
राष्ट्रपति भवन, दिल्ली :- भारतीय गणराज्य की संप्रभुता, राजसी वैभव और स्थापत्य का सर्वोच्च शिखर
विस्तृत जानकारी (Detailed History)
नई दिल्ली में रायसीना हिल (Raisina Hill) पर स्थित ‘राष्ट्रपति भवन’ (Rashtrapati Bhavan) केवल भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास स्थान नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संप्रभुता, राष्ट्रीय गौरव और ऐतिहासिक गौरव का सबसे भव्य प्रतीक है। ब्रिटिश काल में इसे ‘वायसराय हाउस‘ (Viceroy’s House) के नाम से जाना जाता था। इसका निर्माण ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा अपनी राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने के बाद, लुटियंस दिल्ली के केंद्र बिंदु के रूप में किया गया था। इस विशाल महल की नींव 1912 में रखी गई थी और इसके निर्माण में लगभग 17 वर्ष का लंबा समय लगा। यह साल 1929 में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ और इसके निर्माण में करीब 29,000 से अधिक कारीगरों और मजदूरों ने अपना योगदान दिया था। इसके पहले निवासी भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इर्विन थे।
इस राजसी इमारत के मुख्य वास्तुकार सर एडविन लुटियंस (Sir Edwin Lutyens) थे, जिन्होंने अपने सहयोगी सर हरबर्ट बेकर (Sir Herbert Baker) के साथ मिलकर इस पूरी प्रशासनिक नगरी का खाका तैयार किया था। 26 जनवरी 1950 को जब भारत पूर्ण गणतंत्र बना, तब इस ऐतिहासिक इमारत का नाम बदलकर ‘राष्ट्रपति भवन‘ कर दिया गया और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसमें प्रवेश किया। यह विश्व के किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के निवास स्थानों में आकार और भव्यता के मामले में सबसे विशाल परिसरों में से एक है, जो भारत की ऐतिहासिक नियति और लोकतांत्रिक गरिमा को अपने भीतर समेटे हुए है।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture) :-
राष्ट्रपति भवन स्थापत्य कला (Architecture) का एक बेजोड़ और कालजयी उदाहरण है। इसकी वास्तुकला में जहां एक ओर पश्चिमी शास्त्रीय शैली (Classical European Style) की भव्यता दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर इसमें भारतीय बौद्ध, हिंदू और मुगल स्थापत्य कला के तत्वों का एक अत्यंत सुंदर और गहरा मिश्रण देखने को मिलता है।
- बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :– यह पूरी भव्य इमारत चार मंजिला है और इसमें कुल 340 कमरे हैं। यह मुख्य भवन 5 एकड़ के क्षेत्र में खड़ा है, जबकि इसका पूरा परिसर 330 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके निर्माण में धौलपुर के प्रसिद्ध लाल और हल्के पीले बलुआ पत्थरों (Sandstone) का उपयोग किया गया है, जो धूप पड़ने पर अपनी रंगत बदलते हैं। इस इमारत की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल केंद्रीय गुंबद (Central Dome) है, जो सांची के प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप के डिजाइन से प्रेरित है। इसके सामने एक विशाल प्रांगण (Forecourt) है, जिसके केंद्र में 145 फीट ऊंचा ‘जयपुर पोल’ (Jaipur Column) खड़ा है, जो जयपुर के महाराजा द्वारा ब्रिटिश राज को उपहार स्वरूप दिया गया था। इमारत की बाहरी दीवारों पर बनी नक्काशीदार छतरियां, छज्जे और हाथी की मूर्तियां पारंपरिक भारतीय शिल्पकला की अद्भुत मिसाल हैं।
- आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :– राष्ट्रपति भवन के भीतर का हिस्सा राजसी वैभव और कलात्मकता का चरम शिखर है। इसके मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं।
- दरबार हॉल (Durbar Hall) :– यह भवन के ठीक गुंबद के नीचे स्थित सबसे भव्य और औपचारिक हॉल है। स्वतंत्रता से पहले इसे ‘सिंहासन कक्ष‘ कहा जाता था। यहाँ पर देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों के ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होते रहे हैं। इसकी आंतरिक बनावट में इतालवी संगमरमर के ऊंचे खंभे और एक विशाल झूमर (Chandelier) लगा है।
- अशोक हॉल (Ashoka Hall) :– यह पहले वायसराय का बॉलरूम था, जिसे अब बड़े राजकीय भोज और सम्मान समारोहों के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी छत पर फारसी शैली में किया गया चित्रकारी का काम (Persian Paintings) और दीवारों पर लगे विशाल दर्पण इसकी आंतरिक सुंदरता को अलौकिक बनाते हैं।
- मुगल गार्डन (अमृत उद्यान – Amrit Udyan) :– भवन के ठीक पीछे स्थित यह विश्व प्रसिद्ध उद्यान मुगल और ब्रिटिश शैली का एक अनूठा मिश्रण है। इसमें सैकड़ों प्रकार के दुर्लभ गुलाब, ट्यूलिप और विदेशी फूल खिलते हैं। इसके अलावा भवन के भीतर एक विशाल राजकीय पुस्तकालय, कला दीर्घाएं और संग्रहालय हैं, जो इसके कलात्मक मूल्य को कई गुना बढ़ाते हैं।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-
राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण, वीआईपी और अति-सुरक्षित क्षेत्र ‘सेंट्रल विस्टा’ के पश्चिमी छोर पर रायसीना हिल पर स्थित है। यहाँ आने के लिए आवश्यक गाइड नीचे दी गई है।
- प्रवेश टिकट और अनुमति (Entry Ticket & Admission) :– सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति भवन के भीतर आम नागरिकों का सीधे प्रवेश प्रतिबंधित है। हालांकि, इसे आम जनता और पर्यटकों के दर्शन के लिए सप्ताह के विशेष दिनों में खोला जाता है। इसके लिए आगंतुकों को राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट (rb.nic.in) पर जाकर ऑनलाइन अग्रिम बुकिंग (Online Advance Booking) करनी होती है। इसके तीन मुख्य सर्किट (Circuits) हैं—मुख्य भवन, राष्ट्रपति भवन संग्रहालय (Museum), और अमृत उद्यान (जो आमतौर पर फरवरी-मार्च के वसंत के महीने में आम जनता के लिए खुलता है)। ऑनलाइन बुकिंग के समय एक मामूली पंजीकरण शुल्क (लगभग ₹50) देना होता है, और प्रवेश के समय वैध सरकारी मूल पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड या पासपोर्ट) दिखाना अनिवार्य है।
- समय (Visiting Timings) :– राष्ट्रपति भवन के मुख्य सर्किट आमतौर पर गुरुवार से रविवार तक सुबह 09:30 बजे से शाम 04:30 बजे के बीच विभिन्न स्लॉट्स में पर्यटकों के लिए खुलते हैं। प्रत्येक सोमवार, मंगलवार, बुधवार और सभी राष्ट्रीय अवकाशों पर यह सामान्य दर्शन के लिए बंद रहता है।
- पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :–
- मेट्रो द्वारा :– यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी और सुविधाजनक मेट्रो स्टेशन ‘केंद्रीय सचिवालय’ (Central Secretariat) है, जो येलो लाइन और वायलेट लाइन का इंटरचेंज स्टेशन है। इसके अलावा ‘उद्योग भवन’ (Udyog Bhawan) मेट्रो स्टेशन भी पास है। मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलकर आप पैदल या ई-रिक्शा के जरिए इसके मुख्य स्वागत कक्ष (गेट नंबर 2 या गेट नंबर 37) तक पहुँच सकते हैं।
- बस द्वारा :– केंद्रीय दिल्ली और कर्तव्य पथ की ओर जाने वाली दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसें आपको ‘केंद्रीय सचिवालय’ या ‘कृषि भवन’ बस स्टॉप पर उतारेंगी, जहाँ से राष्ट्रपति भवन की दूरी बहुत कम है।
- ऑटो/कैब :– कनॉट प्लेस, इंडिया गेट या नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से आप सीधे ऑटो या कैब करके मात्र 5 से 10 मिनट में रायसीना हिल के बाहरी रास्तों तक पहुँच सकते हैं।
आसपास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions) :-
- नया और पुराना संसद भवन (New & Old Parliament House) :– रायसीना हिल से नीचे उतरते ही संसद मार्ग पर स्थित भारत के ये दो ऐतिहासिक विधायी केंद्र, जो भारतीय लोकतंत्र की धड़कन हैं।
- कर्तव्य पथ और इंडिया गेट (Kartavya Path & India Gate) :– राष्ट्रपति भवन के मुख्य द्वार से सीधे दिखने वाला देश का सबसे भव्य और ऐतिहासिक राष्ट्रीय मार्ग, जो इंडिया गेट पर जाकर समाप्त होता है।
- नेशनल म्यूजियम (National Museum) :– भारत के प्राचीन इतिहास, सिंधु घाटी सभ्यता की मूर्तियों और अनमोल कलाकृतियों का सबसे बड़ा संग्रहालय, जो जनपथ पर पास ही स्थित है।
- राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र और राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय :– प्रगति मैदान के पास स्थित बच्चों और परिवारों के लिए ज्ञानवर्धक और सांस्कृतिक स्थल।
- कनॉट प्लेस (Connaught Place) :– दिल्ली का मुख्य वाणिज्यिक और ऐतिहासिक बाजार, जहाँ आप खरीदारी और स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।
फोटोग्राफी, स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार (Lifestyle Guide) :-
- फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :– राष्ट्रपति भवन के मुख्य गुंबद और जयपुर पोल को ‘विजय चौक’ (Vijay Chowk) से फ्रेम करना पूरी दिल्ली का सबसे प्रतिष्ठित और राजसी व्यू देता है। शाम के समय जब यहाँ की इमारतें रोशनी से जगमगा उठती हैं, तो यह नजारा कैमरों के लिए स्वर्ग जैसा होता है। (ध्यान दें: सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति भवन के आंतरिक कमरों और सुरक्षा द्वारों के पास फोटोग्राफी पूरी तरह से वर्जित है। केवल संग्रहालय और अमृत उद्यान के निर्धारित क्षेत्रों में ही मोबाइल फोटोग्राफी की अनुमति है)।
- स्थानीय स्वाद (Local Taste) :– इस वीआईपी प्रशासनिक क्षेत्र के आसपास कोई व्यावसायिक फूड स्टॉल नहीं हैं, लेकिन पास ही स्थित विभिन्न राज्यों के सरकारी भवनों की कैंटीन (जैसे आंध्र भवन, गोवा निवास या महाराष्ट्र सदन) अपने प्रामाणिक क्षेत्रीय व्यंजनों और किफायती भोजन के लिए पूरी दिल्ली में प्रसिद्ध हैं।
- प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Markets) :– खरीदारी के लिए पास ही स्थित ‘जनपथ मार्केट’ (Janpath), ‘बाबा खड़क सिंह मार्ग’ पर स्थित राज्य एम्पोरियम और ‘कनॉट प्लेस’ सबसे बेहतरीन और नजदीक विकल्प हैं, जहाँ से आप भारतीय हस्तशिल्प, कपड़े और स्मृति चिन्ह खरीद सकते हैं।
रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-
- आकार के मामले में इटली के रोम में स्थित ‘क्विरीनल पैलेस’ (Quirinal Palace) के बाद राष्ट्रपति भवन दुनिया के किसी भी राष्ट्राध्यक्ष का दूसरा सबसे बड़ा आवासीय परिसर है। इसके निर्माण में करीब 70 करोड़ ईंटों और 30 लाख घन फीट पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था, और दिलचस्प बात यह है कि इसके निर्माण में कहीं भी लोहे (Steel) का उपयोग नहीं किया गया था।
- राष्ट्रपति भवन की आंतरिक दीवारों और खंभों पर लुटियंस द्वारा डिजाइन की गई विशेष घंटियां उकेरी गई हैं, जिन्हें ‘लुटियंस बेल्स’ (Lutyens Bells) कहा जाता है। इसके पीछे ब्रिटिश सोच यह थी कि जब तक इन घंटियों की आवाज शांत रहेगी, तब तक ब्रिटिश साम्राज्य भारत पर राज करेगा।
- इसके प्रसिद्ध ‘अशोक हॉल’ की छत पर लगी विशाल पेंटिंग ईरान के राजा (फतह अली शाह) की है, जिसे अंग्रेजों ने विशेष रूप से यहाँ स्थापित करवाया था। इस हॉल में एक अनूठा हाइड्रोलिक मंच भी है, जो राजकीय समारोहों के दौरान कालीन के नीचे से ऊपर आ सकता है।
- राष्ट्रपति भवन के परिसर के भीतर अपनी खुद की एक पूरी आत्मनिर्भर नगरी बसती है, जिसमें राष्ट्रपति के स्टाफ के लिए आवास, एक आधुनिक स्कूल, अस्पताल, एक डाकघर, गोल्फ कोर्स, शानदार स्विमिंग पूल और एक विशाल डेयरी फार्म भी शामिल है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
प्रश्न 1:- राष्ट्रपति भवन दिल्ली में कहाँ स्थित है और इसके मुख्य आर्किटेक्ट कौन थे?
उत्तर:- राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली के केंद्र में रायसीना हिल पर स्थित है। इस ऐतिहासिक और भव्य राजसी इमारत के मुख्य वास्तुकार ब्रिटिश मूल के विख्यात आर्किटेक्ट सर एडविन लुटियंस थे।
प्रश्न 2:– क्या आम जनता राष्ट्रपति भवन के अंदर जाकर इसे देख सकती है?
उत्तर:- हाँ, आम जनता राष्ट्रपति भवन के भीतर के मुख्य कक्षों (जैसे दरबार हॉल और अशोक हॉल) और इसके संग्रहालय को देख सकती है। इसके लिए आगंतुकों को राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन अग्रिम टिकट स्लॉट बुक करना होता है।
प्रश्न 3:– राष्ट्रपति भवन के प्रसिद्ध बगीचे का नया नाम क्या है और यह कब खुलता है?
उत्तर:- राष्ट्रपति भवन के प्रसिद्ध बगीचे (पूर्व नाम मुगल गार्डन) का नया नाम ‘अमृत उद्यान’ (Amrit Udyan) है। यह उद्यान आमतौर पर हर साल वसंत ऋतु के दौरान (फरवरी और मार्च के महीनों में) आम जनता के दीदार के लिए खोला जाता है।
लेखक के विचार (Author’s Thoughts) :-
रायसीना हिल की चढ़ाई चढ़ते हुए जब सामने राष्ट्रपति भवन का वह विशाल सांची शैली का गुंबद और हवा में लहराता हुआ तिरंगा दिखाई देता है, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। यह इमारत केवल औपनिवेशिक काल के पत्थरों का ढांचा नहीं है; यह उस महागाथा का गवाह है जहां एक विदेशी वायसराय के महल को हमारे गणतंत्र ने अपने सर्वोच्च नागरिक—भारत के राष्ट्रपति का घर बना दिया। इसके दरबार हॉल की खामोशी में आज भी हमारे लोकतंत्र के जननायकों के शपथ की गूंज महसूस होती है, और अशोक हॉल की फारसी छतें भारत की वैश्विक सांस्कृतिक स्वीकार्यता को दर्शाती हैं। जीवन में कम से कम एक बार ऑनलाइन टिकट बुक करके इस ‘शब्द-तीत’ और स्थापत्य के महातीर्थ को भीतर से देखना, देश की संप्रभु शक्ति और कला के प्रति आपके दृष्टिकोण को एक नई ऊंचाई देगा।
“रायसीना हिल पर मुकुट की तरह सजा राष्ट्रपति भवन भारतीय गणतंत्र के उस असीम आत्मसम्मान का प्रतीक है, जिसके पत्थरों में आज भी हमारे लोकतंत्र की गौरवशाली नियति धड़कती है।”
