राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली

भारत के 5000 वर्षों के गौरवशाली इतिहास, सभ्यता और कला का सबसे बड़ा जीवंत खजाना

राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) नई दिल्ली :- भारत के 5000 वर्षों के गौरवशाली इतिहास, सभ्यता और कला का सबसे बड़ा जीवंत खजाना

यदि आप भारत की प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के रहस्यों को करीब से देखना चाहते हैं, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के सामने सिर झुकाना चाहते हैं, या चोल राजवंश की कांस्य मूर्तियों की भव्यता को निहारना चाहते हैं, तो आपको कहीं और जाने की जरूरत नहीं है। दिल्ली के जनपथ मार्ग पर स्थित ‘राष्ट्रीय संग्रहालय’ (National Museum, New Delhi) भारत का सबसे समृद्ध, विशाल और प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संग्रहालय है। यहाँ प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era) से लेकर आधुनिक काल तक की लगभग 2,00,000 से अधिक दुर्लभ और बहुमूल्य कलाकृतियाँ मौजूद हैं, जो भारत के 5000 से अधिक वर्षों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सफर को एक ही छत के नीचे जीवंत करती हैं। आइए, इस विस्तृत ब्लॉग के माध्यम से भारत की इस अनमोल विरासत के इतिहास, इसकी अद्भुत बनावट और यहाँ मौजूद प्रमुख ऐतिहासिक खजानों की सैर करते हैं।

​विस्तृत जानकारी (Detailed History)

​राष्ट्रीय संग्रहालय का इतिहास भारत की स्वतंत्रता और देश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के महान प्रयासों से जुड़ा हुआ है।

  • स्थापना और पृष्ठभूमि :– इस संग्रहालय की कहानी साल 1947-48 में लंदन के ‘रॉयल एकेडमी’ में आयोजित एक भव्य प्रदर्शनी से शुरू होती है, जहाँ भारत की दुर्लभ कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया था। जब ये कलाकृतियाँ भारत वापस आईं, तो तत्कालीन नेताओं और विद्वानों ने महसूस किया कि इन्हें सहेजने के लिए देश में एक राष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय होना चाहिए।
  • उद्घाटन :– इस विचार के साथ 15 अगस्त 1949 को राष्ट्रपति भवन में भारत के तत्कालीन गवर्नर-जनरल श्री चक्रवर्ती राजगोपालाचारी द्वारा राष्ट्रीय संग्रहालय का आधिकारिक उद्घाटन किया गया।
  • वर्तमान भवन का निर्माण :– संग्रहालय के वर्तमान भव्य भवन की आधारशिला 12 मई 1955 को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा रखी गई थी। इस इमारत का पहला चरण बनकर तैयार होने के बाद, 18 दिसंबर 1960 को इसे आम जनता के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया। आज यह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख संस्थान के रूप में कार्य कर रहा है।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture) :-

​नई दिल्ली के लुटियंस जोन के मुख्य हिस्से में स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय की इमारत अपने आप में आधुनिक और पारंपरिक भारतीय वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है।

  • बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :
    • भव्य वृत्ताकार और बलुआ पत्थर :– संग्रहालय की मुख्य इमारत तीन मंजिलों में फैली हुई है। इसकी बाहरी बनावट में लुटियंस दिल्ली की सिग्नेचर स्टाइल यानी लाल और वैली (क्रीम) रंग के बलुआ पत्थरों (Sandstone) का बेहद खूबसूरती से उपयोग किया गया है।
    • मुख्य द्वार और प्रांगण :– इसका मुख्य प्रवेश द्वार बेहद विशाल है, जो दर्शकों को प्राचीन काल के किसी महल में प्रवेश करने जैसा अहसास कराता है। इमारत के केंद्र में एक सुंदर खुला हुआ आंतरिक प्रांगण (Courtyard) है, जहाँ विभिन्न कालखंडों की विशाल पत्थर की मूर्तियाँ प्रदर्शित हैं।
  • आंतरिक बनावट और दीर्घाएँ (Interior & Galleries) :
    • ​संग्रहालय के आंतरिक हिस्से को अत्यंत वैज्ञानिक और कालानुक्रमिक (Chronological Order) तरीके से डिजाइन किया गया है, ताकि दर्शक जैसे-जैसे आगे बढ़ें, उन्हें इतिहास के बदलते दौर का अनुभव हो।
    • ​यहाँ 20 से अधिक विशेष दीर्घाएँ (Galleries) हैं, जो विभिन्न मंजिलों पर विभाजित हैं। इनमें उच्च कोटि की लाइटिंग और शीशे के सुरक्षित कैबिनेट्स का उपयोग किया गया है, ताकि इन अनमोल कलाकृतियों को बिना किसी नुकसान के करीब से देखा जा सके।

​यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

यदि आप भारत के इस सबसे बड़े इतिहास के खजाने को देखने आ रहे हैं, तो यात्रा का पूरा विवरण नीचे दिए गए क्रम में है।

  • टिकट (Ticket Fee) :
    • भारतीय नागरिकों के लिए :– ₹20 प्रति व्यक्ति
    • विदेशी पर्यटकों के लिए :– ₹350 प्रति व्यक्ति (विदेशी पर्यटकों के टिकट के साथ एक बेहतरीन ऑडियो गाइड मुफ्त मिलती है)
    • छात्रों के लिए :– ₹1 पारदर्शी रूप से (वैध छात्र पहचान पत्र दिखाने पर)
  • समय (Visiting Time) :
    • ​यह संग्रहालय मंगलवार से शुक्रवार सुबह 10:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक और शनिवार व रविवार सुबह 10:00 बजे से रात 08:00 बजे तक खुला रहता है।
    • विशेष निर्देश :– यह संग्रहालय प्रत्येक सोमवार (Monday) को पूरी तरह से बंद रहता है।
    • ​इसे पूरी तरह और गहराई से देखने के लिए कम से कम 3 से 4 घंटे का समय लेकर आएं।
  • नियम और सुविधाएँ :– संग्रहालय के भीतर बैग, खाने-पीने की वस्तुएं ले जाना मना है, जिन्हें आप बाहर क्लॉक रूम में जमा कर सकते हैं। मोबाइल से बिना फ्लैश के फोटोग्राफी करने की अनुमति है।
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :
    • मेट्रो द्वारा :– सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘उद्योग भवन’ (Udyog Bhawan) है, जो येलो लाइन पर स्थित है। यहाँ से संग्रहालय की दूरी मात्र 800 मीटर है, जहाँ से आप पैदल या ऑटो लेकर 2 मिनट में पहुँच सकते हैं। इसके अलावा ‘केंद्रीय सचिवालय’ (Central Secretariat) मेट्रो स्टेशन भी बेहद पास है।
    • बस द्वारा :– जनपथ और राजपथ मार्ग से गुजरने वाली सभी प्रमुख डीटीसी बसें आपको ‘राष्ट्रीय संग्रहालय बस स्टॉप’ पर उतार देंगी।
    • सड़क मार्ग/कैब द्वारा :– आप सीधे ‘National Museum, Janpath, New Delhi’ लोकेशन डालकर पहुँच सकते हैं। यहाँ पर्यटकों के वाहनों के लिए पार्किंग की उचित व्यवस्था है।

​फोटोग्राफी स्पॉट्स, स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार

  • फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :
    • डांसिंग गर्ल और नटराज मूर्ति के पास :– सिंधु घाटी सभ्यता की ‘डांसिंग गर्ल’ (कांस्य मूर्ति) और चोल काल की विशाल ‘नटराज’ की मूर्ति के सामने खड़े होकर कला प्रेमी तस्वीरें लेना पसंद करते हैं।
    • केंद्रीय प्रांगण (Central Courtyard) :– यहाँ धूप की रोशनी में प्राचीन विशाल पत्थरों की मूर्तियों के साथ अद्भुत बैकग्राउंड मिलता है।
    • मुख्य प्रवेश द्वार :– बलुआ पत्थर से बनी इस राजसी इमारत का बाहरी हिस्सा विंटेज फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट है।
  • स्थानीय स्वाद (Local Flavors) :– संग्रहालय परिसर के भीतर एक बहुत ही सुंदर कैफेटेरिया (Cafeteria) है, जहाँ आपको चाय, कॉफी और दक्षिण व उत्तर भारतीय स्नैक्स किफायती दामों पर मिल जाते हैं। इसके अलावा पास ही स्थित कनॉट प्लेस और आंध्र भवन हैं, जहाँ आप दिल्ली के सबसे बेहतरीन और लजीज व्यंजनों का स्वाद चख सकते हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Market) :– संग्रहालय के ठीक सामने और थोड़ी ही दूरी पर प्रसिद्ध ‘जनपथ मार्केट’ (Janpath Market) स्थित है। यह बाज़ार तिब्बती कलाकृतियों, हस्तशिल्प, स्कार्फ, पारंपरिक कपड़ों और प्राचीन सिक्कों की शॉपिंग के लिए पूरी दिल्ली में मशहूर है।

​राष्ट्रीय संग्रहालय के मुख्य आकर्षण (Major Highlights)

यहाँ आने पर आपको इन 5 अनमोल खजानों को बिल्कुल भी मिस नहीं करना चाहिए।

  1. सिंधु घाटी सभ्यता दीर्घा :– यहाँ 2500 ईसा पूर्व पुरानी प्रसिद्ध ‘डांसिंग गर्ल’ (नर्तकी), ‘मदर गॉडेस’ (मातृदेवी) की मूर्ति और हड़प्पा काल के मिट्टी के बर्तन व मुहरें मौजूद हैं।
  2. पवित्र बुद्ध अवशेष दीर्घा :– यहाँ उत्तर प्रदेश के पिपरहवा से प्राप्त भगवान बुद्ध के वास्तविक पवित्र अस्थि अवशेष (Relics) एक बेहद खूबसूरत सोने के मंडप में रखे गए हैं, जो पूरी दुनिया के बौद्ध धर्मवलंबियों के लिए आस्था का केंद्र है।
  3. तंजौर और मैसूर पेंटिंग्स :– यहाँ सोने की परतों और कीमती पत्थरों से सजी अद्भुत दक्षिण भारतीय पेंटिंग्स का संग्रह है।
  4. लघु चित्रकला दीर्घा (Miniature Paintings) :– भारत का सबसे बड़ा लघु चित्रों का संग्रह, जिसमें मुगल, राजस्थानी, पहाड़ी और दक्कन शैली की बेहतरीन पेंटिंग्स शामिल हैं।
  5. अस्त्र-शस्त्र दीर्घा (Arms and Armour) :– टीपू सुल्तान, महाराणा प्रताप और मुगल सम्राटों के ऐतिहासिक हथियार, तलवारें और ढालें।

​रोचक तथ्य (Interesting Facts)

  • ​इस संग्रहालय में रखे गए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय सरकारों के विशेष अनुरोध पर थाईलैंड, श्रीलंका और मंगोलिया जैसे देशों में राजकीय सम्मान के साथ दर्शन के लिए भेजा जाता रहा है।
  • ​यहाँ दुनिया का सबसे बेहतरीन और दुर्लभ मध्य एशियाई संग्रह (Central Asian Collection) भी मौजूद है, जिसे प्रसिद्ध खोजी सर ऑरेल स्टीन द्वारा सिल्क रूट (Silk Road) से खोजा गया था।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1: क्या राष्ट्रीय संग्रहालय के अंदर फोटो खींचने की अनुमति है?

उत्तर:- हाँ, राष्ट्रीय संग्रहालय के अंदर बिना फ्लैश (Without Flash) के और केवल गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए मोबाइल और कैमरे से फोटोग्राफी करने की पूरी अनुमति है।

प्रश्न 2: क्या यहाँ बच्चों और छात्रों के लिए कोई विशेष छूट है?

उत्तर:- हाँ, स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए अपना वैध आईडी कार्ड दिखाने पर टिकट की कीमत मात्र ₹1 है। बच्चों के लिए इतिहास को जानने और समझने का यह एक बेहतरीन शैक्षणिक स्थान है।

प्रश्न 3: क्या संग्रहालय के अंदर गाइड की सुविधा उपलब्ध है?

उत्तर:- हाँ, विदेशी पर्यटकों के टिकट में ऑडियो गाइड शामिल होती है, और भारतीय पर्यटक भी नाममात्र का शुल्क देकर हिंदी और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध आधुनिक ऑडियो गाइड ले सकते हैं, जो हर गैलरी की विस्तृत जानकारी देती है।

लेखक के विचार (Author’s Perspective) :-

​मेरी दृष्टि में नई दिल्ली का राष्ट्रीय संग्रहालय केवल एक बंद इमारत या कलाकृतियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह समय की एक ऐसी जादुई मशीन (Time Machine) है जो आपको सीधे इतिहास के पन्नों में ले जाती है। जब आप हड़प्पा सभ्यता की उस छोटी सी ‘डांसिंग गर्ल’ को अपने सामने देखते हैं, जिसकी तस्वीरें हमने बचपन में स्कूल की किताबों में देखी थीं, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के सामने का वातावरण मन को एक असीम शांति से भर देता है। यह स्थान हमें याद दिलाता है कि भारत की कला, विज्ञान और दर्शन कितने प्राचीन और समृद्ध रहे हैं। यदि आप दिल्ली में हैं, तो मॉल और आधुनिक बाजारों से समय निकालकर एक दिन इस राष्ट्रीय संग्रहालय को जरूर दें, यह आपकी भारत को देखने की दृष्टि को हमेशा के लिए बदल देगा।

“जनपथ मार्ग पर बलुआ पत्थरों के बीच इतिहास की सांसें लेता यह विशाल प्रांगण, हड़प्पा की मिट्टी से लेकर बुद्ध की करुणा तक फैले हमारे 5000 वर्षों के गौरव का अमर जीवित दस्तावेज है।”

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