ग्वालियर किला

ग्वालियर किला (Gwalior Fort), ग्वालियर

उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के भव्य ऐतिहासिक स्मारकों के बाद, आइए रुख करते हैं मध्य प्रदेश का, जहाँ के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में स्थित ग्वालियर किला भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण किलों में से एक है। गोपांचल नामक एक ऊंची चट्टानी पहाड़ी पर स्थित इस किले की भव्यता और अभेद्यता को देखकर ही मुग़ल सम्राट बाबर ने इसे “हिंद के किलों के हार में जड़ा मोती” (The Pearl in the Necklace of the Castles of Hind) कहा था। राजपूती, तोमर और मुग़ल वास्तुकला के अनूठे संगम को समेटे यह किला भारतीय इतिहास के कई बड़े उतार-चढ़ावों का साक्षी रहा है।

विस्तृत जानकारी (Detailed History) :-

ग्वालियर किले का इतिहास प्राचीन और गौरवशाली है। इसके निर्माण का सटीक समय विवादित है, लेकिन स्थानीय लोककथाओं और अभिलेखों के अनुसार, इसका निर्माण तीसरी या चौथी शताब्दी में राजा सूरज सेन द्वारा कराया गया था। मान्यता है कि राजा सूरज सेन एक बार कुष्ठ रोग से पीड़ित थे, तब ‘ग्वालिपा‘ नामक एक पवित्र संत ने उन्हें एक पवित्र तालाब (सूरज कुंड) का पानी पिलाकर ठीक कर दिया था। उन्हीं संत के सम्मान में राजा ने इस शहर का नाम ‘ग्वालियर’ रखा और इस पहाड़ी पर किले की नींव रखी।

समय के साथ इस रणनीतिक किले पर कई राजवंशों का शासन रहा, जिनमें हूण, गुर्जर-प्रतिहार, तोमर, लोधी, मुग़ल, मराठा (सिंधिया) और अंग्रेज शामिल थे। 15वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर के शासनकाल के दौरान इस किले ने अपने सांस्कृतिक और स्थापत्य वैभव के स्वर्ण युग को देखा। इस किले का आधुनिक इतिहास भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने यहीं से अंग्रेजों के खिलाफ अपनी अंतिम और ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी थी।

बनावट का विवरण (Detailed Architecture) :-

​लगभग 3 किलोमीटर लंबे और पहाड़ी पर फैले ग्वालियर किले की वास्तुकला सैन्य सुरक्षा और अद्भुत नक्काशी का एक बेजोड़ नमूना है। यह किला बलुआ पत्थर (sandstone) से बना है और इसके दो मुख्य भाग हैं – रक्षात्मक दीवारें और आंतरिक महल।

  • प्रवेश द्वार (The Gates) :– किले में प्रवेश के लिए दो मार्ग हैं। पहला मार्ग उत्तर-पूर्व में ‘ग्वालियर गेट’ (लधा गेट) से शुरू होता है, जिसमें होकर छह क्रमिक द्वारों को पार करना होता है। दूसरा मार्ग पश्चिम में ‘उरवाई गेट’ है, जहाँ से वाहन सीधे ऊपर जा सकते हैं।
  • मान मंदिर महल (Man Mandir Palace) :– राजा मानसिंह तोमर द्वारा बनवाया गया यह महल किले का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। इसकी बाहरी दीवारों पर नीले, पीले और हरे रंग की चीनी मिट्टी (tiles) से बत्तख, हाथी और मयूर की आकृतियाँ उकेरी गई हैं, जो आज भी उतनी ही चमकदार हैं। इसके निचले हिस्से में भूमिगत तहखाने (जेल) बने हैं, जहाँ मुग़ल काल में औरंगज़ेब ने अपने भाई दारा शिकोह के बेटे सुलेमान शिकोह को कैद रखा था।
  • गुजरी महल (Gujari Mahal) :– यह महल राजा मानसिंह ने अपनी पसंदीदा गूजर रानी मृगनयनी के लिए बनवाया था। इसकी बनावट बेहद मजबूत और कलात्मक है। वर्तमान में इस महल को एक पुरातत्व संग्रहालय में बदल दिया गया है, जहाँ प्रसिद्ध ‘शालभंजिका‘ की मूर्ति (जिसे भारत की मोनालिसा भी कहा जाता है) रखी गई है।
  • सास-बहू मंदिर और तेली का मंदिर :– किले के भीतर स्थित ये मंदिर वास्तुकला के अद्भुत रत्न हैं। 11वीं शताब्दी का सास-बहू मंदिर (सहस्रबाहु मंदिर – भगवान विष्णु को समर्पित) अपनी बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है। वहीं, 8वीं शताब्दी का तेली का मंदिर उत्तर भारतीय (नागर) और दक्षिण भारतीय (द्रविड़) शैली का मिश्रण है, जो किले की सबसे ऊंची संरचना है।
  • गोपांचल और उरवाई घाटी की जैन मूर्तियाँ :– उरवाई गेट के रास्ते पर पहाड़ी को काटकर बनाई गई जैन तीर्थंकरों की विशालकाय मूर्तियाँ हैं, जिनमें भगवान पार्श्वनाथ की 47 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा मुख्य है। इन्हें 15वीं शताब्दी में तोमर शासनकाल के दौरान तराशा गया था।

यात्रा संबंधी जानकारी और पहुँचने का मार्ग (Travel Guide & Routes) :-

टिकट और प्रवेश (Tickets & Entry) :

  • भारतीय नागरिकों के लिए :– ₹25 प्रति व्यक्ति (मुख्य महलों के लिए)।
  • विदेशी नागरिकों के लिए :– ₹300 प्रति व्यक्ति।
  • संग्रहालय (गुजरी महल) टिकट :– ₹10 प्रति व्यक्ति।
  • फोटोग्राफी शुल्क :– मोबाइल फोन और डिजिटल कैमरों से सामान्य फोटोग्राफी बिल्कुल मुफ्त (Free) है।

समय (Visiting Time) :

  • खुलने का समय :– सुबह 06:00 बजे से शाम 05:30 बजे तक।
  • कार्य दिवस :– यह किला सप्ताह के सभी सात दिन पर्यटकों के लिए खुला रहता है। शाम को यहाँ एक शानदार ‘लाइट एंड साउंड शो‘ (Light and Sound Show) भी आयोजित होता है।

पहुँचने का मार्ग (How to Reach) :

  • रेल मार्ग द्वारा :– ग्वालियर रेलवे स्टेशन (Gwalior Junction) देश के सभी प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। स्टेशन से किले की दूरी मात्र 4 किलोमीटर है, जहाँ से आप ऑटो या टैक्सी ले सकते हैं।
  • हवाई मार्ग द्वारा :– ग्वालियर का राजमाता विजयाराजे सिंधिया हवाई अड्डा (Gwalior Airport) शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है, जहाँ से किले के लिए सीधे कैब उपलब्ध रहती हैं।
  • सड़क मार्ग/ई-रिक्शा द्वारा :– ग्वालियर शहर के मुख्य चौराहों से किले के पश्चिमी प्रवेश द्वार (उरवाई गेट) तक जाने के लिए स्थानीय ऑटो और ई-रिक्शा (e-rickshaw) आसानी से मिल जाते हैं। किले के ऊपर जाने के लिए निजी गाड़ियाँ या ऑटो किराए पर लेना सबसे सुविधाजनक रहता है, क्योंकि चढ़ाई काफी खड़ी है।

फोटोग्राफी स्पॉट्स (Photography Spots) :

  • मान मंदिर महल का बाहरी हिस्सा :– जहाँ नीली टिमटिमाती टाइलों और हाथियों की नक्काशी वाली दीवारें बैकग्राउंड में आती हैं।
  • सास-बहू मंदिर के नक्काशीदार खंभे :– जहाँ सुबह की धूप पत्थरों की बारीक जालीदार काम को निखारती है।
  • किले की प्राचीर से शहर का दृश्य :– जहाँ से नीचे बसा पूरा ग्वालियर शहर और ऐतिहासिक इमारतें बेहद खूबसूरत दिखाई देती हैं।

स्थानीय स्वाद और प्रसिद्ध बाज़ार (Local Food & Shopping) :

  • स्थानीय स्वाद :– ग्वालियर अपने स्ट्रीट फूड के लिए बेहद मशहूर है। किले के पास और शहर के पुराने हिस्सों में मिलने वाली बेढई (कचौड़ी जैसी पूरी और आलू की सब्जी), पोहा-जलेबी और सर्दियों के दिनों में मिलने वाली प्रसिद्ध गजक का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें।
  • प्रसिद्ध बाज़ार :– किले के पास स्थित ‘बाड़ा’ (महाराज बाड़ा) ग्वालियर का सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक बाज़ार है। यहाँ से आप पारंपरिक चंदेरी और महेश्वरी साड़ियाँ, हस्तशिल्प का सामान और चमड़े के उत्पाद खरीद सकते हैं।

दिलचस्प तथ्य (Interesting Facts) :-

  • शून्य (Zero) का सबसे पुराना लिखित प्रमाण :– किले के ऊपर जाने वाले मार्ग पर स्थित ‘चतुर्भुज मंदिर‘ में नौवीं शताब्दी का एक शिलालेख है, जिसे दुनिया में ‘शून्य’ (0) के सबसे पहले लिखित और प्रामाणिक दस्तावेज़ों में से एक माना जाता है।
  • अभिशप्त भूमिगत जेल :– मुग़ल काल में इस किले का उपयोग शाही कैदियों के लिए एक वीआईपी जेल के रूप में किया जाता था। जहाँ बंदियों को अफीम का पानी पिलाकर धीरे-धीरे मानसिक रूप से कमजोर कर दिया जाता था।
  • दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा :– इसी किले में मुग़ल सम्राट जहांगीर ने सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी को कैद रखा था। जब वे रिहा हुए, तो उन्होंने अपने साथ 52 हिंदू राजाओं को भी जेल से मुक्त कराया था, जिनकी याद में यहाँ भव्य गुरुद्वारा बना हुआ है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :-

प्रश्न 1:- ग्वालियर किले को “किलों का रत्न” क्यों कहा जाता है?

उत्तर:- इसकी अभेद्य बनावट, रणनीतिक ऊंचाई और इसके भीतर बने मान मंदिर जैसे महलों पर किए गए अद्भुत नीले रंग के टाइल वर्क व बारीक नक्काशी के कारण मुग़ल शासक बाबर ने इसे किलों का रत्न या मोतियों का हार कहा था।

प्रश्न 2:- क्या हम अपनी निजी गाड़ी से किले के ऊपर तक जा सकते हैं?

उत्तर:- हाँ, किले के पश्चिमी मार्ग यानी ‘उरवाई गेट‘ की तरफ से पक्की सड़क बनी हुई है, जिससे कार, बाइक या ऑटो के जरिए सीधे किले के मुख्य परिसर और महलों तक पहुँचा जा सकता है।

प्रश्न 3: ग्वालियर किले में शाम को होने वाले लाइट एंड साउंड शो का क्या महत्व है?

उत्तर:- यह शो अमिताभ बच्चन की प्रतिष्ठित आवाज में किले के समृद्ध इतिहास, राजा मानसिंह और रानी मृगनयनी की प्रेम कहानी और किले पर हुए युद्धों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है, जो पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक है।

“गोपांचल पहाड़ी के सीने पर गर्व से खड़ा ग्वालियर का किला, सदियों के शौर्य, अमर प्रेम और भारतीय स्थापत्य कला के उस सुनहरे वैभव का प्रतीक है जो वक्त की धूल में भी कभी धुंधला नहीं पड़ता।”

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