
शंकर अंतर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय, नई दिल्ली :- दुनिया भर की संस्कृतियों और अनूठी परंपराओं को समेटे कला का अद्भुत संसार
नई दिल्ली के आईटीओ (ITO) क्षेत्र में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित शंकर अंतर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय (Shankar’s International Dolls Museum) भारत का सबसे प्रसिद्ध, अनोखा और दुनिया के सबसे बड़े कॉस्ट्यूम डॉल्स म्यूजियम में से एक है। यह केवल बच्चों के मनोरंजन की जगह नहीं है, बल्कि एक ऐसा जादुई सांस्कृतिक केंद्र है जो आपको एक ही छत के नीचे दुनिया के लगभग 85 देशों की पारंपरिक वेशभूषा, लोक कला और इतिहास की सैर कराता है। इस संग्रहालय की स्थापना देश के मशहूर कार्टूनिस्ट के. शंकर पिल्लई ने की थी। यहाँ कांच के विशाल काउंटरों में सजी हजारों की संख्या में खूबसूरत गुड़ियां न केवल बच्चों का मन मोह लेती हैं, बल्कि बड़ों को भी कला और इतिहास की एक अद्भुत दुनिया में ले जाती हैं। यदि आप दिल्ली में एक ऐसी जगह की तलाश में हैं जो ज्ञान, कला और मनोरंजन का बेहतरीन संगम हो, तो इस संग्रहालय को एक्सप्लोर करना आपके लिए एक यादगार अनुभव होगा।
विस्तृत जानकारी (Detailed History)
शंकर अंतर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय की स्थापना और इसके पीछे की कहानी बेहद भावुक और दिलचस्प है।
- एक कार्टूनिस्ट का सपना :– इस संग्रहालय की नींव देश के जाने-माने राजनीतिक कार्टूनिस्ट के. शंकर पिल्लई (1902–1989) ने रखी थी। बात 1950 के दशक की है, जब शंकर जी को हंगरी के राजदूत से उपहार के रूप में एक बेहद खूबसूरत और पारंपरिक पोशाक वाली विदेशी गुड़िया मिली। उस गुड़िया की बारीक कारीगरी ने शंकर जी को इतना प्रभावित किया कि वे इसके बाद जब भी किसी विदेशी दौरे पर जाते, वहाँ से उस देश की पारंपरिक वेशभूषा वाली अनोखी गुड़िया जरूर खरीदकर लाते।
- पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी का सुझाव :– धीरे-धीरे उनके पास लगभग 500 विदेशी गुड़ियों का एक बड़ा संग्रह हो गया। शंकर जी इन गुड़ियों को भारत के अलग-अलग शहरों में बच्चों के रेखाचित्रों (Paintings) की प्रदर्शनी के साथ प्रदर्शित करने लगे। लेकिन बार-बार पैकिंग करने और ले जाने के कारण कई नाजुक गुड़ियां टूटने लगीं। दिल्ली में आयोजित एक ऐसी ही प्रदर्शनी के दौरान देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनकी बेटी इंदिरा गांधी वहाँ पहुँचे। शंकर जी ने गुड़ियों के खराब होने की चिंता जब उनके सामने जाहिर की, तो इंदिरा गांधी ने तुरंत सुझाव दिया कि इन अमूल्य धरोहरों के लिए दिल्ली में एक स्थायी संग्रहालय बनाया जाना चाहिए।
- उद्घाटन :– जब बहादुर शाह जफर मार्ग पर ‘चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट‘ (Children’s Book Trust) की इमारत का निर्माण हुआ, तो उसका एक पूरा फ्लोर विशेष रूप से इस संग्रहालय के लिए आरक्षित किया गया। इस भव्य इमारत का उद्घाटन 30 नवंबर 1965 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने किया और पंडित नेहरू की स्मृति में इस परिसर का नाम ‘नेहरू हाउस’ रखा गया। शुरुआत में यहाँ केवल 1,000 गुड़ियां थीं, जो आज बढ़कर 7,000 से भी अधिक हो चुकी हैं।
बनावट का विवरण (Detailed Architecture)
यह संग्रहालय नेहरू हाउस की पहली मंजिल पर स्थित है, जो लगभग 5,184 वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी आंतरिक और बाहरी बनावट कलात्मकता का बेहतरीन उदाहरण है।
- मुख्य प्रवेश द्वार और लेआउट :– संग्रहालय में प्रवेश करने के लिए एक बेहद खूबसूरत और चौड़ी घुमावदार सीढ़ी (Winding Staircase) बनाई गई है, जो दर्शकों को मुख्य हॉल की ओर ले जाती है। अंदर का पूरा लेआउट एक विशाल गैलरी के रूप में है, जहाँ दीवारों के साथ-साथ 1,000 फीट से भी ज्यादा लंबे, शीशे के लगभग 160 से अधिक विशाल डिस्प्ले केस (कांच की अलमारियाँ) लगाए गए हैं ताकि बच्चे और पर्यटक हर गुड़िया को बेहद करीब से और स्पष्ट रूप से देख सकें।
- दो मुख्य वैचारिक खंड :– संग्रहालय की आंतरिक बनावट को भौगोलिक और सांस्कृतिक आधार पर दो मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया है:
- प्रथम भाग (पश्चिमी देश) :– इस हिस्से की दीर्घाओं में यूरोपीय देशों, यूनाइटेड केनडम (UK), अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और राष्ट्रमंडल देशों (CIS) की शानदार गुड़ियों को सजाया गया है। यहाँ ब्रिटेन की महारानी के शाही लिबास से लेकर अलग-अलग देशों के पारंपरिक नृत्यों की मुद्राओं वाली गुड़ियां मौजूद हैं।
- द्वितीय भाग (एशियाई व अन्य देश) :– इस भाग में भारत सहित संपूर्ण एशिया के देशों, मध्य पूर्व (Middle East), अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की सुंदर गुड़ियां प्रदर्शित हैं।
- भारतीय खंड (The Jewels of India) :– संग्रहालय का सबसे सुंदर और जीवंत हिस्सा इसका भारतीय खंड है। यहाँ विशेष रूप से तैयार की गई 500 से अधिक गुड़ियां मौजूद हैं। ये गुड़ियां भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक पहनावे, आभूषणों, शादियों के तौर-तरीकों, क्षेत्रीय त्योहारों और प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यों (जैसे भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी और भांगड़ा) को बहुत ही सजीव रूप में दर्शाती हैं।
- डॉल्स वर्कशॉप और क्लिनिक विंग :– इसी परिसर के अंदर एक विशेष डॉल्स वर्कशॉप (कार्यशाला) भी बनी हुई है, जहाँ विशेषज्ञ कलाकार बहुत ही बारीक रिसर्च के बाद भारतीय वेशभूषा वाली गुड़ियां अपने हाथों से तैयार करते हैं। इसके अलावा यहाँ एक ‘डॉल्स हॉस्पिटल’ (अस्पताल विंग) भी है, जहाँ पुरानी या क्षतिग्रस्त हो चुकी ऐतिहासिक गुड़ियों की बहुत ही सावधानी से मरम्मत और देखरेख की जाती है।
यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)
शंकर अंतर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय की यात्रा को पूरी तरह से सुगम, आसान और व्यावहारिक बनाने के लिए पूरी जानकारी यहाँ एक ब्लॉक अनुक्रम में दी गई है, जिसे आप आसानी से कॉपी कर सकते हैं।
- खुलने और बंद होने का समय (Museum Timings) :–
- यह संग्रहालय सुबह 10:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक खुला रहता है।
- विशेष नोट :– संग्रहालय का प्रवेश टिकट काउंटर शाम 05:30 बजे बंद हो जाता है, इसलिए इस समय से पहले पहुँचना आवश्यक है।
- साप्ताहिक अवकाश :– यह संग्रहालय आधिकारिक रूप से हर सोमवार (Monday) को बंद रहता है। इसके अलावा सभी प्रमुख राष्ट्रीय अवकाशों (26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर) तथा मुख्य त्योहारों (होली, दिवाली) पर भी यह बंद रहता है।
- टिकट की कीमत (Entry Fee) :–
- वयस्क (Adults) के लिए :– ₹30 प्रति व्यक्ति।
- बच्चे (Children) के लिए :– ₹15 प्रति बच्चा।
- स्कूली बच्चों का समूह (20 या अधिक बच्चे होने पर) :– ₹5 प्रति बच्चा (विशेष रियायती दर)।
- पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :–
- मेट्रो द्वारा :– यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन आईटीओ (ITO) मेट्रो स्टेशन है, जो वॉयलेट लाइन (Violet Line) पर स्थित है। स्टेशन के गेट नंबर 4 से बाहर निकलते ही ठीक सामने नेहरू हाउस की इमारत स्थित है, जहाँ से आप पैदल ही 1 मिनट में संग्रहालय पहुँच सकते हैं। इसके अलावा ब्लू लाइन पर स्थित मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन भी यहाँ से मात्र 1 किमी की दूरी पर है।
- सड़क मार्ग/बस द्वारा :– केंद्रीय दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित होने के कारण यह शहर के हर हिस्से से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप कैब, ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा या डीटीसी बसों (आईटीओ बस स्टॉप) द्वारा बेहद आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं।
- रेलवे स्टेशन से दूरी :– यह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से लगभग 4 किमी और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से करीब 5 किमी की दूरी पर है।
- फोटोग्राफी नियम (Photography Spots) :–
- संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर बनी भव्य घुमावदार सीढ़ियाँ और नेहरू हाउस का मुख्य बोर्ड तस्वीरें लेने के लिए बेहतरीन स्थान हैं। गैलरी के अंदर कांच की अलमारियों में सजी जापानी सामुराई गुड़ियां, हंगरी की मेपोल डांसर गुड़ियां और भारतीय पारंपरिक विवाह खंड के विजुअल्स बहुत खूबसूरत हैं (कृपया अंदर कैमरा या मोबाइल से फोटोग्राफी करने से पहले काउंटर से नियमों और लागू शुल्कों की जानकारी अवश्य ले लें)।
- स्थानीय स्वाद (Local Flavors – Must Eat) :–
- बंगाली मार्केट (Bengali Market) :– संग्रहालय से मात्र 1.5 किमी की दूरी पर दिल्ली का प्रसिद्ध बंगाली मार्केट स्थित है। यहाँ के नत्थू स्वीट्स और बंगाली पेस्ट्री शॉप पर मिलने वाले स्वादिष्ट छोले भटूरे, गोलगप्पे, आलू टिक्की चाट और बंगाली मिठाइयाँ पूरी दिल्ली में मशहूर हैं।
- मंडी हाउस के कैफे :– पास ही स्थित मंडी हाउस क्षेत्र के त्रिवेणी टेरेस कैफे और श्रीराम सेंटर कैफे में मिलने वाली कड़क चाय, समोसे और सैंडविच का स्वाद बेहद लाजवाब होता है।
- प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Specialized Items to Buy Around) :–
- कनॉट प्लेस (Connaught Place – CP) :– यहाँ से मात्र 2.5 किमी दूर स्थित दिल्ली का दिल कहा जाने वाला कनॉट प्लेस है, जहाँ से आप हर बड़े ब्रांड के कपड़े, जूते और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीद सकते हैं।
- जनपथ मार्केट (Janpath Market) :– कनॉट प्लेस के पास स्थित जनपथ बाज़ार से आप बहुत ही किफायती दामों पर एथनिक कपड़े, ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर ज्वेलरी, तिब्बती हस्तशिल्प और सुंदर बैग्स की शॉपिंग कर सकते हैं।
- दरियागंज संडे बुक मार्केट :– किताबों के शौकीनों के लिए पास ही स्थित दरियागंज का मशहूर संडे बुक मार्केट पुरानी और दुर्लभ किताबों को बेहद सस्ते दामों पर खरीदने की सबसे अच्छी जगह है।
आसपास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions)
संग्रहालय देखने के बाद आप इसके पास स्थित इन प्रमुख स्थलों का भी दौरा कर सकते हैं।
- राजघाट (Raj Ghat) :– यहाँ से मात्र 2 किमी की दूरी पर स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का शांत और सुंदर समाधि स्थल।
- मंडी हाउस (Mandi House) :– दिल्ली का सांस्कृतिक और थियेटर हब, जहाँ नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) और कई आर्ट गैलरीज़ स्थित हैं।
- फ़िरोज़ शाह कोटला किला :– लगभग 1.5 किमी दूर स्थित एक ऐतिहासिक तुग़लक कालीन किला, जो अपने प्राचीन अशोक स्तंभ और रहस्यों के लिए जाना जाता है।
- सुप्रीम कोर्ट संग्रहालय (Supreme Court Museum) :– पास ही स्थित भारत के सर्वोच्च न्यायालय का संग्रहालय, जहाँ भारतीय न्याय प्रणाली के इतिहास को देखा जा सकता है।
रोचक तथ्य (Interesting Facts)
- एक उपहार से शुरुआत :– इस विशाल अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय की शुरुआत केवल एक गुड़िया से हुई थी, जो शंकर पिल्लई को हंगरी के राजदूत ने भेंट की थी। आज यहाँ 85 से अधिक देशों की संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करने वाली गुड़ियों का संग्रह है।
- विश्व स्तर पर प्रथम पुरस्कार :– यहाँ की डॉल्स वर्कशॉप में बनने वाली भारतीय पोशाक वाली गुड़ियों की बेजोड़ सुंदरता के कारण 1980 में पोलैंड के क्रैकोव में आयोजित ‘इंटरनेशनल डॉल्स बिएनले’ में इन्हें प्रथम पुरस्कार ‘गोल्डन पीकॉक फेदर’ से नवाजा गया था।
- अनोखा एक्सचेंज प्रोग्राम :– यहाँ बनने वाली खूबसूरत भारतीय गुड़ियों को विदेशों से मिलने वाले उपहारों के बदले एक्सचेंज (आदान-प्रदान) भी किया जाता है और इन्हें दुनिया भर के बड़े संग्राहकों को भेजा जाता है।
- गुड़ियों का अपना अस्पताल :– यह भारत का शायद इकलौता ऐसा संग्रहालय है जहाँ पुरानी, ऐतिहासिक या क्षतिग्रस्त हो चुकी गुड़ियों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए एक विशेष ‘डॉल्स क्लिनिक व हॉस्पिटल’ चलाया जाता है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-
प्रश्न 1:- शंकर अंतर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय कहाँ स्थित है और इसके संस्थापक कौन हैं?
उत्तर:– यह संग्रहालय नई दिल्ली के आईटीओ (ITO) क्षेत्र में बहादुर शाह जफर मार्ग पर ‘नेहरू हाउस’ (चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट बिल्डिंग) की पहली मंजिल पर स्थित है। इसके संस्थापक देश के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्टूनिस्ट के. शंकर पिल्लई हैं, जिन्होंने इसकी स्थापना वर्ष 1965 में की थी।
प्रश्न 2:- क्या यह संग्रहालय सोमवार को खुला रहता है और इसकी टिकट की कीमत क्या है?
उत्तर:– नहीं, यह संग्रहालय प्रत्येक सोमवार (Monday) को पूरी तरह बंद रहता है। इसके अलावा यह तीनों राष्ट्रीय अवकाशों और मुख्य त्योहारों पर भी बंद रहता है। वयस्कों के लिए इसकी टिकट ₹30 और बच्चों के लिए ₹15 है।
प्रश्न 3:– इस संग्रहालय में कुल कितनी गुड़ियां हैं और इनका वर्गीकरण कैसे किया गया है?
उत्तर:– वर्तमान में इस संग्रहालय में दुनिया भर से आई 7,000 से भी अधिक अद्भुत गुड़ियों का संग्रह है। इन्हें दो मुख्य हिस्सों—पश्चिमी देशों की गुड़ियां और एशियाई-अफ्रीकी देशों की गुड़ियों के रूप में विशाल कांच की अलमारियों में प्रदर्शित किया गया है।
प्रश्न 4:– क्या यहाँ स्कूली बच्चों के समूहों के लिए कोई विशेष रियायत मिलती है?
उत्तर:– हाँ, यदि किसी स्कूल या संस्थान से 20 या उससे अधिक बच्चों का समूह एक साथ संग्रहालय देखने आता है, तो उनके लिए प्रति बच्चा मात्र ₹5 की विशेष रियायती दर से प्रवेश टिकट दी जाती है।
प्रश्न 5:- क्या इस संग्रहालय में भारत की संस्कृति को दर्शाने वाली भी गुड़ियां हैं?
उत्तर:– हाँ, यहाँ के विशेष भारतीय खंड में 500 से अधिक अनूठी गुड़ियां प्रदर्शित हैं, जो भारत के सभी राज्यों के पारंपरिक पहनावे, लोक नृत्यों, क्षेत्रीय शिल्पों और पारंपरिक शादियों के दृश्यों को बेहद खूबसूरती से दर्शाती हैं।
लेखक के विचार (Author’s Thoughts)
मेरे व्यक्तिगत नजरिए से, दिल्ली का शंकर अंतर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय केवल कांच के बक्सों में बंद खिलौनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह कपड़ों, धागों और मिट्टी के माध्यम से वैश्विक शांति और सांस्कृतिक एकता को दर्शाने वाली एक अद्भुत कलात्मक कृति है। आज की इस डिजिटल दुनिया में जहाँ बच्चे स्क्रीन्स पर गेम खेलने में व्यस्त हैं, यह जगह उन्हें मानव हस्तशिल्प और कला की वास्तविक सुंदरता से रूबरू कराती है। जब आप यहाँ के भारतीय खंड में सजी दुल्हनों और लोक नर्तकों की गुड़ियों को देखते हैं, तो आपको भारत की सांस्कृतिक विविधता पर गर्व महसूस होता है। वहीं दूसरी ओर, जापानी और यूरोपीय गुड़ियों की बारीक बनावट आपको हैरान कर देती है। चाहे आप इतिहास और कला के शौकीन हों, या अपने बच्चों को दुनिया की संस्कृतियों से परिचित कराना चाहते हों—इस शांत और खूबसूरत संग्रहालय की दीर्घाओं में बिताया गया समय आपके भीतर छिपे बचपन को दोबारा जिंदा कर देगा। “दुनिया भर की समृद्ध संस्कृतियों और अनूठी परंपराओं को धागे और रंग-बिरंगे परिधानों में समेटे, दिल्ली का यह गुड़िया संग्रहालय हर उम्र के इंसान के भीतर छिपे बचपन को दोबारा जिंदा कर देता है।”
