हार्डिंग म्यूनिसिपल लाइब्रेरी, दिल्ली

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

हार्डिंग लाइब्रेरी (Hardinge Library), जिसे आज हम ‘हार्डिंग म्यूनिसिपल लाइब्रेरी’ या ‘दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी’ के एक ऐतिहासिक हिस्से के रूप में भी याद करते हैं, दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में नई सड़क के पास स्थित है। इस लाइब्रेरी की स्थापना का इतिहास ब्रिटिश काल के एक बेहद सनसनीखेज और ऐतिहासिक वाकये से जुड़ा हुआ है।

साल 1912 में, जब भारत की राजधानी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से दिल्ली स्थानांतरित किया गया, तब तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग (Lord Hardinge) हाथी पर सवार होकर चांदनी चौक से गुजर रहे थे। इसी दौरान स्वतंत्रता सेनानियों (जिसमें रास बिहारी बोस और भाई बालमुकुंद शामिल थे) ने उन पर बम फेंका था। लॉर्ड हार्डिंग इस हमले में घायल तो हुए, लेकिन बच गए। इस ऐतिहासिक घटना के बाद, उनकी जान बचने की खुशी और उन्हें सम्मानित करने के लिए दिल्ली के नागरिकों और ब्रिटिश सरकार ने मिलकर एक फंड जुटाया। इस फंड से साल 1916 में इस भव्य लाइब्रेरी का निर्माण किया गया और इसका नाम ‘हार्डिंग लाइब्रेरी‘ रखा गया। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर ‘हार्डिंग म्यूनिसिपल लाइब्रेरी‘ कर दिया गया। यह लाइब्रेरी दिल्ली के बौद्धिक और राजनीतिक इतिहास का एक जीवंत गवाह है, जहाँ कभी देश के बड़े-बड़े स्वतंत्रता सेनानी और विद्वान आकर पढ़ा करते थे।

​बनावट का विवरण (Detailed Architecture)

बाहरी बनावट (Exterior Architecture) :-

​हार्डिंग लाइब्रेरी की इमारत ब्रिटिश-औपनिवेशिक (Colonial) और पुनर्जागरण (Renaissance) स्थापत्य शैली का एक उत्कृष्ट नमूना है। मटमैले और लाल सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) से बनी यह दो मंजिला इमारत चांदनी चौक की भीड़-भाड़ के बीच अपनी एक अलग ही पहचान रखती है। इमारत के मुख्य हिस्से पर बड़े-बड़े ऊंचे खंभे (Pillars) और अर्धवृत्ताकार मेहराब (Arches) बने हुए हैं, जो इसे एक शाही और गंभीर रूप देते हैं। इसकी खिड़कियों पर की गई लकड़ी की नक्काशी और वेंटिलेशन के लिए बनाए गए ऊंचे रोशनदान उस दौर की वास्तुकला की समझ को दर्शाते हैं। इमारत के मुख्य द्वार के ऊपर लगा पुराना क्लॉक टॉवर और लाइब्रेरी का नाम आज भी गुजरे जमाने की याद दिलाता है।

आंतरिक बनावट (Interior Architecture) :-

​लाइब्रेरी के भीतर कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो आप वक्त में पीछे चले गए हों। इसके अंदर की बनावट बेहद शांत और विशाल है। ऊंचे सीलिंग (छत) और सागौन की लकड़ी (Teak wood) से बने भारी-भरकम बुकशेल्फ़ और फर्नीचर यहाँ की मुख्य विशेषता हैं। फर्श पर पुरानी मोज़ेक टाइलें लगी हुई हैं। लाइब्रेरी का मुख्य रीडिंग हॉल बेहद बड़ा है, जहाँ लंबी लकड़ी की मेजें और आरामदायक कुर्सियाँ रखी हैं, ताकि पाठक सुकून से पढ़ सकें। यहाँ की सबसे बड़ी खासियत इसकी अलमारियों में सहेजकर रखी गई लाखों दुर्लभ किताबें, पांडुलिपियाँ और पुराने अखबार हैं, जो अब पीले पड़ चुके हैं। हवा और रोशनी के लिए बनाई गई बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ इसके अंदरूनी माहौल को पढ़ने के अनुकूल और हवादार बनाए रखती हैं।

​यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes)

हार्डिंग लाइब्रेरी की यात्रा करने और यहाँ के शांत माहौल को महसूस करने के लिए नीचे दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें।

  • टिकट और प्रवेश शुल्क :– लाइब्रेरी में प्रवेश पूरी तरह से नि:शुल्क (Free) है। यदि आप यहाँ बैठकर पढ़ना चाहते हैं या इसके ऐतिहासिक संग्रह को देखना चाहते हैं, तो कोई टिकट नहीं लगता। हालांकि, किताबें घर ले जाने के लिए सदस्यता (Membership) लेनी होती है।
  • समय (Visiting Time) :– यह लाइब्रेरी सुबह 08:00 बजे से रात 08:00 बजे तक खुली रहती है।
  • खुलने और बंद होने का दिन :– यह लाइब्रेरी सोमवार से शनिवार तक खुली रहती है और रविवार तथा राष्ट्रीय अवकाशों (Government Holidays) पर बंद रहती है।
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :
    • मेट्रो द्वारा :– यहाँ पहुँचने का सबसे आसान तरीका दिल्ली मेट्रो है। सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘चांदनी चौक’ (येलो लाइन) है। मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलकर आप पैदल ही नई सड़क या गांधी मैदान की तरफ चलकर 5 से 7 मिनट में लाइब्रेरी पहुँच सकते हैं।
    • बस द्वारा :– पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन या चांदनी चौक जाने वाली किसी भी बस से आप यहाँ पहुँच सकते हैं। दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की कई बसें इस रूट पर चलती हैं।
    • ऑटो/रिक्शा द्वारा :– आप पुरानी दिल्ली के किसी भी हिस्से से ई-रिक्शा या साइकिल रिक्शा लेकर आसानी से ‘हार्डिंग लाइब्रेरी’ पहुँच सकते हैं। यहाँ तंग गलियों के कारण अपनी निजी कार से आने से बचें, क्योंकि पार्किंग की भारी समस्या रहती है।

​फोटोग्राफी स्पॉट्स, स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार

फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :-

  • इमारत का मुख्य मुखौटा (Front Facade) :– लाइब्रेरी के बाहर खड़े होकर इसके ऊंचे ब्रिटिशकालीन खंभों और मेहराबों के साथ एक बेहतरीन विंटेज फोटो ली जा सकती है।
  • केंद्रीय वास्तुकला हॉल (Central Reading Hall) :– अंदर की पुरानी लकड़ी की अलमारियों, पीली पड़ चुकी किताबों की कतारों और विशाल मेज-कुर्सियों के साथ की गई फोटोग्राफी बेहद खूबसूरत और क्लासिक लगती है (अंदर फोटोग्राफी के लिए स्टाफ से अनुमति लेना आवश्यक है)।
  • पुरानी सीढ़ियाँ :– लाइब्रेरी की ऊपरी मंजिल पर जाने वाली लकड़ी और लोहे की नक्काशीदार सीढ़ियाँ भी एक शानदार बैकड्रॉप देती हैं।

​स्थानीय स्वाद (Local Food)

चूँकि यह लाइब्रेरी चांदनी चौक में है, इसलिए यहाँ खाने-पीने के शौकीनों के लिए स्वर्ग है।

  • नटराज के दही भले :– लाइब्रेरी से कुछ ही दूरी पर स्थित भाई मतिदास चौक के पास नटराज के मशहूर दही भल्ले का स्वाद जरूर लें।
  • पराठे वाली गली :– यहाँ से पैदल दूरी पर स्थित पराठे वाली गली में जाकर तरह-तरह के शुद्ध देसी घी के पराठों का आनंद लें।
  • जलेबी वाला :– चांदनी चौक के नुक्कड़ पर स्थित पुरानी मशहूर जलेबी वाले की गरमा-गरम और चाशनी से भरी जलेबियाँ खाना न भूलें।

प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Markets Nearby) :-

  • नई सड़क :– यह बाज़ार ठीक लाइब्रेरी के बगल में ही है, जो किताबों, उपन्यासों, स्टेशनरी और स्कूल-कॉलेज की किताबों के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है।
  • चांदनी चौक मुख्य बाज़ार :– कपड़ों, साड़ियों, लहंगों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों का एक विशाल और ऐतिहासिक थोक बाज़ार।
  • किनाड़ी बाज़ार और दरीबा कलां :– यदि आप शादी-ब्याह का सामान, गोटा-पत्ती या चांदी के पारंपरिक आभूषण खरीदना चाहते हैं, तो यह पास के ही बेहतरीन बाज़ार हैं।

Interesting Facts (रोचक तथ्य) :-

  • वायसराय पर हमले की देन :– इस लाइब्रेरी का निर्माण 1912 में लॉर्ड हार्डिंग पर हुए बम हमले में उनके बच जाने की याद और सम्मान में किया गया था।
  • दुर्लभ पुस्तकों का खजाना :– इस लाइब्रेरी में 1 लाख से भी अधिक किताबों का संग्रह है, जिसमें अरबी, फारसी, संस्कृत और उर्दू की बेहद दुर्लभ पांडुलिपियाँ (Manuscripts) शामिल हैं।
  • 100 साल से पुराना इतिहास :– साल 1916 में बनी यह इमारत 110 साल से भी अधिक पुरानी है और आज भी दिल्ली के म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत काम कर रही है।
  • आजादी के बाद नाम परिवर्तन :– भारत के आजाद होने के बाद, ब्रिटिश नाम को पूरी तरह न हटाते हुए इसमें ‘म्यूनिसिपल’ शब्द जोड़कर इसे स्थानीय प्रशासन के सुपुर्द कर दिया गया।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- हार्डिंग लाइब्रेरी दिल्ली में कहाँ स्थित है?

उत्तर:- यह लाइब्रेरी पुरानी दिल्ली के प्रसिद्ध चांदनी चौक इलाके में, नई सड़क और गांधी मैदान के नजदीक स्थित है।

प्रश्न 2: क्या इस लाइब्रेरी में प्रवेश करने के लिए कोई फीस देनी होती है?

उत्तर:- नहीं, आम जनता के लिए यहाँ जाना और रीडिंग रूम में बैठकर पढ़ना पूरी तरह से मुफ्त है।

प्रश्न 3: इस लाइब्रेरी का सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन कौन सा है?

उत्तर:- यहाँ का सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन पर स्थित ‘चांदनी चौक’ स्टेशन है।

प्रश्न 4:- हार्डिंग लाइब्रेरी की स्थापना कब और क्यों हुई थी?

उत्तर:- इसकी स्थापना साल 1916 में हुई थी। यह तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर हुए बम हमले में उनकी जान बचने की खुशी और सम्मान में नागरिकों द्वारा जुटाए गए फंड से बनाई गई थी।

प्रश्न 5: क्या इस लाइब्रेरी में दुर्लभ पुस्तकें भी उपलब्ध हैं?

उत्तर:- हाँ, यहाँ इतिहास, राजनीति और साहित्य से जुड़ी प्राचीन और दुर्लभ पुस्तकों के साथ-साथ कई ऐतिहासिक पांडुलिपियों का अनूठा संग्रह मौजूद है।

“दिल्ली के शोर-शराबे से भरे चांदनी चौक के बीच, हार्डिंग लाइब्रेरी इतिहास के पन्नों और किताबों की खुशबू को समेटे एक शांत और बौद्धिक नखलिस्तान की तरह खड़ी है।”

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