खूनी दरवाजा, दिल्ली

ऐतिहासिक खूनी दरवाजा की गौरवगाथा

ऐतिहासिक खूनी दरवाजा की गौरवगाथा :- इतिहास, वास्तुकला और संपूर्ण ट्रेवल (Travel Guide)

विस्तृत जानकारी (Detailed History)

खूनी दरवाजा (Khooni Darwaza), जिसे ‘लाल दरवाजा‘ भी कहा जाता है, दिल्ली के सबसे रहस्यमय, ऐतिहासिक और डरावने अतीत को समेटे हुए एक प्रमुख स्मारक है। यह ऐतिहासिक द्वार बहादुर शाह जफर मार्ग पर फिरोज शाह कोटला किले के ठीक पास स्थित है। इस दरवाजे का निर्माण 16वीं शताब्दी में सूरी राजवंश के संस्थापक शेरशाह सूरी द्वारा करवाया गया था। जब शेरशाह सूरी ने हुमायूं को हराकर दिल्ली पर अधिकार किया, तब उन्होंने अपने नए शहर ‘शेरगढ़‘ (जिसे आज पुराना किला और उसके आस-पास का इलाका माना जाता है) की स्थापना की थी। खूनी दरवाजा इसी शेरगढ़ शहर का एक मुख्य प्रवेश द्वार था।

इस दरवाजे का नाम ‘खूनी दरवाजा’ पड़ने के पीछे कई दर्दनाक और खूनी ऐतिहासिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं। मुगल काल से लेकर ब्रिटिश काल तक, यहाँ कई बड़े नरसंहार और शाहजादों की हत्याएं हुईं।

  • मुगल सम्राट जहांगीर ने अपने पिता अकबर के नवरत्नों में से एक, अब्दुल रहीम खान-ए-खाना के दो बेटों की हत्या करवाकर उनके शवों को इसी दरवाजे पर सड़ने के लिए लटका दिया था, क्योंकि उन्होंने जहांगीर के खिलाफ विद्रोह का समर्थन किया था।
  • ​औरंगज़ेब ने अपने बड़े भाई दारा शिकोह को सिंहासन की लड़ाई में हराने के बाद, उसका कटा हुआ सिर इसी दरवाजे पर आम जनता के सामने प्रदर्शित करने के लिए लटकाया था।
  • ​इस दरवाजे का सबसे चर्चित और अंतिम खूनी इतिहास सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है। जब ब्रिटिश कैप्टन विलियम हडसन ने अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के दो बेटों (मिर्जा मुगल और मिर्जा खिज्र सुल्तान) और एक पोते (मिर्जा अबू बक्र) को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार किया, तो उन्हें लाल किले ले जाते समय इसी दरवाजे के पास रोका। हडसन ने बिना किसी मुकदमे के तीनों मुगल शहजादों को सरेआम गोली मार दी और उनके शवों को इसी दरवाजे के सामने तीन दिनों तक प्रदर्शन के लिए रख दिया। इस घटना के बाद से इस इमारत का नाम हमेशा के लिए ‘खूनी दरवाजा’ पड़ गया।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture) :-

खूनी दरवाजा की वास्तुकला सूरी और अफगान स्थापत्य कला का एक अत्यंत मजबूत और उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी बनावट सुरक्षा और भव्यता का एक अनूठा संगम है।

  • निर्माण सामग्री :– इस तीन मंजिला विशाल इमारत के निर्माण में मुख्य रूप से ‘क्वार्सिट पत्थरों’ (Quartzite Stones) और स्थानीय लाल बलुआ पत्थरों का उपयोग किया गया है। पत्थरों की मजबूती के कारण यह इमारत आज भी सदियों बाद वैसी ही खड़ी है।
  • बाहरी बनावट (Exterior) :– खूनी दरवाजा की ऊँचाई लगभग 15.5 मीटर (51 फीट) है। यह एक तीन मंजिला संरचना है जिसमें ऊपर जाने के लिए अंदरूनी सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। इसके अग्रभाग पर सुंदर मेहराबदार खिड़कियाँ और झरोखे बने हुए हैं, जो अफगान शैली की वास्तुकला को दर्शाते हैं। इसकी प्राचीर और कंगूरे सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद मजबूत बनाए गए थे ताकि सैनिक यहाँ से दुश्मनों पर नजर रख सकें।
  • आंतरिक बनावट (Interior) :– दरवाजे के अंदर विभिन्न मंजिलों पर मेहराबदार कमरे और चौकियाँ बनी हुई हैं। सीढ़ियाँ काफी संकरी और पत्थरों से निर्मित हैं। इसके विशाल प्रवेश द्वार की कपाटें भी बेहद मजबूत थीं, जिन्हें युद्ध के समय पूरी तरह बंद कर दिया जाता था। इस इमारत का रंग और इसकी बनावट आज भी एक गंभीर और ऐतिहासिक अहसास कराती है।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-

यदि आप दिल्ली के इस गहरे इतिहास को करीब से देखना चाहते हैं, तो यहाँ यात्रा से जुड़ी संपूर्ण मार्गदर्शिका दी गई है।

  • टिकट (Entry Fee) :– खूनी दरवाजा को बाहर से देखने और इसकी तस्वीरें लेने के लिए कोई टिकट नहीं लगता है। यह सभी पर्यटकों के लिए पूरी तरह निःशुल्क (Free) है।
  • समय (Visiting Time) :– यह मुख्य सड़क के किनारे स्थित है, इसलिए इसे बाहर से 24 घंटे देखा जा सकता है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से पुरातत्व विभाग द्वारा इसके अंदर जाने और सीढ़ियों पर चढ़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसे देखने का सबसे अच्छा समय सुबह 07:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक का है।
  • पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :– मध्य दिल्ली में स्थित होने के कारण यहाँ पहुँचना बेहद आसान है:
    • मेट्रो द्वारा (By Metro) :– यहाँ पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन ‘दिल्ली गेट’ (Delhi Gate) है, जो वायलेट लाइन (Violet Line) पर स्थित है। मेट्रो स्टेशन से खूनी दरवाजा की दूरी मात्र 500 मीटर है, जहाँ से आप पैदल या ई-रिक्शा (e-rickshaw) लेकर 2 मिनट में पहुँच सकते हैं। इसके अलावा ब्लू लाइन पर स्थित ‘प्रगति मैदान’ (सुप्रीम कोर्ट) मेट्रो स्टेशन भी पास ही है।
    • बस और ऑटो द्वारा :– बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित होने के कारण दिल्ली के किसी भी कोने से यहाँ के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं। आप नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से सीधे ऑटो या कैब करके भी यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं।
  • फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :– सड़क के पार फुटपाथ से इस तीन मंजिला इमारत का पूरा व्यू कैमरे में बहुत शानदार आता है। सुबह के समय जब रोशनी इसके पत्थरों पर पड़ती है, तब इसकी वास्तुकला के बारीक विवरण स्पष्ट दिखाई देते हैं।
  • स्थानीय स्वाद (Local Food) :– खूनी दरवाजा के पास स्थित दरियागंज और मंडी हाउस के इलाकों में कई बेहतरीन रेस्तरां और कैफे हैं। यदि आप पुरानी दिल्ली के पारंपरिक स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं, तो यहाँ से 1.5 किलोमीटर दूर जामा मस्जिद के पास जाकर मटन कबाब, चिकन कोरमा और शाही टुकड़े का स्वाद ले सकते हैं।
  • प्रसिद्ध बाज़ार (Famous Markets) :– इसके पास ही दरियागंज का प्रसिद्ध किताब बाज़ार और संडे मार्केट लगता है। इसके अलावा थोड़ी दूरी पर स्थित ‘चांदनी चौक’ और ‘कनॉट प्लेस’ (CP) शॉपिंग के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प हैं।

आसपास के आकर्षण बिंदु (Nearby Attractions) :-

खूनी दरवाजा के भ्रमण के साथ आप इसके आस-पास स्थित इन प्रमुख स्थलों को भी अपनी यात्रा सूची में शामिल कर सकते हैं।

  1. फिरोज शाह कोटला किला (Feroz Shah Kotla Fort) :– यह 14वीं शताब्दी का ऐतिहासिक किला खूनी दरवाजा के ठीक सामने स्थित है, जहाँ प्रसिद्ध अशोक स्तंभ और रहस्यमयी जामी मस्जिद स्थित है।
  2. राजघाट (Raj Ghat) :– राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का यह शांत समाधि स्थल यहाँ से मात्र 1.5 किलोमीटर की दूरी पर यमुना तट के पास स्थित है।
  3. राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय (National Gandhi Museum) :– गांधी जी के जीवन और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दस्तावेजों को देखने के लिए यह एक बेहतरीन स्थान है।
  4. शंकर इंटरनेशनल डॉल्स म्यूजियम (Shankar’s International Dolls Museum) :– बच्चों और कला प्रेमियों के लिए यह स्थान बेहद प्रसिद्ध है, जो खूनी दरवाजा से कुछ ही कदमों की दूरी पर नेहरू हाउस में स्थित है।
  5. लाल किला और जामा मस्जिद :– ये दोनों वैश्विक धरोहरें यहाँ से मात्र 10 मिनट की दूरी पर स्थित हैं।

रोचक तथ्य (Interesting Facts) :-

  • ​खूनी दरवाजा का निर्माण मुगल सम्राटों ने नहीं, बल्कि सूर साम्राज्य के शेरशाह सूरी ने करवाया था, लेकिन इसका अधिकांश इतिहास मुगलों के खून से लिखा गया।
  • ​सन 1947 में भारत के विभाजन के दौरान भी इस दरवाजे के पास बड़े पैमाने पर दंगे और हिंसा हुई थी, जिसमें कई शरणार्थियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
  • ​स्थानीय लोककथाओं और कुछ लोगों के दावों के अनुसार, इस दरवाजे के आस-पास आज भी उन तीन मुगल शहजादों की आत्माओं की उपस्थिति महसूस की जाती है, जिन्हें अंग्रेजों ने बेरहमी से मार दिया था, हालांकि विज्ञान और पुरातत्व विभाग ऐसी बातों की पुष्टि नहीं करता।
  • ​सन 2002 तक आम जनता को इस इमारत की ऊपरी मंजिलों पर जाने की अनुमति थी, लेकिन एक सुरक्षा घटना के बाद इसके अंदर प्रवेश को पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1: खूनी दरवाजा का नाम ‘खूनी दरवाजा’ क्यों पड़ा?

उत्तर:- इस दरवाजे का नाम ‘खूनी दरवाजा’ इसलिए पड़ा क्योंकि यहाँ इतिहास में कई भीषण हत्याएं और नरसंहार हुए। सबसे प्रमुख घटना 1857 में ब्रिटिश कैप्टन हडसन द्वारा अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के दो बेटों और एक पोते की सरेआम गोली मारकर हत्या करना था।

प्रश्न 2: खूनी दरवाजा कहाँ स्थित है?

उत्तर:- खूनी दरवाजा नई दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर, फिरोज शाह कोटला क्रिकेट स्टेडियम और दिल्ली गेट मेट्रो स्टेशन के नजदीक स्थित है।

प्रश्न 3: क्या हम खूनी दरवाजा के अंदर जा सकते हैं?

उत्तर:- नहीं, वर्तमान समय में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सुरक्षा और संरक्षण के कारणों से पर्यटकों के इसके अंदर जाने और ऊपरी मंजिलों पर चढ़ने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। आप इसे बाहर से देख सकते हैं।

प्रश्न 4: खूनी दरवाजा का निर्माण किसने और कब करवाया था?

उत्तर:- खूनी दरवाजा का निर्माण 16वीं शताब्दी (लगभग 1540 के दशक) में सूरी वंश के शासक शेरशाह सूरी ने अपने नए शहर ‘शेरगढ़’ के प्रवेश द्वार के रूप में करवाया था।

लेखक के विचार (Author’s Thoughts) :-

​खूनी दरवाजा दिल्ली के उन गिने-चुने स्मारकों में से एक है जो अपनी भव्यता से ज्यादा अपने काले और खूनी इतिहास के लिए जाने जाते हैं। जब आप इस विशाल पत्थरों की संरचना के सामने खड़े होते हैं, तो एक अजीब सी खामोशी और गंभीरता का अहसास होता है। यह इमारत हमें याद दिलाती है कि दिल्ली ने केवल राजाओं का वैभव और महलों की शान ही नहीं देखी, बल्कि सत्ताओं के परिवर्तन के लिए यहाँ कितना खून भी बहाया गया है। आज यह व्यस्त सड़क के बीचोबीच खड़ा है जहाँ से रोजाना हजारों गाड़ियाँ गुजरती हैं, लेकिन इसकी दीवारें आज भी इतिहास के उस क्रूर दौर की गवाही चीख-चीख कर देती हैं। यदि आप दिल्ली के वास्तविक इतिहास और इसके उतार-चढ़ाव को महसूस करना चाहते हैं, तो इस स्मारक को बाहर से देखना भी आपके दिल में एक अमिट छाप छोड़ जाएगा।

“समय के क्रूर थपेड़ों और इतिहास के रक्तरंजित पन्नों को समेटे खड़ा खूनी दरवाजा, आज भी आधुनिक दिल्ली के सीने पर अतीत का एक गहरा घाव बनकर अडिग है।”

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