, गोलगप्पे और भेलपूरी का स्वाद लाजवाब होता है। थोड़े वीआईपी अनुभव के लिए आप पास ही स्थित ‘कनॉट प्लेस’ (CP) या ‘खान मार्केट’ के बेहतरीन रेस्तराओं में जाकर उत्तर भारतीय, मुगलई और कॉन्टिनेंटल व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Market) :– यहाँ से सबसे नजदीक और प्रसिद्ध बाजार ‘कनॉट प्लेस’ (Connaught Place) और ‘जनपथ मार्केट’ (Janpath Market) हैं। जनपथ बाजार से आप हस्तशिल्प, कपड़े, प्राचीन आभूषण और तिब्बती कलाकृतियाँ बहुत ही अच्छे दामों पर खरीद सकते हैं। इसके अलावा, लुटियंस दिल्ली का सबसे प्रीमियम ‘खान मार्केट’ भी यहाँ से मात्र 10 मिनट की दूरी पर है।

​आसपास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions)

राष्ट्रपति भवन देखने के साथ-साथ आप इसके आसपास स्थित इन विश्व प्रसिद्ध स्थलों की यात्रा भी कर सकते हैं।

  1. कर्तव्य पथ और इंडिया गेट (India Gate) :– राष्ट्रपति भवन के ठीक सामने सीधी सड़क के दूसरे छोर पर स्थित अमर जवान ज्योति और वार मेमोरियल।
  2. नेशनल म्यूजियम (National Museum) :– भारत के हजारों साल पुराने इतिहास और कलाकृतियों का सबसे बड़ा संग्रह, जो पास ही स्थित है।
  3. संसद भवन (New Parliament House) :– भारत का नया और भव्य त्रिकोणीय संसद भवन, जो राष्ट्रपति भवन के बिल्कुल नजदीक है।
  4. गुरद्वारा बंगला साहिब :– दिल्ली का एक बेहद शांत, पवित्र और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल, जो यहाँ से करीब 2.5 किलोमीटर दूर है।

रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-

  • राष्ट्रपति भवन में कुल 340 कमरे, 74 गलियारे, 18 सीढ़ियाँ और 37 फव्वारे हैं। इसे बनाने में लगभग 70 करोड़ ईंटों और 30 लाख घन फीट पत्थरों का इस्तेमाल हुआ था, जिसमें कहीं भी लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया था।
  • ​इसके पीछे स्थित ‘अमृत उद्यान’ (पुराना नाम मुगल गार्डन) में ब्रिटिश और मुगल दोनों शैलियों का मिश्रण है, जहाँ दुनिया भर से लाए गए गुलाबों की 159 से अधिक किस्में और दुर्लभ औषधीय पौधे मौजूद हैं।
  • ​राष्ट्रपति भवन का अपना एक आत्मनिर्भर स्टाफ और क्लिनिक है, और इसके रखरखाव के लिए सैकड़ों की संख्या में माली, रसोइये, सुरक्षाकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1: क्या हम बिना ऑनलाइन बुकिंग के सीधे राष्ट्रपति भवन देखने जा सकते हैं?

उत्तर:- नहीं, सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति भवन के अंदर प्रवेश करने के लिए पहले से ऑनलाइन बुकिंग कराना अनिवार्य है। बिना वैध ऑनलाइन पास और पहचान पत्र के गेट पर प्रवेश नहीं मिलता है।

प्रश्न 2: ‘अमृत उद्यान’ (मुगल गार्डन) आम जनता के लिए कब खुलता है?

उत्तर:- अमृत उद्यान हर साल वसंत ऋतु के दौरान, मुख्य रूप से फरवरी के शुरुआती सप्ताह से मार्च के मध्य तक आम जनता के लिए खोला जाता है। इसके लिए भी ऑनलाइन टिकट बुक करना होता है।

प्रश्न 3: क्या राष्ट्रपति भवन के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति है?

उत्तर:- मुख्य भवन (सर्किट-1) के अंदर मोबाइल फोन, बैग, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कैमरा ले जाने की सख्त मनाही है। पर्यटकों को अपना सामान एंट्री गेट पर बने क्लॉक रूम में जमा करना होता है। हालांकि, अमृत उद्यान के दौरे के समय केवल मोबाइल ले जाने की छूट होती है।

लेखक के विचार (Author’s Perspective) :-

​राष्ट्रपति भवन केवल एक शानदार वास्तुकला का नमूना नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवंत लोकतंत्र का हृदय है। जब आप रायसिना हिल की चढ़ाई चढ़ते हुए इस भव्य इमारत को देखते हैं, तो देश के नागरिक के रूप में आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। सर एडविन लुटियंस ने इसे ब्रिटिश सत्ता की धमक दिखाने के लिए बनाया था, लेकिन आज इसकी हर एक ईंट भारतीय गणतंत्र के सिद्धांतों और संप्रभुता को बयां करती है। जीवन में कम से कम एक बार हर भारतीय को इस भव्य परिसर की यात्रा जरूर करनी चाहिए ताकि वे हमारे इतिहास और प्रशासनिक गौरव को करीब से महसूस कर सकें।

S“रायसिना हिल की ऊंचाइयों पर खड़ा यह भव्य प्रांगण, भारतीय गणतंत्र की शक्ति, संस्कृति और गौरवमयी इतिहास की अमर गाथा गाता है।”

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